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राम सरोज समूह का 'तीर्थ दर्शन संकल्प': आस्था और सेवा के मिलन से 5वें वर्ष में प्रवेश, जगन्नाथ पुरी रवाना हुआ तीर्थ यात्रियों का जत्था

सागर। राम सरोज समूह द्वारा संचालित 'तीर्थ दर्शन संकल्प' के अंतर्गत जगन्नाथ पुरी जाने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए सोमवार को होटल राम सरोज पैलेस में टिकिट वितरण और सम्मान समारोह 'जगन्नाथ पर्व' के रूप में आयोजित किया गया। समूह के सेवा कार्यों के 5वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक उत्साह और करुणा का अद्भुत संगम देखने को मिला।



टिकट वितरण और संतों का आशीर्वाद

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रामबाग मंदिर के वरिष्ठ संत पूज्य श्री घनश्याम दास जी महाराज नर्मदा भक्त संत श्री पंडित केशव गोस्वामी जी एवं पंडित संदीप मिश्रा महाराज के परम सानिध्य में गणेश पूजन किया गया उसके उपरांत रामसरोज समूह के सदस्यों ने परंपरानुसार संतजनों का शाल श्रीफल रुद्राक्ष की माला एवं बाबा खाटू श्याम जी का छाया चित्र भेंट कर आशीर्वाद लिया इसके उपरांत संतजनों, वरिष्ठ पत्रकार जनों,समाजसेवी बबीता केसरवानी, गीता-शैलेश केसरवानी एवं श्वेता-अखिलेश मोनी केसरवानी ने सभी यात्रियों को यात्रा टिकट एवं सहयोग राशि सौंपी और यात्रियों पर पुष्प वर्षा एवं तिलक लगाकर उनका स्वागत किया एवं उनकी सुखद यात्रा की कामना की।

रामबाग मंदिर के महंत श्री घनश्याम दास जी महाराज ने कहा कि "आज का दिन अत्यंत हर्ष और श्रद्धा का है। राम सरोज समूह द्वारा पिछले चार वर्षों से अनवरत चलाया जा रहा यह 'तीर्थ दर्शन संकल्प' केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति और सेवा का एक अद्भुत संगम है। हमारे शास्त्र कहते हैं कि 'सेवा परमो धर्म:' और जब सेवा का भाव आस्था के साथ जुड़ता है, तो वह साक्षात ईश्वर की सेवा बन जाता है।

यह समूह जिस निष्ठा के साथ वृद्धजनों और निर्धन भक्तों को तीर्थ दर्शन करा रहा है, वह समाज के लिए एक प्रेरणा है। जगन्नाथ पुरी की यह यात्रा उन सभी के जीवन में नई ऊर्जा और शांति लेकर आए, यही मेरी मंगलकामना है। प्रभु जगन्नाथ जी का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे और यह सेवा का कार्य निरंतर गतिमान रहे।"

पंडित श्री केशव महाराज ने कहा कि "सत्य ही कहा गया है कि मानव सेवा ही माधव सेवा है। राम सरोज समूह ने अपने 'तीर्थ दर्शन संकल्प' के माध्यम से इस वाक्य को चरितार्थ किया है। आज जब जत्था जगन्नाथ पुरी की पावन यात्रा के लिए रवाना हो रहा है, तो यह केवल उन तीर्थ यात्रियों की यात्रा नहीं है, बल्कि उस संकल्प की विजय है जिसने चार वर्षों में हजारों चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है।

तीर्थ का वास्तविक अर्थ होता है 'तरना'—अपने भीतर के विकारों को धोकर पवित्र होना। राम सरोज समूह के माध्यम से जो भक्त आज पुरी धाम जा रहे हैं, वे वहाँ प्रभु के दर्शन के साथ-साथ इस निस्वार्थ सेवा भाव का भी अनुभव करेंगे। मैं इस पुनीत कार्य के लिए समूह के सभी सदस्यों को हृदय से साधुवाद देता हूँ और कामना करता हूँ कि भगवान जगन्नाथ की कृपा से यह यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों।

इस अवसर पर समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने कहा कि "राम सरोज समूह के लिए आज का दिन अत्यंत गौरवपूर्ण है। पिछले चार वर्षों का हमारा यह सफर महज एक यात्रा नहीं, बल्कि समाज के उन वर्गों के प्रति हमारा समर्पण है, जो किन्हीं कारणों से प्रभु के धाम तक नहीं पहुँच पाते। 'तीर्थ दर्शन संकल्प' की यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समूह के हर उस सदस्य की है, जिसने इसे अपना व्यक्तिगत दायित्व समझा है।

जगन्नाथ पुरी की इस यात्रा में हमारे साथ चल रहे वृद्धजनों के चेहरे पर जो आनंद और संतोष के भाव दिख रहे हैं, वही हमारी असली कमाई है। हम इस सेवा भाव को और भी मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं। प्रभु जगन्नाथ की कृपा से हमारी यह सेवा यात्रा निरंतर और अधिक व्यापक होती रहेगी।

इस अवसर पर समाजसेवी अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि "आज जब हमारे तीर्थ यात्रियों का जत्था जगन्नाथ पुरी के लिए रवाना हो रहा है, तो मन में असीम शांति और संतुष्टि का अनुभव हो रहा है। राम सरोज समूह का उद्देश्य केवल तीर्थ दर्शन कराना नहीं, बल्कि समाज में सेवा और भाईचारे की भावना को जागृत करना है। पांचवें वर्ष में प्रवेश करना यह दर्शाता है कि नेक नीयत से किया गया कार्य समाज का समर्थन भी पाता है और सफल भी होता है।  इस यात्रा के आयोजन में  हमारा प्रयास है कि बुजुर्गों को वह सम्मान और आध्यात्मिक सुख प्रदान करें जिसके वे हकदार हैं। मैं यात्रा पर गए सभी यात्रियों के मंगलमय और सुखद सफर की कामना करता हूँ।"

आस्था की अनूठी कहानियाँ: जब सेवा बनी सहारा

इस कार्यक्रम में उन यात्रियों के अनुभव भी साझा किए गए, जिनके लिए यह यात्रा मात्र भ्रमण नहीं, बल्कि जीवन की एक बड़ी अभिलाषा की पूर्ति है।

मुलाबाई का उत्साह:
इस दल में शामिल मुलाबाई ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे अपने जीवन में पहली बार ट्रेन से सफर कर रही हैं, जिसे लेकर वे अत्यंत उत्साहित और भावुक हैं।

बद्री सोनी की निष्ठा: यात्री बद्री सोनी ने बताया कि पुत्र न होने के कारण वे स्वयं अपने हाथों से जीवित रहते हुए 'पिंडदान' करने गयाजी भेजा था। जो राम सरोज समूह के सहयोग से ही संभव हो पाया।

रत्ना यादव का संघर्ष:
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही रत्ना यादव, जिनकी आर्थिक स्थिति यात्रा के अनुकूल नहीं थी, ने बताया कि राम सरोज समूह ने ही उन्हें सोमनाथ की यात्रा करवाकर उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी की थी।

कैलाश की यात्रा: अपाहिज होने के कारण समाज और परिवार से उपेक्षित कैलाश की चिंता करते हुए समूह ने उन्हें मथुरा की तीर्थ यात्रा करवाई, जिससे उनके जीवन में नई उमंग आई।

वृद्धाश्रम के बुजुर्ग:
समूह ने उन वृद्धजनों को भी मथुरा दर्शन कराए जिन्हें उनके अपनों ने वृद्धाश्रम छोड़ दिया था या जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है। इन बुजुर्गों के चेहरों पर समूह द्वारा दी गई तीर्थ यात्रा की मुस्कान देखते ही बनती है।

सेवा भाव का 4 वर्षों का गौरवशाली सफर

राम सरोज समूह पिछले 4 वर्षों से निरंतर समाज सेवा में समर्पित है और अब अपने 5वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। समूह के 'तीर्थ दर्शन संकल्प' का दायरा व्यापक है:

अयोध्या धाम: 5 बार श्रद्धालुओं को दर्शन हेतु भेजा।

मथुरा-वृंदावन: 4 बार भक्तों को मथुरा की तीर्थ यात्रा कराई गई।

अन्य तीर्थ: जगन्नाथ पुरी, सोमनाथ, काशी-वाराणसी, प्रयागराज महाकुंभ तथा गयाजी (पूर्वजों के तर्पण हेतु) जैसे पावन स्थलों पर भी समूह द्वारा यात्रियों के दल भेजे जा चुके हैं। कार्यक्रम का मंच संचालन एम डी त्रिपाठी ने किया। आभार भारती नवीन केसरवानी ने माना।  कार्यक्रम में तीर्थ यात्रियों, नगर के गणमान्य नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया। अंत में आयोजित स्नेहिल 'भुट्टा पार्टी' ने धार्मिक आयोजन को और भी यादगार बना दिया।
 
इस अवसर पर श्याम नेमा मुकेश तिवारी भूपेंद्र सिंह संदीप सोनी सुनील भदोरिया यदु सोनी संयोग सिंह अंशुल सिंह ठाकुर जीतेंद्र रैकवार विनय सबलोक विनय मिश्रा विष्णु साहू आशीष ठाकुर अब्बी साहू विनोद साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।