दुर्गा जी की झांकी ,जिस स्थान पर लगाना शुरू किया,वहाँ ,पहले से ही एक वृक्ष के नीचे एक प्राचीन मूर्ति रखी हुई थी, सिंदूर पुती इस मूर्ति को लोग जल चढ़ा कर पूजते रहे थे, इसी स्थान पर झांकी लगाना शुरू हुआ।1981, 82 में विचार बना की मैया की मड़िया बनाई जाए, दुर्गा जी की मूर्ति लाने हेतु रेलवे के टी सी अग्रवाल जी, ठाकुर लालसिंह आदि ने चंदा एकत्र किया और सतीश जैन के मार्गदर्शन में मैया की एक छोटी प्रतिमा ले आये, और बड़े ही उत्साह
साथ झांकी के स्थान पर दुर्गा जी की छोटी प्रतिमा स्थापित कर दी गई और टेंट ,चादर आदि का अस्थायी मन्दिर का स्वरूप बनाया गया। इसी के बाद मन्दिर बनाने का संकल्प सभी ने तय कर लिया।
इस तरह सर्वजन के सहयोग से एक विशाल देवी मन्दिर की बुनियाद शुरू हुई जो आज अपने भव्य स्वरूप में दर्शनीय स्थल बन चुका है।
मन्दिर परिसर में रामदरबार की अनोखी प्रतिमा है जो माता सीता के साथ राम जी और तीनों भाइयों, लक्ष्मण, भरत ,शत्रुघ्न के साथ गुरु वशिष्ठ, हनुमानजी महाराज के साथ ही बाबा तुलसीदास जी के दर्शन कराती है।