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राइट टू हेल्थ के लिये सभी सरकारी विभाग मिलकर कार्य करें


भोपाल।  दो दिवसीय राइट टू हेल्थ कॉन्क्लेव में आज दूसरे दिन मंत्रीमण्डल के सदस्य श्री तुलसीराम सिलावट, डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ, डॉ. प्रभुराम चौधरी श्री कमलेश्वर पटेल, श्री पी.सी. शर्मा और श्री जयवर्द्धन सिंह की उपस्थिति में स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रतिबद्धता विषय पर उच्च-स्तरीय चर्चा हुई।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने चर्चा में राइट टू हेल्थ के लिये अब तक किये गये कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना जरूरी है। श्री सिलावट ने बताया कि नई सरकार के गठन के बाद प्रदेश में मिलावट खोरों के खिलाफ सख्त मुहिम शुरू की गई है। पिछले तीन महीनों में 31 मिलावटखोरों के खिलाफ रासुका में कार्रवाई की गई है। लगभग 100 एफआईआर दर्ज की गई हैं और हजारों की संख्या में नमूनों की जाँच की गईं है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ प्रदेश की कल्पना को साकार करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

चिकित्सा शिक्षा, आयुष मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने बताया कि प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलजों की संख्या अब 13 हो गई है। राज्य सरकार ने दस और नये सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे गए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रयास है कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को दूर किया जाये। डॉ. साधौ ने कहा कि वर्ष 2022 तक मध्यप्रदेश में आवश्यकता अनुसार डॉक्टरों की संख्या की स्थिति निर्मित हो जाएगी। उन्होंने बताया कि चिकित्सा के क्षेत्र में गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने बताया कि प्रदेश में एक लाख 20 हजार सरकारी स्कूल हैं। इनमें करीब एक करोड़ 65 लाख विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने स्कूली बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने का अनुरोध किया। स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि हाल ही में शुरू किये गये उमंग कार्यक्रम के जरिये बच्चों को शारीरिक बदलाव के बारे में सकरात्मक जानकारी दी जा रही है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल ने बताया कि प्रदेश में 50 हजार 236 गाँव ओडीएफ घोषित किये जा चुके हैं। ग्राम पंचायतों में अपशिष्ट ठोस कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था की जा रही है। मिड-डे मील के संबंध में उन्होंने बताया कि बड़े नगरों में केन्द्रीयकृत किचन की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाएँ और अधिक प्रभावी तरीके से क्रियान्वित हो सकेंगी। उन्होंने सुझाव दिया कि एमबीबीएस करने वाले जो चिकित्सा छात्र 10 वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों की सेवा करने का वचन देते हैं तो उनको फीस में रियायत दी जाये। इससे डॉक्टरों की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। जनसम्पर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा ने सुझाव दिया कि भोपाल के जे.पी. अस्पताल में मेडिकल कॉलेज खोला जाये। उन्होंने शुद्ध पानी की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।

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