सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के सतना जिले में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले शिक्षक की फांसी की सजा के अमल पर शुक्रवार को रोक लगा दी।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने महेन्द्र सिंह गोंड को जबलपुर जेल में दो मार्च को होने वाली फांसी रोक दी। सतना की अदालत ने गत चार फरवरी को महेन्द्र सिंह गोंड को डेथ वारंट जारी किया था।
इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 25 जनवरी को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए फांसी की सजा पर मुहर लगाई थी। इसके बाद सतना जिला एवं सत्र न्यायालय ने 2 फरवरी को आरोपी का डेथ वारंट जारी किया था। इसमें फांसी का दिन और टाइम भी बताया गया था।

कोर्ट ने बताया है विरल से विरलतम केस
कोर्ट ने कहा कि आरोपी का कृत्य विरल से विरलतम श्रेणी में आता है और अधीनस्थ अदालत ने आरोपी को उसके कृत्य की सही सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार सतना के परसमानिया गांव में रहने वाले महेन्द्र सिंह गौड़ ने 30 जून और एक जुलाई के दरम्यानी रात मासूम को अगवा कर लिया था। जब वह अपने पिता के साथ सो रही थी। आरोपी ने बच्ची को खेत में ले जाकर उसके साथ ज्यादती की थी। आरोपी बच्ची को अचेत अवस्था में छोड़कर फरार हो गया।
12 साल से कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म पर फांसी
सरकार ने हाल ही में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में संशोधन करके 12 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ दुष्कर्म के दोषी के लिए मौत की सजा के प्रावधान किए हैं। ये प्रावधान आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 2018 के जरिए किए गये हैं।
सरकार ने हाल ही में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में संशोधन करके 12 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ दुष्कर्म के दोषी के लिए मौत की सजा के प्रावधान किए हैं। ये प्रावधान आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 2018 के जरिए किए गये हैं।