- प्रत्येक आदिवासी श्रमिक को मिलेगी 30-30 हजार रुपए की आर्थिक सहायता और प्रशासन आगे भी रखेगा नजर, ताकि आगे श्रमिकों को जीवन यापन में परेशानी नही हो
- तमिलनाडू में श्रमिकों को बंधक बनाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के बाद अब मजदूरों की सप्लाई करने वाले नेटवर्क की छानबीन में जुटी पुलिस
बैतूल। तमिलनाडु के इरोड जिले में मध्यप्रदेश के बैतूल और हरदा जिले के बंधुआ बनाकर रखे गए 24 श्रमिकों का सफल रेस्क्यू के बाद उनके घरों तक सुरक्षा के साथ पहुंचाया गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, जिला प्रशासन तथा वनवासी कल्याण आश्रम के त्वरित एवं समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। सभी श्रमिकों के बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचने पर कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने आत्मीय स्वागत किया और खाने की व्यवस्था करवाने के साथ ही बाद में उनको घरों तक विशेष बस से भिजवाया गया।
इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष महेश्वर भलावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी, एसडीएम अभिजीत सिंह, जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत, थाना प्रभारी नीरज पाल तथा अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बैतूल स्टेशन पर तमिलनाडू से लौटे सभी श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित की गई। इस मौके पर कलेक्टर सूर्यवंशी ने श्रमिकों से आत्मीय चर्चा करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि प्रशासन द्वारा उनके सुरक्षित गृह पहुंचने की समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग निरंतर उनके संपर्क में रहेंगे। साथ ही श्रम पदाधिकारी को निर्देशित किया कि श्रमिकों से संपर्क बनाए रखते हुए आर्थिक सहायता स्वीकृति हेतु आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएं।
बैतूल रेलवे स्टेशन से सभी श्रमिकों को उनके गृह ग्राम तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई तथा भोजन की भी व्यवस्था की गई। सुरक्षित वापसी पर श्रमिकों ने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
होली पर छुट्टी नहीं दी और बंधुआ बनाकर काम कराया
जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत ने बताया कि यह सारे श्रमिक काम करने के लिए तमिलनाडु के इरोड जिले गए थे, जहां होली पर्व पर अवकाश मांगने पर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और बंधुआ बनाकर कार्य कराया जा रहा था। मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य प्रकाश ऊईके के माध्यम से मिलते ही बैतूल जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए श्रम, पुलिस एवं राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से इरोड जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित किया और सभी श्रमिकों को मुक्त कराया। उक्त कार्य में समाजसेवी प्रवीण ढोलके ओर विक्रांत कुमरे ने भी सक्रिय भूमिका निभाई ।

जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत ने बताया कि यह सारे श्रमिक काम करने के लिए तमिलनाडु के इरोड जिले गए थे, जहां होली पर्व पर अवकाश मांगने पर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और बंधुआ बनाकर कार्य कराया जा रहा था। मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य प्रकाश ऊईके के माध्यम से मिलते ही बैतूल जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए श्रम, पुलिस एवं राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से इरोड जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित किया और सभी श्रमिकों को मुक्त कराया। उक्त कार्य में समाजसेवी प्रवीण ढोलके ओर विक्रांत कुमरे ने भी सक्रिय भूमिका निभाई ।

प्रत्येक श्रमिक को 30-30 हजार रुपए की आर्थिक मदद की गई
तमिलनाडू से रेस्क्यू किए गए प्रत्येक श्रमिक को शासन द्वारा 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाएगी, जिससे वे अपने जीवन को पुन: व्यवस्थित कर सकें। जिला प्रशासन द्वारा उनके पुनर्वास एवं आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है।
रेस्क्यू किए गए कुल 24 श्रमिकों में से 4 हरदा जिले तथा 20 बैतूल जिले के निवासी हैं। बैतूल के सभी श्रमिक भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा ग्राम के रहने वाले हैं। हरदा जिले के चार श्रमिकों को सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
तमिलनाडू से रेस्क्यू किए गए प्रत्येक श्रमिक को शासन द्वारा 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाएगी, जिससे वे अपने जीवन को पुन: व्यवस्थित कर सकें। जिला प्रशासन द्वारा उनके पुनर्वास एवं आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है।
रेस्क्यू किए गए कुल 24 श्रमिकों में से 4 हरदा जिले तथा 20 बैतूल जिले के निवासी हैं। बैतूल के सभी श्रमिक भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा ग्राम के रहने वाले हैं। हरदा जिले के चार श्रमिकों को सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
तमिलनाडू के इरोड जिले में दर्ज की गई है एफआईआर
श्रमिकों को त्योहार पर अवकाश नहीं देकर बंधुआ बनाकर जबरन काम कराने के आरोप में तमिलनाडू के इरोड जिले में एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें जो भी सहयोग होगा, बैतूल पुलिस करेगी। साथ ही इस नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान भी की जा रही है, ताकि किसी के भी शामिल होने पर कार्रवाई हो सके।
-वीरेंद्र कुमार जैन, पुलिस अधीक्षक, जिला बैतूल
