राज्यपाल एवं
कुलाधिपति श्रीमती आंनदीबेन पटेल के सामने 29 नवम्बर को विक्रम
विश्वविद्यालय की छात्रा सुश्री सलोनी जोशी के रिजल्ट में गड़बड़ी का मामला
आया। राज्यपाल ने तुरंत संज्ञान लेते हुए 24 घंटे के भीतर रिजल्ट सुधरवाकर
छात्रा और उसके परिवार को राहत पहुँचाई है।
सुश्री
सलोनी जोशी अपने पिता मुकेश जोशी के साथ राज्यपाल से 29 नवम्बर को मिलने
आई। उसने बताया कि विक्रम विश्वविद्यालय के अन्तर्गत शा. कन्या महाविद्यालय
से बी.एस.सी. गणित की छात्रा है। उसने पाँच सेमेस्टर उच्च प्रथम श्रेणी से
पास किये, परंतु छठवें सेमेस्टर में उसे गणित में मात्र पाँच अंक मिले और
उसे फेल घोषित कर दिया गया। 

सुश्री
सलोनी ने राज्यपाल को बताया कि इस परिणाम से वह मायूस हुई। विक्रम
यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर कॉपी चेक की तो पता चला कि मूल्यांकनकर्ता ने
उसकी उत्तर पुस्तिका के सिर्फ बी सेक्शन को जाँचकर 5 अंक दे दिये। ए और सी
सेक्शन जाँचा ही नहीं। सुश्री सलोनी ने विश्वविद्यालय में आवेदन देकर अपना
पक्ष रखा तथा पूरा मूल्यांकन करने की बात कही, परंतु विश्वविद्यालय ने जवाब
दिया कि हमारे यहाँ पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है। सुश्री सलोनी
ने आर.टी.आई. के तहत उत्तर-पुस्तिका की छायाप्रति माँगी, जो की उसे नहीं
दी गई। बाद में राज्य सूचना आयोग में अपील करने पर उसे उत्तर पुस्तिका की
प्रति मिली, जिसे देखने के बाद स्पष्ट हो गया कि उत्तर पुस्तिका का पूरा
मूल्यांकन ही नहीं किया गया है।
इस
सारे घटनाक्रम से आहत सुश्री सलोनी ने राजभवन का द्वार खटखटाया। इस
घटनाक्रम से व्यथित राज्यपाल श्रीमती पटेल ने विक्रम विश्वविद्यालय के
कुलपति को 24 घंटे के भीतर वस्तु स्थिति प्रस्तुत करने के निर्देश दिये।
चौबीस घंटे के भीतर ही 30 नवम्बर को सुश्री सलोनी को सुधारा गया रिजल्ट
मिला, जिसमें उसे अब पाँच की बजाय 56 अंक मिले और वह प्रथम श्रेणी में
उत्तीर्ण घोषित की गई। इस लापरवाही के लिये गणित विभाग की प्राध्यापिका को
तीन वर्ष के लिये मूल्यांकन कार्य से ब्लेक लिस्ट किया गया है। राज्यपाल
द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से सुश्री सलोनी संतुष्ट और प्रसन्न है।