खेल
भावना वह महत्वपूर्ण आयाम है, जिससे इंसान निरन्तर प्रगति पथ पर आगे बढ़ता
है। यह बात जनसम्पर्क, विधि एवं विधायी कार्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी,
विमानन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री पी.सी. शर्मा ने आज 64वीं
राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन समारोह में कही। उन्होंने कहा
कि खेलों में दो ही बातें, जीतना और सीखना महत्वपूर्ण होती है।
श्री
शर्मा ने सरोजनी नायडू शा.क.उ.मा.वि. की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत किये
गये नृत्य की प्रशंसा करते हुए करते हुए कहा कि वन्दे मातरम् का उद्घोष
स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान माटी के
बहुतेरे सपूतों ने वन्दे मातरम् का उद्घोष करते हुए अपने प्राण न्यौछावर
कर दिये थे। श्री शर्मा ने सभी विजेताओं को बधाई दी और खिलाड़ियों को 65वीं
राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोतगिता के लिये अग्रिम शुभकामनाएँ दी।
प्रतियोगिता
में मध्यप्रदेश ने हूपक्वांडो के बालिका आयु वर्ग 14 वर्ष एवं 17 वर्ष और
बालक आयु वर्ग 17 वर्ष में प्रथम स्थान प्राप्त किया। हूपक्वांडो बालक आयु
वर्ग 14 वर्ष में मध्यप्रदेश को द्वितीय स्थान मिला जबकि प्रथम स्थान
दिल्ली को प्राप्त हुआ। बाक्सिंग प्रतियोगिता के बालिका आयु वर्ग 19 वर्ष
में प्रथम हरियाणा और द्वितीय महाराष्ट्र रहा। बालक वर्ग में मध्यप्रदेश को
दूसरा और हरियाणा को पहला स्थान मिला। प्रतियोगिता में 28 राज्यों और
केन्द्र शासित प्रदेशों के 778 खिलाड़ियों ने बाक्सिंग और हूपक्वांडो में
हिस्सा लिया था।
समापन
समारोह में भोपाल नगर निगम अध्यक्ष श्री सुरजीत सिंह चौहान, श्री ईश्वर
सिंह चौहान, संचालक लोक शिक्षण श्री गौतम सिंह, कुलपति सी. व्ही. रमन
विश्वविद्यालय श्री अमिताभ सक्सेना, उपाध्यक्ष स्कूल गेम फेडरेशन ऑफ इंडिया
श्री आलोक खरे और अन्य अधिकारीगण, खिलाड़ी और प्रशिक्षक उपस्थित थे।