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अमेरिका ने कहा- पाकिस्तान हाफिज सईद पर कार्रवाई करे, आतंकवाद के पीड़ित भी यही चाहते हैं


वॉशिंगटन। अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान आतंकियों को गिरफ्तार करने के बाद उन पर मुकदमा चलाए और कार्रवाई करे। अमेरिकी विदेश विभाग में दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की मंत्री एलिस जी वेल्स ने रविवार को कहा, “हम लश्कर-ए-तैयबा के आंतकियों को गिरफ्तार करने का स्वागत करते हैं। जो आतंकवाद का शिकार हुए हैं, उन्हें हाफिज सईद और इन आतंकियों पर होने वाली कार्रवाई को देखने का हक है।” पाकिस्तान ने 10 अक्टूबर को हाफिज और उसके कुछ करीबियों को गिरफ्तार किया था।
हाफिज को कई बार गिरफ्तार कर छोड़ चुका है पाकिस्तान
पाकिस्तान का पहले आतंकियों को पकड़ने और फिर छोड़ने का पुराना इतिहास रहा है। इस लिहाज से एलिस वेल्स का यह बयान अहम माना जा रहा है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दबाव में हाफिज को करीब 8 बार गिरफ्तार कर चुका है। हालांकि, हर बार उसे अलग-अलग बहानों से छोड़ दिया। 2008 में मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान ने हाफिज को गिरफ्तार करने का दावा किया था, लेकिन बाद में सबूतों के अभाव में उस पर आगे कार्रवाई नहीं की। 
पाकिस्तान पर एफएटीएफ से ब्लैकलिस्ट होने का खतरा
अमेरिका की तरफ से यह बयान ऐसे समय आया है, जब टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने पर फैसला सुनाने वाली है। रविवार को एफएटीएफ की बैठक पेरिस में शुरू हुई। ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए उसे समिति के सामने साबित करना होगा कि उसने टेरर फंडिंग में लिप्त लोगों पर कार्रवाई की है। एफएटीएफ की बैठक 18 अक्टूबर तक चलेगी। 
2018 में ग्रे लिस्ट में डाला गया पाकिस्तान का नाम
एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। साथ ही ब्लैक लिस्ट से खुद को बचाने के लिए 27 सूत्रीय एक्शन प्लान सौंपा था। अगर संस्था को लगता है कि पाकिस्तान ने एक्शन प्लान को सही तरीके से लागू नहीं किया है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा।
अगस्त में पाकिस्तान को फॉलोअप सूची में डाला गया था
इससे पहले अगस्त में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में हुई बैठक में एफएटीएफ से जुड़े एशिया पैसिफिक जॉइंट ग्रुप (एपीजेजी) ने मानकों को पूरा नहीं करने पर पाकिस्तान को इनहेन्स्ड एक्सपीडिएट फॉलोअप लिस्ट में डाल दिया था। ग्रुप के मुताबिक, पाकिस्तान आतंकियों की वित्तीय मदद और मनी लॉन्ड्रिंग के 40 में से 32 मानकों का पालन नहीं कर रहा है। 

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