सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के साथ ही आसपास के जंगलों में बाघों के 200 से ज्यादा और पैंगोलिन के 40 शिकारी लंबे समय से सक्रिय हैं। इनके तार बाघों की खालों और वन्य प्राणियों के अंगों के अंतरराज्यीय तस्करों से जुडे हुए हैं। दूसरी ओर, एसटीआर (सतपुड़ा टाइगर रिजर्व) की टीम ने अभी तक 19 शिकारियों की गिरफ्तारी करने के बाद मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और पूछताछ के आधार पर संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए शिकंजा कसना शुरु कर दिया है। इसमें चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि, शिकारियों से वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत की सुगबुगाहट के बाद एसटीआर ने राडार पर ले लिया है।
राडार पर आए 200 बाघ के और 40 पैंगोलिन के शिकारी
वनकर्मियों की मिलीभगत से तस्करी का करोड़ों का कारोबार
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बीती छमाही में दो बाघों का शिकार करने वाले शिकारियों की धर-पकड़ के नतीजे में अभी तक 19 शिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें पैंगोलिन के दस शिकारी हैं, जोकि बालाघाट और होशंगाबाद के साथ ही बैतूल जिले से पकड़ाए हैं। इन्हीं से पूछताछ के नतीजे में बाघ के शिकार किए जाने का खुलासा हुआ, जिसके बाद 9 और शिकारी पकडे गए। इनसे पूछताछ के बाद चौंकानेवाली जानकारी सामने आई है कि, मध्यप्रदेश के बालाघाट और छिंदवाड़ा से लगे हुए महाराष्ट्र के इलाकों के शिकारी भी शामिल हैं। शिकार के बाद शिकारी रातों-रात महाराष्ट्र निकल जाते हैं, जिससे इनको पकड़ना मुश्किल होता है। इसी से इस बार एसटीआर ने जांच का दायरा बढ़ाने के साथ ही गोपनीयता भी बरती है, जिससे गिरफ्त में आने से पहले शिकारी भाग नहीं सकें। साथ ही पहली बार शिकारियों के पॉलीग्राफ टेस्ट कराने भी तैयारी है।
वन कर्मचारियों पर भी शंका
सूत्रों की माने तो शिकारियों से करीब आधा दर्जन वन कर्मचारियों की मिलीभगत के शुरुआती अपुष्ट प्रमाण मिले हैं। ऐसे में जांच टीम ने बेहद सतर्कता और गोपनीयत बरतनी शुरु कर दी है। हालांकि, अभी खुलेतौर पर इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है। माना जा रहा हैकि, संदिग्ध आचरण वाले वन कर्मचारियों को एसटीआर से हटाने के साथ ही दूसरे जिलों के कार्यालयों में ट्रांसफर किया जा सकता है।
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अभी और होंगी गिरफ्तारियां
रमेश प्रताप सिंह, डायरेक्टर, सतपुडा टाइगर रिजर्व से सीधी बात
वनकर्मियों की मिलीभगत से तस्करी का करोड़ों का कारोबार
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बीती छमाही में दो बाघों का शिकार करने वाले शिकारियों की धर-पकड़ के नतीजे में अभी तक 19 शिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें पैंगोलिन के दस शिकारी हैं, जोकि बालाघाट और होशंगाबाद के साथ ही बैतूल जिले से पकड़ाए हैं। इन्हीं से पूछताछ के नतीजे में बाघ के शिकार किए जाने का खुलासा हुआ, जिसके बाद 9 और शिकारी पकडे गए। इनसे पूछताछ के बाद चौंकानेवाली जानकारी सामने आई है कि, मध्यप्रदेश के बालाघाट और छिंदवाड़ा से लगे हुए महाराष्ट्र के इलाकों के शिकारी भी शामिल हैं। शिकार के बाद शिकारी रातों-रात महाराष्ट्र निकल जाते हैं, जिससे इनको पकड़ना मुश्किल होता है। इसी से इस बार एसटीआर ने जांच का दायरा बढ़ाने के साथ ही गोपनीयता भी बरती है, जिससे गिरफ्त में आने से पहले शिकारी भाग नहीं सकें। साथ ही पहली बार शिकारियों के पॉलीग्राफ टेस्ट कराने भी तैयारी है।
वन कर्मचारियों पर भी शंका
सूत्रों की माने तो शिकारियों से करीब आधा दर्जन वन कर्मचारियों की मिलीभगत के शुरुआती अपुष्ट प्रमाण मिले हैं। ऐसे में जांच टीम ने बेहद सतर्कता और गोपनीयत बरतनी शुरु कर दी है। हालांकि, अभी खुलेतौर पर इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है। माना जा रहा हैकि, संदिग्ध आचरण वाले वन कर्मचारियों को एसटीआर से हटाने के साथ ही दूसरे जिलों के कार्यालयों में ट्रांसफर किया जा सकता है।
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अभी और होंगी गिरफ्तारियां
रमेश प्रताप सिंह, डायरेक्टर, सतपुडा टाइगर रिजर्व से सीधी बात
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| रमेश प्रताप सिंह |
-क्या 200 से ज्यादा शिकारियों का पता चला है?
-पकडे गए शिकारियों से पूछताछ के आधार पर जिनके भी नाम सामने आ रहे हैं, तो सभी को सर्विलांस पर लेकर जांच आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में सभी को शिकारी नहीं मान सकते, लेकिन शंकास्पद होेने से जांच के घेरे में तो हैं।
-क्या मध्यप्रदेश के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी संदिग्ध हैं?
-होशंगाबाद के अलावा बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, सोहागपुर आदि से गिरफ्तारी की गई है। शंका के घेरे में आने वाले शिकारी हों या वनकर्मचारी, किसी को नहीं बख्शा जाएगा। अभी गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी रहेगा।

