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मध्यप्रदेश उत्सव के दूसरे दिन आंचलिक रंगों से सजी शाम

भोपाल। म.प्र. के 64वें स्थापना दिवस पर तीन दिन  के जश्न के दूसरे दिन आज रवीन्द्र भवन के  सभागृह में प्रदेश की आंचलिक संस्कृति (गायन और नृत्य) के प्रतीक बुन्देली और निमाड़ी कलाकारों  द्वारा प्रस्तुति दी गई। बुंदेलखंड के लोक गायक और खंडवा के गणगौर नृत्य के साथ ही बंगाल ,महाराष्ट्र और राजस्थान  प्रांतों के कलाकार भी अपनी प्रतिभा से दर्शकों को प्रभावित करने में कामयाब हुए।

केसरिया बालम  पधारो म्हारे देस.. की प्रस्तुति से राजस्थान के गायक दल ने वातावरण संगीतमय बना दिया। समूह गायन प्रस्तुति भी लाजवाब थी। उन्होंने  'लाली मेरे लाल की...'' और 'दमादम मस्त कलंदर...'' भी सुनाया। श्री गाजी  मांगणियार गायन के मशहूर कलाकार श्री गाजी खान ने साथी कलाकारों के साथ गायन-वादन से समां बांध दिया।

इसी तरह  सागर के श्री शिव रतन यादव ने साथी कलाकारों के साथ सुमधुर  बुन्देली लोक गीत प्रस्तुत किए। बाड़मेर, खंडवा, सागर, औरंगाबाद, कलकत्ता आदि से आए दल का स्वागत प्रमुख सचिव संस्कृति श्री पंकज राग ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला,संगीत प्रेमी उपस्थित थे।

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