रेलिक रिपोर्टर, भोपाल.
नियमितीकरण नहीं होने से निराश संविदा महिला पर्यवेक्षकों ने सीएम हाउस जाकर इच्छा मृत्यु मांगी। मप्र महिला बाल विकास विभाग अंतर्गत महिला पर्यवेक्षक आज से पांच वर्ष पूर्व व्यापम की परीक्षा उत्तीर्ण कर मेरिट के आधार पर नियमित पदों के विरूद्ध नियुक्त हुई थीं। मंत्री परिषद ने 18 फरवरी 2014 को 3215 नियमित पदों का सृजन किया।
इन पदों में पूर्व से नियमित पदों के विरूद्व कार्यरत 1019 संविदा महिला पर्यवेक्षक के पद भी थे। शासन इन सब पदों पर नियमित भर्ती का निर्णय लेकर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिए।
कहा जा रहा है कि, पूर्व से नियमित पदों के विरूद्व कार्यरत संविदा महिला पर्यवेक्षकों को यदि नियमित होना है तो वो फिर से व्यापम की परीक्षा उत्तीर्ण करें। वर्तमान में सभी महिला पर्यवेक्षक विगत पांच वर्षो से पढ़ाई लिखाई से दूर हैं।
सरकार की दोहरी नीति के खिलाफ इच्छा मृत्यु
मप्र सरकार ने बिना किसी परीक्षा के पंचायत सचिवों, गुरूजियों, शिक्षाकर्मियों को जिनकी नियुक्ति पंचायत के सरपंचों के हस्ताक्षरों से की गई थी, वो भी बिना किसी माप दण्ड के। जबकि पंचायत सचिवों, गुरूजियों, शिक्षाकर्मियों के शासन में न तो कोई पद निर्मित थे ना ही उनकी नियुक्ति विधिवत की गई थी। ऐसे पंचायत कर्मियों, शिक्षाकर्मियों, गुरूजियों को सरकार नियमित पदों का निर्माण कर बिना किसी परीक्षा के बैक डोर एन्ट्री से अनुभव को आधार मानते हुये नियमित कर दिया। वहीं महिला पर्यपेक्षक व्यापम की परीक्षा देकर नियमित पदो के विरूद्व नियुक्त हुई थीं, को नियमित होने के लिए फिर से व्यापम की परीक्षा देने के लिए सरकार बाध्य कर रही है वो भी सीधी भर्ती परीक्षा के माध्यम् से। इसी का विरोध करते हुये संविदा महिला पर्यवेक्षक परिवार सहित इच्छामृत्यु की मांग करती हैं।
संविदा महिला पर्यवेक्षकों ने सीएम से मांगी इच्छामृत्यु
अक्टूबर 19, 2014
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