पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नमामि देवी नर्मदे- नर्मदा सेवा यात्रा के समापन में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा के खर्च जांच के दायरे में आ गए हैं। जन अभियान परिषद इस यात्रा में सक्रियता से जुड़ा था, लिहाजा परिषद की 5 फरवरी को हुई कार्यकारिणी सभा की 11वीं बैठक में खर्च के भुगतान यह मसला उठा।
इसमें सामने आया कि 2016 में हुए समापन कार्यक्रम के लिए बसों की व्यवस्था में ही 8 करोड़ 65 लाख 41 हजार रुपए खर्च हुए। इसमें भी अभी तक 26 लाख 47 हजार रुपए का भुगतान बाकी है। इसके अलावा नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं पर हुए खर्च का भी 85 लाख 73 हजार रुपए भी बाकी है। कार्यकारिणी सभा ने तय किया है कि इन सभी भुगतानों को कलेक्टरों से सत्यापन कराया जाए।
योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग को भी कह दिया गया है कि वह परिषद द्वारा संचालित सात योजनाओं (प्रस्फुटन, नवांकुर, संवाद, समृद्धि, विस्तार, दृष्टि व सृजन) का बजट भी रोक दिया जाए। कार्यकारिणी बैठक में कार्यपालक निदेशक ने बताया कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम का संचालन परिषद कर रहा है। आदिम जाति कल्याण विभाग के सहयोग से यह 20 जिलों के 89 अनुसूचित जनजाति ब्लॉक में चलता था, लेकिन इसे बचे हुए 224 ब्लॉक में भी चलाया गया। इसकी संबद्धता महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विवि सतना से है। इसमें भी अब किसी नए छात्र का प्रवेश नहीं होगा। इन्हें शिक्षा विभाग की ओर से चलाया जाएगा। अतिथि शिक्षक पढ़ाएंगे। एक साल में सर्टिफिकेट कोर्स और दो साल में डिप्लोमा कोर्स की मान्यता दी जाएगी।
परिषद भंग करने के लिए कमेटी : योजना, श्रम व विधि विभाग के प्रमुख सचिवों की कमेटी बनाई गई है, जो जन अभियान परिषद को भंग के संबंध में प्रतिवेदन देगी। इसी तरह संविदा अाधार पर रखे गए 14 अधिकारी व कर्मचारियों की संविदा अवधि 31 मार्च 2018 के बाद नहीं बढ़ाई गई है, लिहाजा नोटिस के साथ एक माह का वेतन देकर उनकी संविदा सेवा समाप्त की जाएगी। 66 दैनिक वेतन भोगी भी हटाए जाएंगे : परिषद में 66 चतुर्थ श्रेणी के दैनिक वेतन भोगी रखे थे। इनकी सेवाएं 89 दिन लेने का प्रावधान है, इसके बाद उन्हें बार-बार बढ़ाया। अब इनकी सेवाएं नहीं ली जाएंगी।
इनके रहते हुए यात्रा के खर्च : बताया जा रहा है कि 2016 में जब नमामि देवी यात्रा हुई, तब पदेन उपाध्यक्ष के तौर पर तत्कालीन योजना विभाग के मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार रहे। दो गैर शासकीय उपाध्यक्षों में भाजपा नेता प्रदीप पांडे व राघवेंद्र गौतम व्यवस्था संचालन से जुड़े रहे।
राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु : जन अभियान परिषद के कर्मचारियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि जब कर्मचारियों का नियोजन किया गया, तब उनकी औसत आयु लगभग 27 वर्ष थी। परिषद के कर्मचारियों ने लोकहित में बहुत काम किए। दिसंबर 2018 के बाद परिषद के किए कार्यों को नजरअंदाज किए जाने लगा और समस्त उपलब्धियों को झूठा बताया जाने लगा। परिषद के कामों को विशेष विचारधारा से जोड़ा जाने लगा। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार परिषद को भंग करने पर आमादा है। कर्मचारियों का परिवार उन पर निर्भर है। ऐसे में वे बेरोजगार हो जाएंगे। इस कारण उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान की जाए।
कार्यकारिणी सभा की बैठक में तय हुआ है कि कलेक्टरों से प्रमाणीकरण कराकर ही आगे की कार्यवाही की जाए। यह एक रूटीन बैठक है, जिसमें कुछ निर्णय लिए गए हैं। - जितेंद्र सिंह राजे, कार्यपालक निदेशक, मप्र जन अभियान परिषद