नई दिल्ली। भारत में 500 अरब डालर (36 लाख करोड़ रुपए) का निवेश करने वाली एक कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। आपको बता दें हर साल अमेरिका भारत में सात अरब डॉलर का निवेश करता है यानि ये कंपनी अमेरिकी निवेश का 71 प्रतिशत यानि 500 अरब डालर भारत में लगा रही है। इस कंपनी ने भारत के शीर्ष समाचार पत्रों में से एक द इकानामिक टाइम्स और टाइम्स आफ इंडिया में पिछले सोमवार को इस निवेश से संबंधित मामले में पहले पेज पर विज्ञापन दिया था। खास बात तो यह है विज्ञापन में देश के प्रधानमंत्री को संबोधित किया गया है। एक मीडिया संस्थान ने जब पूरे मामले की छानबीन की तो कई चौंकाने वाले मामले सामने आए। अमेरिका में जिस दफ्तर का पता दिया गया है वहां कंपनी है ही नहीं, वह आवासीय भवन था। बेंगलुरू के पते पर भी कोई आफिस नहीं है। एक बड़ी बात यह है कि 500 अरब डॉलर का निवेश करने वाली कंपनी का पेडअप कैपिटल मात्र एक लाख रुपए है।
कोरोना महामारी के इस दौर में जब आमजन के साथ सरकार भी परेशान है तब भी कई लोगों को फर्जीवाड़ा सूझ रहा है। इस विज्ञापन में बहुत ज्यादा कोई खुलासा नहीं किया गया है लेकिन जिन दो बड़े अखबारों में ये प्रकाशित किया गया है वे देश में अपनी विश्वसनीयता रखते हैं। इन समाचार पत्रों ने भी पूरे मामले की जांच करानी चाहिए और फर्जीवाड़ा पाए जाने पर पुलिस प्रकरण दर्ज कराना चाहिए। इस विज्ञापन को लेकर बीबीसी ने जो खोजबीन की उसे विहान हिंदुस्तान डॉट कॉम बीबीसी के माध्यम से ही आपके समक्ष रख रहा है। पहले पन्ने पर लाखों रुपए खर्च करके विज्ञापन देने वाली कंपनी का नाम लैंडमस रिएलिटी वेंचर इंक है। इस विज्ञापन के साथ लैंडमस ग्रुप के चेयरमैन प्रदीप कुमार एस का नाम दिया गया लिखा गया है।
बीबीसी रिपोर्टरों ने सबसे पहले कंपनी की वेबसाइट www.landomus.com को चेक किया। पता चला सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश करने का दावा करने वाली इस एक पन्ने की वेबसाइट पर वही बातें लिखी हुई हैं जो कंपनी ने अपने सोमवार के विज्ञापन में लिखा था। आम तौर पर मामूली कंपनियों की वेबसाइटों पर भी ‘अबाउट अस’ और कंपनी के कामकाज का पूरा ब्योरा होता है। साथ ही कंपनी किन क्षेत्रों में सक्रिय है, उसका पिछले सालों का प्रदर्शन कैसा रहा है, इस तरह की जानकारियां दी जाती हैं। न्यू जर्सी की गगनचुंबी इमारतों की तस्वीर को अपना कवर इमेज बनाने वाली इस वेबसाइट पर टीम के नाम पर कुल 10 लोगों की तस्वीर, नाम और पद तो लिखे हैं लेकिन उनके बारे में और कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। साइट के मुताबिक कंपनी के डायरेक्टर और एडवाइजर के नाम है- प्रदीप कुमार सत्यप्रकाश (चेयरमैन, सीईओ), ममता एचएन (डायरेक्टर), यशहास प्रदीप (डायरेक्टर), रक्षित गंगाधर (डायरेक्टर) और गुनाश्री प्रदीप कुमार है। एडवाइजडरों के नाम हैं पामेला किओ, प्रवीण आस्कर, प्रवीन मुरलीधरण, एवीवी भास्कर और नवीन सज्जन है। कंपनी की वेबसाइट पर न्यू जर्सी, अमेरिका का एक पता दिया गया है लेकिन कोई फोन नंबर नहीं दिया गया है। एक असमान्य बात ये भी है कि इसकी वेबसाइट पर कंपनी के किसी पुराने प्रोजेक्ट या विजन जो आमतौर पर कंपनियों की वेबसाइट पर दिखता है ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
पता तो है, पर दफ़्तर नहीं
एकमात्र अहम जानकारी जो इस वेबसाइट पर दी गई थी वो था अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य का पता- लैंडमस रिएलिटी वेंचर इंक, 6453, रिवरसाइड स्टेशन बुलेवर्ड, सकॉकस, न्यू जर्सी 07094, अमेरिका। बीबीसी के सहयोगी संवाददाता सलीम रिजवी इस पते पर पहुंचे तो पाया कि इस पते पर एक रिहायशी बिल्डिंग थी। यहां लैंडमस रिएलिटी या किसी भी कंपनी का कोई दफ्तर नहीं था। जब इस बिल्डिंग का डेटा रखने वाली महिला कर्मचारी से भी पूछा गया कि क्या इस पते पर लैंडमस रिएलिटी नाम का कोई आफिस रजिस्टर्ड है या अतीत में कभी भी रहा है तो उनका जवाब था, उन्होंने यहां कोई आफिस कभी नहीं देखा। हालांकि प्राइवेसील कारणों से उन्होंने ये नहीं बताया कि इस पते पर कौन रह रहा है और उनका नाम क्या है।
अब जांच वेबसाइट पर की गई। वेबसाइट पर दिए गए ईमेल एड्रेस पर सवालों की एक लिस्ट लैंडसम रिएलिटी वेंचर के नाम से भेजी गई। इसका कंपनी के सीईओ प्रदीप कुमार सत्यप्रकाश ने एक बहुत छोटा-सा जवाब दिया। अपने जवाब में प्रदीप कुमार सत्यप्रकाश ने लिखा है, “हमने भारत सरकार (जीओआई) को अपने विवरण भेजे हैं और उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। जब हमें जवाब मिलेगा तो हम पूरा विववरण आपको फारर्वर्ड करेंगे और सारी जानकारी भी सार्वजनिक करेंगे।” भारत सरकार ने इतने बड़े पूंजी निवेश के इस सार्वजनिक प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, न ही किसी तरह की कोई भी सरकारी घोषणा या टिप्पणी आई है। कंपनी के दफ़्तर के पते के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कंपनी के सीईओ ने लिखा है, “आपकी जानकारी के लिए, मैंने अमेरिका के न्यू जर्सी में किराये पर एक घर लिया है।” सीईओ का जवाब सुनकर आश्चर्य होता है कि सैकड़ों अरब डॉलर के पूंजी निवेश करने का प्रस्ताव रखने वाली कंपनी का अपना कोई दफ़्तर नहीं है। आपको बता दें कि बेंगलुरु के आॅफिस का भी जो पता दिया गया है वह भी फर्जी निकला। कंपनी के कागजात से बेंगलुरू का एक पता मिला जिसे लैंडमस रिएलिटी वेंचर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का पता बताया गया था। ये पता था एस-415, चौथी मंजिल, मनिपाल सेंटर, डिक्सन रोड, बेंगलुरु। इस पते पर लैंडसम रिएलिटी वेंचर का आफिस नहीं है और इसकी जगह वहां एक टेक कंपनी का दफ़्तर है।
फर्जी पता, बैलेंसशीट अपडेट नहीं
कंपनी की वेबसाइट के बारे में पता चला कि इस वेबसाइट को सितंबर 2015 को कर्नाटक में बनाया गया है और आर्गनाइजेशन के नाम पर यूनाइटेड लैंड बैंक का नाम दिया गया है। इसके बाद लैंडमस रिएलिटी वेंचर के बारे में और खोजना शुरू किया तो कॉपोरेट मंत्रालय के हवाले से जानकारी मिली कि जुलाई 2015 में लैंडमस रिएलिटी वेंचर प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी बेंगलुरु में रजिस्टर की गई थी। इसका पेडअप कैपिटल एक लाख रुपए है। सितंबर 2018 में कंपनी की आखिरी सालाना आम बैठक हुई थी और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 31 मार्च 2018 के बाद इस कंपनी ने अपनी बैलेंसशीट अपडेट ही नहीं की है।
