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केंद्र से 8 हजार करोड़ नहीं मिले, डीए और योजनाओं का बजट अटका

भोपाल 
 राज्य सरकार वित्तीय दिक्कतों से जूझ रही है। वह साढ़े चार लाख कर्मचारियों को 2 प्रतिशत डीए नहीं दे पा रही, साथ ही सरल बिजली योजना का लाभ ले चुके उपभोक्ताओं के समायोजन का पैसा भी बिजली कंपनियों को नहीं दे पा रही है।

शहरी क्षेत्रों में चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना में भी मुश्किलें बढ़ रही हैं। एक तरफ वित्तीय वर्ष 2018-19 का 22 हजार 347 करोड़ रुपए का आखिरी सप्लीमेंट्री बजट 10 जनवरी को पास होने के बाद भी अभी तक विभागों को राशि नहीं मिली, जबकि ऑनलाइन व्यवस्था में दूसरे-तीसरे दिन ही राशि विभागों तक पहुंच जाती है। दूसरी ओर मप्र सरकार को केंद्र से 31 मार्च तक मिलने वाले 8 हजार करोड़ रु. का इंतजार है। बताया जा रहा है केंद्र से पैसा मिलने के बाद ही स्थिति बेहतर हो सकती है। तब तक व्यवस्था संचालन के लिए राज्य सरकार ने एक हजार करोड़ रु. का कर्ज बाजार से उठाया है। यह मिलाकर बाजार से इस वित्तीय वर्ष में अब तक 13000 करोड़ रु. का कर्ज लिया जा चुका है।     
वित्त विभाग ने कहा पैसा नहीं, कई कामों की गति धीमी पड़ी : सरल बिजली बिल का पैसा 400 करोड़ अटका 200 रुपए फ्लैट रेट पर बिजली देने की सरल बिजली स्कीम में अक्टूबर माह तक उपभोक्ताओं को राहत मिल गई है हैं। बिजली कंपनियों को इस राशि की भरपाई राज्य सरकार को करना है। यह राशि 400 करोड़ के करीब हो गई है। वित्त विभाग ने इसमें कुछ आपत्ति लगाकर फाइल लौटा दी है।
जंगल के प्रबंधन, भवनों का पैसा रोका 7 करोड़ में से सिर्फ 30 लाख मिले : ओपन फॉरेस्ट प्रबंधन के लिए 7 करोड़ का प्रावधान है। तीस लाख रुपए रुपए मिले हैं। बाकी राशि रोक दी गई। भवनों की मरम्मत के लिए 22 करोड़ चाहिए थे, सिर्फ 9 करोड़ ही दिए गए।
700 करोड़ सड़कों के लिए चाहिए : लोकनिर्माण विभाग और रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन को सड़कों समेत अन्य निर्माण कार्यों के लिए करीब 700 करोड़ रुपए की जरूरत इसी वित्तीय वर्ष में है।
पीएम आवास स्कीम (अर्बन)  : मप्र के 712 करोड़ रु. अटके, केंद्र से पैसा मिलेगा तो ही मेचिंग ग्रांट देंगे शहरी क्षेत्रों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में केंद्र सरकार से पहली किस्त के 600 करोड़ और दूसरी किस्त के 112 करोड़ रु. मिलने हैं। राज्य सरकार ने 500 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण-पत्र भेज दिया है, 300 करोड़ का भेजा जा रहा है। वित्त विभाग ने कहा है कि केंद्र से पैसा मिलेगा तो मेचिंग ग्रांट तुरंत दी जाएगी। इस स्कीम में 60% केंद्र व 40% राज्य सरकार देती है।
7वां वेतनमान अब तक पेंडिंग : 600 करोड़ का भार आएगा, पिछला डीए नहीं मिला, नया भी रुकेगा 7वां वेतनमान लागू होने के बाद एक जुलाई 2018 से 2 प्रतिशत डीए बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया। केंद्र ने इसे लागू कर दिया, लेकिन मप्र में अभी भी यह पेंडिंग है। वित्त विभाग पैसा नहीं होने की दलील दे रहा है। एक जनवरी 2019 से फिर डीए बढ़ना है। केंद्र सरकार जल्द ही इसकी घोषणा कर सकती है। पिछला डीए देने पर सरकार के खाते से 600 करोड़ रु. जाएंगे।
कर्जमाफी सरकार ने किया 5000 करोड़ रुपए का प्रावधान : 22 फरवरी से किसानों के खातों में जमा कराना है पैसा वित्त विभाग के सूत्रों का कहना है कि पैसे की कमी के कारण सरकार ने कई स्कीमों की राशि का फ्लो कम कर दिया है, लेकिन यह स्थिति ज्यादा दिन नहीं रहेगी।
हालांकि किसानों की कर्जमाफी की मोटी राशि देने के बाद स्थिति सुधरने में वक्त लगेगा। सप्लीमेंट्री में सरकार ने किसानों की कर्जमाफी के लिए 5000 करोड़ का प्रावधान किया है, साथ ही दावा किया है कि 22 फरवरी से किसानों के खातों में कर्जमाफी का पैसा दे दिया जाएगा। इसमें भी संशय की स्थितियां बन रही हैं।