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नल जल योजना में हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार....अब पीएचई को ही बंद करने की तैयारी

  • जल जीवन मिशन पर श्वेत पत्र जारी करे मध्य प्रदेश सरकार- पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह

भोपाल | 
 पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आरोप लगाया है कि गावों में नल जल योजना के लिए केंद्र सरकार से मिले तीस हजार करोड़ रुपए में हुए हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार अब पीएचई विभाग को ही बंद करने की तैयारी कर रही है| इसका कुछ भाग ग्रामीण विकास विभाग और कुछ हिस्सा नगरीय निकाय और आवास विभाग में विलय किया जा रहा है| यह सब केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के उस फैसले की आड़ में किया जा रहा है जिसमें कहा गया है कि एकल नल जल योजना का पूरा हिस्सा पीएचई से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को दे दिया जाए| मुख्यमंत्री मोहन यादव इस पर अपनी मौखिक सहमति भी दे चुके हैं| यह सहमति केवल महा घोटाले के सबूत को मिटाने और भ्रष्टाचारी चहेते ठेकेदारों को बचाने की सोची समझी साजिश है|

 
अजय सिंह ने कहा कि विभाग को खत्म कर उसे अन्य विभाग में मिलाने से क्या भ्रष्टाचार की मानसिकता समाप्त हो जाएगी? गांव में पीने का पानी उपलब्ध कराने का पवित्र काम भी अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है| लोग पीने के पानी के लिए त्राहि त्राहि कर रहे हैं लेकिन सरकार में बैठे लोगों को कोई फिक्र नहीं है| वे सिर्फ अपनी प्यास बुझा रहे हैं| इंदौर जैसे शहर में पानी की किल्लत हो रही है| अभी विगत दिवस जनता ने सड़क पर भारी विरोध दर्ज किया और प्रतीक स्वरूप दंडवत करके उन्हें रोकने आए पुलिस वालों से पानी की भीख मांगी| इसका वीडियो पूरे देश में वायरल हो रहा है|

सिंह ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पुनर्गठन और इसे बंद करने की सरकारी कवायद पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह प्रशासनिक फेरबदल प्रदेश की जनता के हितों के लिए नहीं, बल्कि जल जीवन मिशन के तहत हुए हजारों करोड़ रुपये के 'नल-जल महाघोटाले' के सबूतों को मिटाने और भ्रष्ट अधिकारियों व चहेते ठेकेदारों को बचाने की एक सोची-समझी साजिश है।

बिना काम पूरा हुए ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब पूरे प्रदेश से यह शिकायतें आ रही हैं कि बिना काम पूरा हुए कागजों पर 'कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र' जारी कर ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया, तब सरकार जांच करने के बजाय विभाग को ही भंग करने की राह पर चल पड़ी है। विभाग बदलने से फाइलों की हेराफेरी होगी और जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार विभाग के ईएनसी को अपनी ही कैबिनेट मंत्री के खिलाफ एक हजार करोड़ की रिश्वतखोरी और केंद्रीय फंड की हेराफेरी की जांच के आदेश देने पड़े। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद भी राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब विभाग को मर्ज करके इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया जा रहा है।

सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड से लेकर मालवा और महाकौशल तक, हर जिले में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ है। मुरैना में “सीपेट” के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर घटिया पाइप पास कराए गए, तो मंदसौर में 108 करोड़ का भुगतान बिना किसी जमीनी काम के कर दिया गया। विभाग बदलने से क्या गांवों में पानी पहुँच जाएगा या खोदी गई सड़कें वापस ठीक हो जाएंगी?

महाघोटाले के असली सूत्रधार बड़े राजनेता और शीर्ष अधिकारी हैं

उन्होंने कहा कि इस महाघोटाले के असली सूत्रधार बड़े राजनेता और शीर्ष अधिकारी हैं, लेकिन सरकार विभाग के छोटे कर्मचारियों और उपयंत्रियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े मगरमच्छों के लिए बचने का रास्ता साफ़ रही है।

अजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की हैं कि पीएचई विभाग और जल जीवन मिशन के तहत हुए सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच शीघ्र ही किसी स्वतंत्र एजेंसी या मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में समय सीमा में कराई जाए।उन्होंने कहा कि सरकार तुरंत एक श्वेत पत्र जारी कर पानी के लिए तरस रही जनता को बताए कि अब तक कितना बजट स्वीकृत हुआ, कितना भुगतान किया गया और वास्तव में कितने गांवों में पानी मिला| जब तक भ्रष्टाचार की जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक विभाग के विलय या पुनर्गठन की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकार यह मुगालता छोड़ दे कि वह विभाग का नाम बदलकर या उसे बंद करके जनता की गाढ़ी कमाई के हजारों करोड़ रुपये हजम करने वालों को बचा लेगी। यदि सरकार ने तुरंत इस महाघोटाले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच नहीं कराई, तो कांग्रेस जनता की अदालत में सरकार के इस छलावे को बेनकाब करेगी|