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कांग्रेस ने राफेल की पूजा को नौटंकी बताया, भाजपा का जवाब- क्वात्रोची की पूजा करने वालों को समस्या होना स्वाभाविक


नई दिल्ली। भाजपा ने कांग्रेस के उस बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा राफेल की पूजा किए जाने को तमाशा करार दिया था। भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह वायु सेना के आधुनिकीकरण का विरोध कर रही है और भारतीय रीति-रिवाज और परंपरा का मजाक बना रही है। भाजपा ने ट्वीट कर कहा, “जो पार्टी क्वात्रोची की पूजा करती है उसके लिए शस्त्र पूजा स्वाभाविक रूप से समस्या लगेगी। धन्यवाद खड़गेजी आपने बोफोर्स घोटाले की याद दिला दी।”

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा- कांग्रेस को सोचना चाहिए कि उन्हें किसका समर्थन करना चाहिए और किसका नहीं? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कल फ्रांस में राफेल का शस्त्र पूजा की थी, लेकिन कांग्रेस नेता इसका विरोध कर रहे हैं। क्या शस्त्र पूजा विजयादशमी पर नहीं की जानी चाहिए? विजयादशमी पर शस्त्र पूजन बुराई पर सच्चाई की जीत का प्रतीक है।
हमने बोफोर्स डील में कभी नौटंकी नहीं की: खड़गे
इससे पहले, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राजनाथ सिंह द्वारा पूजा किए जाने पर कहा था, “इस तरह का तमाशा करने की आवश्यकता नहीं थी। जब हमने बोफोर्स जैसे हथियार खरीदे थे तो वहां कोई नहीं गया था और बिना किसी दिखावे की उसे लाया गया था।”

राशिद अल्वी ने कहा था, “मैं कहना चाहता हूं कि यह सरकार पूरी तरह नौटंकीबाज है। आप फ्रांस जा रहे हैं और पूजा कर रहे हैं। क्या पहले राफेल जेट भारत नहीं आ रहा था? आप विदेश जा रहे हैं और नाटक कर रहे हैं। सवाल यह है कि नरेंद्र मोदी सरकार और भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी को अपना नेता मानती है या नहीं। यदि वे मानते हैं तो उन्हें सोचना चाहिए कि वे अपने छह साल के कार्यकाल में कभी भी फ्रांस जाकर ड्रामा नहीं किया था।”
मई 2022 तक भारत को सभी 36 राफेल मिलेंगे
इससे पहले, राजनाथ सिंह अपने तीन दिवसीय फ्रांस दौरे में मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर पहला राफेल विमान हासिल किया था। उन्होंने इस दौरान शस्त्र पूजा की थी और विमान में उड़ान भरी थी। भारत-फ्रांस के बीच राफेल के लिए 59,000 करोड़ रुपए के सौदा हुआ था। मई 2022 तक भारत को सभी 36 राफेल मिल जाएंगे।
2016 में डील हुई थी
राफेल लड़ाकू विमान डील भारत और फ्रांस की सरकार के बीच सितंबर 2016 में हुई थी। इसमें वायुसेना को 36 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान मिलेंगे। यह सौदा 7.8 करोड़ यूरो (करीब 58,000 करोड़ रुपए) का है। कांग्रेस का दावा है कि यूपीए सरकार के दौरान एक राफेल फाइटर जेट की कीमत 600 करोड़ रुपए तय की गई थी। मोदी सरकार के दौरान एक राफेल करीब 1600 करोड़ रुपए का पड़ेगा। भारत अपने पूर्वी और पश्चिमी मोर्चों पर वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए राफेल ले रहा है। वायुसेना राफेल की एक-एक स्क्वॉड्रन हरियाणा के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हशीमारा एयरबेस पर तैनात करेगी।
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