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शहीद के पिता- 'एक बेटा खोया, दूसरे को भी सेना में भेजूंगा लेकिन पाकिस्तान को करारा जवाब दो'

नई दिल्ली 
'मैं अपना एक बेटा खो चुका हूं, दूसरे को भी मातृभूमि की खातिर मर-मिटने के लिए भेजूंगा लेकिन पाकिस्तान को करारा जवाब मिलना चाहिए।' ये शब्द हैं उस पिता के जिसने अपने नौजवान बेटे को गुरुवार को पुलवामा में हुए हमले में खो दिया है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 38 जवान शहीद हो गए हैं। ये सभी जवान देश के अलग-अलग कोने से सैन्य बल में शामिल होकर देश की सेवा कर रहे थे। कोई अपने परिवार से दो दिन पहले मिलकर वापस गया था तो कोई उस वक्त अपनी पत्नी से फोन पर ही बात करके परिवार से मिलने की इच्छा जता रहा था कि अचानक तेज धमाका हुआ और सब कुछ खत्म।

अपने लाल के शहादत की खबर सुनकर घरवालों के आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे हैं। उन्हें गर्व तो है कि उनके बेटे ने देश के लिए कुर्बानी दे दी लेकिन साथ ही गुस्सा भी है। गुस्सा उस देश के लिए जिसने नफरत के नाम पर आतंक के बीच बोए और जवानों पर कायरता पूर्ण हमला कर दिया। 

'पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब मिलना चाहिए' 
पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों में से बिहार के भागलपुर के रतन ठाकुर भी शामिल थे। उनके पिता को जब अपने बेटे की शहादत की खबर मिली तो वह पिता बेसुध हो गए। वह कहते हैं, 'मैं देश की मातृभूमि की सेवा में एक बेटा खो चुका हूं। मैं अपने दूसरे बेटे को भी मातृभूमि की खातिर लड़ने और कुर्बान होने को तैयार रहने के लिए भेजूंगा लेकिन पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब मिलना चाहिए।' 

पुलवामा हमले से जुड़ा हर अपडेट देखिए यहां 

​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
शहीद जयमाल सिंह

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में वाराणसी के लाल रमेश यादव भी शहीद हो गए। हादसे से कुछ देर पहले रमेश ने पत्नी रेनू और परिजनों से फोन पर बात की थी। उन्‍होंने बताया कि वह जम्मू कैम्प से श्रीनगर जा रहे हैं और वहां पहुंचकर फिर बात करेंगे। काफी देर बाद जब रमेश का फोन नहीं आया तो रेनू ने खुद उन्‍हें फोन मिलाया लेकिन फोन नहीं मिला। 

रात आठ बजे सीआरपीएफ हेड क्वार्टर से उनके शहीद होने की खबर मिली तो परिवार में कोहराम मच गया। उनके पिता श्याम नारायण यादव का रो-रोकर बुरा हाल है। श्यामनारायण यादव ने कहा कि उनका कमाने वाला बेटा शहीद हो गया, अब घर कैसे चलेगा। 

पुलवामा आंतकी हमले में पंजाब के मोगा के रहने वाले जवान जयमाल सिंह भी शहीद हुए। बताया जा रहा है कि सीआरपीएफ की जिस बस पर हमला हुआ उसे जयमाल सिंह ही चला रहे थे। जैसे ही काफिला पुलवामा पहुंचा एक कार बम उनकी बस में भिड़ी और तेज धमाके में परखच्चे उड़ गए। जयमाल सिंह की शहादत की खबर मिलते ही उनके परिवार में गम का माहौल है। 
  
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    इंस्टिट्यूट फॉर इकनॉमिक्स ऐंड पीस एक ग्लोबल थिंक टैंक है जिसका मुख्यालय सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में है। इसकी शाखाएं न्यू यॉर्क, मेक्सिको और हेग में है। साल 2018 में इसने ग्लोबल टेररिजम इंडेक्स 2018 नाम से एक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में साल 2017 में आतंकी हमलों में होने वाली मौतों का आंकड़ा पेश किया गया। साल 2017 में करीब 18,814 मौतें आतंकवादी हमलों में हुईं। इनमें से आधी से ज्यादा मौतों के लिए सिर्फ चार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट, तालिबान, अल शबाब और बोको हराम शामिल है। पिछले दशक में आतंकी हमलों में हुई मौतों में से 44 फीसदी के लिए ये संगठन ही जिम्मेदार हैं। इन मौतों के आधार पर हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ आतंकी संगठनों के बारे में जो दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है...
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    अरब दुनिया में इसको दाएश के नाम से जाना जाता है। वैसे दुनिया भर में यह आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक ऐंड सीरिया) यानी आईएसआईएल (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक ऐं लेवनात) के नाम से जाना जाता है। बगदादी के नेतृत्व में इसने अपनी खिलाफत की घोषणा की थी। संभवत: इतिहास का यह सबसे खतरनाक आतंकी संगठन है। कुछ ही सालों के अंदर इराक और सीरिया के बाहर कई देशों में इसने अपनी जड़ें जमा लीं। दुनिया का यह पहला आतंकी संगठन था जिसने टेक्नॉलजी को अपना हथियार बनाया। दुनिया भर में इसने सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल करके युवाओं का ब्रेनवॉश किया। साल 2017 में 5,000 के करीब लोगों की मौत आईएस के आतंकी हमलों में हुई। सीरिया और इराक जहां से इसने अपने पैर पसारे थे, वहां पूरी तरह से इसको खदेड़ दिया गया है। लेकिन अब भी कई देशों में इससे जुड़े आतंकी सक्रिय हैं जो लगातार खतरा पैदा कर रहे हैं। 
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    अफगान युद्ध के समय अमेरिका की मदद से लड़ने वाले मुजाहिदीनों का संगठन। बाद में अमेरिका के खिलाफ ही हथियार उठा लिया। साल 2001 से तालिबान ने अमेरिका के समर्थन वाले गठबंधन के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। साल 2017 में अफगानिस्तान में तालिबान ने करीब 700 हमले किए जिनमें 4,000 के करीब लोगों की मौत हुई। पड़ोसी पाकिस्तान में इससे जुड़े तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने 50 से ज्यादा हमलों में 233 जानें लीं।
    तालिबान की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। अमेरिका ने सोवियत संघ को तोड़ने के लिए तालिबान का इस्तेमाल किया था। जब सोवियत संघ को अफगानिस्तान से खदेड़ दिया तो तालिबान ने 1996 में मुल्ला उमर के नेतृत्व में अफगानिस्तान में अपनी सरकार बनाई। 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ और उसमें अलकायदा का हाथ सामने आया। अल कायदा और तालिबान का संबंध काफी मजबूत था। यह भी माना जाता था कि ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान में ही शरण ले रखा है। अमेरिका ने बदले की कार्रवाई की जिसके बाद तालिबान को सत्ता गंवानी पड़ी। तब से यह अमेरिका के समर्थन वाले गठबंधन के खिलाफ लड़ रहा है।
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    2006 में आतंकी संगठन अल शबाब अस्तित्व में आया। यह अल कायदा से जुड़ा है। यह मुख्य रूप से सोमालिया में अपनी गतिविधियों को अंजाम देता है। वैसे इथोपिया, केन्या और यूगांडा में भी इसने आतंकी हमले किए हैं। साल 2017 में अफ्रीकी क्षेत्र में यह सबसे खतरनाक आतंकी संगठन था। करीब 1,500 मौतों के लिए जिम्मेदार। दो तिहाई मौतें सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में हुईं। अक्टूबर 2017 में सबसे खतरनाक हमला हुआ था जिसमें 600 के करीब लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए। जहां आतंक प्रभावित ज्यादातर देशों में हाल के सालों में आतंकी हमलों में मौत की संख्या घटी है, वहीं सोमालिया में मामला उल्टा है। साल 2001 के बाद से यहां आतंकी हमलों में करीब 6,000 लोगों की मौत हो गई है। 
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    बोको हराम। दो शब्दों से मिलकर बना है बोको हराम। बोको मतलब पश्चिम और हराम मतलब प्रतिबंधित यानी पश्चिम का विरोध। यह संगठन पश्चिम के विरोध के लिए ही खड़ा हुआ था। यह 2014 से पहले तक दुनिया का सबसे खतरनाक संगठन हुआ करता था। उसके बाद से इसका पतन शुरू हो गया और कई गुटों में बंट गया। साल 2002 में इसका उभार हुआ था और आसपास के कई देशों चाड, कैमरून एवं नाइजर में फैल गया था। 
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    अल कायदा दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक है। इसका सरगना था ओसामा बिन लादेन। अल कायदा के आतंकियों ने 11 सितंबर, 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया था। 21वीं सदी की शुरुआत में दुनिया के अंदर होने वाले लगभग सभी आतंकी हमलों में इसका हाथ होता था। अफगान युद्ध के समय तालिबान के साथ अल कायदा भी अस्तित्व में आया था। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद अमेरिका ने अल कायदा पर शिकंजा कसा और बाद में इसके सरगना ओसामा बिन लादेन को एक ऑपरेशन में मार गिराया। उसके साथ ही इस संगठन की सक्रियता कम हो गई है। 
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    पाकिस्तान को आतंक की नर्सरी कहा जाए तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों के लिए पाकिस्तान ट्रेनिंग बेस का काम करता है। पाकिस्तान में लश्कर-ए-झांगवी, इस्लामिक स्टेट का खोरासान चैप्टर, लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मुहम्मद सभी आतंकी संगठनों की पनाह है। वहां इन आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और सैन्य प्रतिष्ठान आतंकियों को प्रशिक्षण से लेकर हथियार, फंडिंग और साजोसामान मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    भारत आतंकी घटनाओं के साथ-साथ नक्सली हिंसा का भी शिकार है। नक्सलियों ने भी कई हमलों में बड़ी संख्या में सेना के जवान और आम लोगों की जान ली है। भारत में आतंकी गतिविधियों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के अलावा अलकायदा और आईएसआई के आतंकी भी शामिल हैं। 14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ। जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इससे पहले कई आतंकी घटनाओं में जैश-ए-मोहम्मद संलिप्त रहा है। इन आतंकी संगठनों को भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान का समर्थन हासिल है। 
  • ​जानें, दुनिया के लिए खतरा हैं ये आतंकी संगठन
    अफ्रीका और मध्य पूर्व एशिया से बाहर बात करें तो सबसे खतरनाक संगठन है न्यू पीपुल्स आर्मी। फिलीपींस में इस संगठन का बेस है। साल 2017 में इसने 200 से ज्यादा हमले किए और 100 से ज्यादा लोगों की जान ली। यहां इस्लामिक स्टेट से जुड़ा एक संगठन भी है। नाम है अबू सैयाफ-फिलीपींस प्रांत। इस्लामी चरमपंथियों का एक और समूह है मौते ग्रुप। दोनों ने 50 से ज्यादा लोगों की जानें लीं।(फोटो: साभार ताइवान न्यूज)

20 दिन की छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर गए थे
 
शहीद होने वालों में उत्तराखंड के दो जवानों भी शामिल थे। शहीद वीरेंद्र सिंह उधमसिंह नगर जिले के खटीमा के मोहम्मदपुर भुढ़िया गांव के रहने वाले हैं। इनके दो छोटे बच्चे है। बड़ी बेटी 5 साल की, जबकि ढाई साल का बेटा है। वीरेंद्र दो दिन पहले ही 20 दिन की छुट्टी बिताने के बाद जम्मू के लिए रवाना हुए थे। दूसरे शहीद जवान मोहन लाल रतूड़ी उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड के बनकोट का रहने वाले हैं। शहीद जवान मोहन लाल रतूडी 55 साल के थे। वर्तमान में मोहन लाल का परिवार देहरादून के डिफेंस कालोनी में रहता है। मोहन लाल सीआरपीएफ की 76 वीं वाहिनी में एएसआई थे। 

पढ़ें, आतंक का आका: जैश-ए-मोहम्मद की पूरी कहानी 

दो दिन पहले ही वापस गए थे प्रदीप 
पुलवामा में तैनात शामली के प्रदीप बनत गांव के रहने वाले थे। उनकी शहादत की खबर ने हर किसी को हिला दिया। घर से लेकर पूरे गांव में कोहराम मच गया। किसी को यकीन नहीं हो रहा है कि प्रदीप अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। गांववालों ने बताया कि प्रदीप के अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने घर आए थे। वह दो दिन पहले ही वापस गए थे। 

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वाराणसी के रमेश यादव का परिवार

पिता के लिए फूट-फूटकर रो पड़ीं बेटियां जम्मू-कश्मीर के इस आंतकी हमले में उन्नाव के अजीत कुमार आजाद भी शहीद हुए हैं। हमले की खबर मिलने के बाद उनका परिवार दहशत में आ गया। परेशान होकर चारों तरफ फोन करने शुरू कर दिए लेकिन अजीत से संपर्क नहीं हो पाया। शाम को टीवी पर जब शहीदों के नाम आए तो उन्हें पता चला की हमले में वह भी शहीद हो गए हैं। अजीत की दो बेटियां ईशा और श्रेया अपनी मां मीना के साथ लिपट गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं।

फोन पर बात करते-करते हुए धमाका वहीं कन्नौज के सुखचैनपुर गांव के निवासी प्रदीप सिंह यादव की पत्नी नीरज देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि वह उस वक्त अपने पति से बात ही कर रही थीं तभी तेज धमाके की खबर आई। उन्होंने कहा कि दोबारा फोन मिलाने पर नहीं मिला और फिर टीवी पर देखा तो दंग रह गई। वह कहती हैं कि कोई जानकारी न मिलने पर पति की सलामती की दुआ करने लगीं। फिर शाम को कंट्रोल रूम से कॉल आया तो पति की शहादत की खबर मिली। 
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