संविदा कर्मचारियों, अतिथि शिक्षकों एवं रोजगार सहायकों को स्थाई करने समेत अन्य मांगों के बारे में अब मंत्रिपरिषद की समिति फैसला करेगी। इसके लिए शासन ने सामान्य प्रशासन मंत्री गोविंद सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी है। इसमें तीन मंत्रियों वित्त मंत्री तरुण भनोट, जनजातीय कार्य मंत्री ओंकार सिंह मरकाम, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी जीएडी के अपर मुख्य सचिव और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य होंगे। यह कमेटी तीन महीने में सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी के गठन के बारे में शनिवार को जीएडी ने आदेश जारी कर दिए।
आदेश में कहा गया है कि इन कैडर के कर्मचारी संगठनों द्वारा स्थाई करण समेत अन्य मांगों के संबंध में मिले अभ्यावेदनों पर कमेटी विचार करेगी। मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ, अतिथि विद्वान संघ सहित अन्य संगठनों ने सरकार के सामने तर्क रखे हैं कि नियमितीकरण में वित्तीय भार नहीं आएगा।
इन कैडर के कर्मचारी संघों के रमेश राठौर, डॉ बीएल दोहरे ने भी अपने- अपने तर्क रखे थे। महासंघ का तर्क है कि विभिन्न विभागों में एक लाख पद खाली हैं। संविदा कर्मचारी नियमित पदों के विरुद्ध ही कार्यरत हैं। इन पदों पर नियमित किया जा सकता है। केंद्र से जुड़ी परियोजनाओं में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए फंड भी केंद्र से ही आता है।
तीन दिन पहले भी बैठक में उठा था मुद्दा : तीन दिन पहले तीन मंत्रियों जीएडी मंत्री गोविंद सिंह, विधि मंत्री पीसी शर्मा और गृह मंत्री बाला बच्चन ने मंत्रालय में कर्मचारी संघों की बैठक बुलाई थी। इसमें मान्यता प्राप्त, गैर मान्यता समेत अन्य कैडर के कर्मचारी संघों के प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक में संयुक्त मोर्चा के संरक्षक वीरेंद्र खोंगल, भुवनेश पटेल, अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, रामनरेश त्रिपाठी, राजपत्रित संघ के अध्यक्ष अशोक शर्मा, अजय श्रीवास्तव, चंद्रशेखर परसाई, आदर्श शर्मा, अरुण द्विवेदी, ओपी कटियार, साबिर खान, जितेंद्र शाक्य, गजेंद्र कोठारी, अनिल वाजपेयी समेत कई संघों के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपे। इस मुद्दे का जिक्र भी किया गया था। इसके बाद ही सरकार ने कमेटी बनाने का निर्णय लिया है।
वचन पत्र में भी किया है वादा : कांग्रेस ने वचन पत्र में भी संविदा कर्मचारियों, अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का वादा किया है। संविदा कर्मचारियों का कहना है कि तीन महीने के बजाय लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से कमेटी नियमित करने की रिपोर्ट सरकार को पेश करेगी तो ज्यादा बेहतर होगा।
