फेडरेशन आफ मध्यप्रदेश चेबर आफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज की राय में सामान्य से अच्छा है बजट-2013
डीजल पर प्रदेश सरकार द्वारा बजट में कोई छूट नहीं दिए जाने के नतीजे में न तो उद्योगों को लाभ होगा और न ही किसानों को कोई बेनिफिट मिला, लेकिन उद्योगों के लिए इनपुट रिबेट की पात्रता देने से उद्योगपतियों को जिनकी पूंजी फंसी हुई थी, उन्हें काफी लाभ होगा।
यह कहना है फेडरेशन आॅफ मध्यप्रदेश चेबर आफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोविन्द गोयल का, जोकि शुक्रवार को राज्य के बजट पर मीडिया के साथ अपनी राय साझा कर रहे थे। इस अवसर पर सीए एवं प्रबंध समिति सदस्य आर. कृष्णन, एसके सोमानी एवं सचिव विजेन्द्र पुरी भी उपस्थित थे।
इनपुट टैक्स रिबेट का लाभ मिलेगा
गोविन्द गोयल ने बताया कि फेडरेशन व्यापारियों और उद्योगपतियों के हित की बात सरकार से करता है, उसने बजट पूर्व कई मांगें रखी थीं, जिसमें से कंपोजिसन सुविधा, इनपुट टैक्स रिबेट तथा आॅक्सीजन पर टैक्स माफी प्रमुख थीं। टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए फैब्रिक निर्माण उद्योगों को मध्यप्रदेश से ही मैटेरियल खरीदने पर कर की दर दो प्रतिशत करने की मांग थी, उसे भी सरकार ने माना है, साथ ही प्रचलित कमोडिटी कर की दर पांच प्रतिशत करने की मांग भी मान लिया है, जिससे उद्योगों को फायदा होगा।
उद्योग आईटीआर को लेकर काफी परेशान थे और इनपुट रिबेट नहीं मिलती थी, अब बैक गारंटी जमा करने पर कैश रिबेट मिलने से संचालन में आसानी होगी। उद्योगों को ऋण लेने पर मोर्टगेज दस्तावेजों पर जो स्टांप ड्यूटी लगती थी, उसे भी युक्तियुक्त किया है, जिसका भी फायदा उद्योगों को होगा।
आलू-सोयाबीन पर मंडी टैक्स माफ नहीं
सीए आर. कृष्णन तथा एसके सोमानी ने बताया कि दाल मिलों, कपास मिलों तथा गेहूं, आलू तथा सोयाबीन पर जो मंडी टैक्स माफ करने की मांग थी, उसे पूरा नहीं करने के कारण किसानों और व्यापारियों को इस बजट से कोई विशेष फायदा नहीं हुआ है। इसी प्रकार लोहा एवं इस्पात पर भी कोई छूट नहीं दी गई है। हां, यह सही है कि नए उद्योगों को लगाने के लिए एंगल, पत्ती, सीट पर प्रवेश कर घटा है, लेकिन इसका कोई विशेष फायदा नहीं होगा। यदि छूट देनी थी तो लोहे के सरियों पर दी जाती।
पोहा -चावल निर्माताओं को नुकसान होगा
धान की खरीदी पर टैक्स लगाने का प्रभाव प्रदेश के विशेषकर मंडीदीप, उज्जैन के पोहा तथा चावल निर्माताओं पर पड़ेगा और उन्हें प्रतिस्पर्धा में काफी नुकसान होगा, जिसका सरकार के समक्ष विरोध दर्ज कराया जाएगा। कुल मिलाकर फेडरेशन ने मध्यप्रदेश के बजट को सामान्य से अच्छा माना।