सिर्फ 6 साल का मासूम तुषार मानने को तैयार नहीं है कि, उसके प्यारे बाबू जी अब कभी लौट कर नहीं आएंगे। वह तो हर शाम घर के दरवाजे पर खड़ा होकर घंटों तक गली को निहारता रहता है। उसी रास्ते से तो उसके बाबूजी आते थे और उसको आते ही हाथो में उठाकर चक्कर खिलाते हुए घर के अंदर पहुंचते थे। तुषार की मासूमियत ही है कि, अपनी मां की उजड़ी मांग और घर में फैले मातम के बाद भी अहमदाबाद जाने की तैयारी में हैं। तुषार को भरोसा है कि, उसको जो बीमारी है तो उसके बाबूजी जरुर अपने साथ ले जाकर इंजेक्शन लगवाकर लाएंगे, ताकि वह भी ठीक होकर ट्रैक्टर पर अपने पापा के साथ घूमने जा सके।
पेटलावद हादसे में जान गंवाने वाले विजय राठौर के मासूम बेटे तुषार की दर्दनाक दास्तां
पेटलावद हादसे में अपने पिता विजय राठौर को गंवा चुके तुषार को फर्स्ट स्टेज का ब्लड कैंसर है। विजय राठौर भी हर दिन की तरह हादसे वाले दिन अपने घर से निकले तो पत्नी सोनू राठौर ने जल्दी घर आने का कहा था, क्योंकि कैंसर पीड़ित तुषार के साथ ही 3 साल की छोटी बेटी तनिषा शाम होते ही अपने बाबूजी के इंतजार में दरवाजे पर खडे हो जाते हैं। जाते-जाते विजय राठौर ने जल्दी आने का वादा करते हुए तुषार के सिर पर हाथ फेरते दुलार किया था और पत्नी-बेटी की ओर देखकर चले गए थे। यही आखिरी विदा थी, फिर विजय राठौर का रक्तरंजित शव ही देखने को मिला। घर में कोहराम मच गया और सोनू की तो दुनिया ही उजड़ गई। मोहल्ले वालों ने संभाला और विजय राठौर अपनी अंतिम यात्रा पर हमेशा के लिए चले गए।
हर हफ्ते जाते थे अहमदाबाद
तुषार को करीक 6 महीने पहले ही कैंसर डिटेक्ट हुआ था। तभी से हर हफ्ते उसको इलाज के लिए अहमदाबाद लेकर जाते थे, जहां जरुरत होने पर कई बार खून चढ़ाया गया। हफ्तेभर में 1200 रुपए के तीन इंजेक्शन लगते हैं। बेटे की जान बचाने के लिए विजय राठौर ने अपनी दुकान गिरवी रख दी और ट्रैक्टर ड्राइवरी करने लगा था। उसको एक ही धुन थी अपने बेटे को कैंसर के पंजे से किसी भी तरह से बचाने की। हालांकि, विजय के नहीं रहने के बाद उसके बडे भाई राजेंद्र राठौर बीते मंगलवार को ही अहमदाबाद ले गए थे। मजदूरी करके पेट पालने वाले बडे भाई के सामने भी इलाज का खर्च बड़ी समस्या है।
5 लाख में से 4 लाख फिक्स करवाए
हादसे में मरने वालों को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 लाख रुपए की मदद का ऐलान किया था। इसमें से सिर्फ एक लाख ही मृतकों के परिजन को दिया गया, बाकी 4 लाख उनके खाते में तीन साल के लिए फिक्स कर दिए गए हैं। सिर्फ इस राशि का ब्याज ही परिवारों को मिलेगा।
कलेक्टर मैडम नाम लिख ले गर्इं
विजय राठौर के बडे भाई राजेंद्र राठौर बताते हैं कि, मुख्यमंत्री के साथ कलेक्टर मैडम उनके घर आईं थीं और तुषार की बीमारी का पता चलने पर कागज में लिखकर ले गर्इं थी। बस उसके बाद से ही कोई पूछने नहीं आया। अब क्या करें, इलाज के लिए पहले ही विजय ने कर्जा ले रखा था अब परिवार के भरण पोषण सहित तुषार के इलाज का भी खर्चा है। राजेंद्र की समझ नहीं आ रहा कि, करे तो क्या करें..?
तुषार को करीक 6 महीने पहले ही कैंसर डिटेक्ट हुआ था। तभी से हर हफ्ते उसको इलाज के लिए अहमदाबाद लेकर जाते थे, जहां जरुरत होने पर कई बार खून चढ़ाया गया। हफ्तेभर में 1200 रुपए के तीन इंजेक्शन लगते हैं। बेटे की जान बचाने के लिए विजय राठौर ने अपनी दुकान गिरवी रख दी और ट्रैक्टर ड्राइवरी करने लगा था। उसको एक ही धुन थी अपने बेटे को कैंसर के पंजे से किसी भी तरह से बचाने की। हालांकि, विजय के नहीं रहने के बाद उसके बडे भाई राजेंद्र राठौर बीते मंगलवार को ही अहमदाबाद ले गए थे। मजदूरी करके पेट पालने वाले बडे भाई के सामने भी इलाज का खर्च बड़ी समस्या है।
5 लाख में से 4 लाख फिक्स करवाए
हादसे में मरने वालों को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 लाख रुपए की मदद का ऐलान किया था। इसमें से सिर्फ एक लाख ही मृतकों के परिजन को दिया गया, बाकी 4 लाख उनके खाते में तीन साल के लिए फिक्स कर दिए गए हैं। सिर्फ इस राशि का ब्याज ही परिवारों को मिलेगा।
कलेक्टर मैडम नाम लिख ले गर्इं
विजय राठौर के बडे भाई राजेंद्र राठौर बताते हैं कि, मुख्यमंत्री के साथ कलेक्टर मैडम उनके घर आईं थीं और तुषार की बीमारी का पता चलने पर कागज में लिखकर ले गर्इं थी। बस उसके बाद से ही कोई पूछने नहीं आया। अब क्या करें, इलाज के लिए पहले ही विजय ने कर्जा ले रखा था अब परिवार के भरण पोषण सहित तुषार के इलाज का भी खर्चा है। राजेंद्र की समझ नहीं आ रहा कि, करे तो क्या करें..?

