भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रित्व की चौथी पारी के दो वर्ष पूर्ण होने पर आज स्थानीय रविंद्र सभागम में उनका नागरिक अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राज्य शासन द्वारा गत दो वर्ष में विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का सेक्टरवार विवरण दिया। उन्होंने कई नवीन कल्याणकारी कार्यक्रम प्रारंभ करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के किसी पद पर कार्यकाल को कितने वर्ष हो गए उससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि ये कार्यकाल कितना सार्थक रहा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मैंने श्री कुशाभाऊ ठाकरे जैसे लोक कल्याणकारी सोच के जन नेता के मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जन-सहयोग से जन-कल्याण के कार्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी पूरी की है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि उनके प्रथम बार मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश में डकैतों का आतंक और असामाजिक तत्व का बोलबाला समाप्त करने की थी। पूर्व में राजनीतिक संरक्षण की वजह से असामाजिक तत्वों पर कार्यवाही नहीं होती थी। आज प्रदेश में कोई बड़ा सूचीबद्ध गिरोह नहीं है। अनेक डकैतों के खातमे के बाद सिमी का नेटवर्क समाप्त करने और अन्य असामाजिक तत्वों को नियंत्रित करने का कार्य किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि निर्धन व्यक्ति की जमीन पर कब्जा करने वालों और अनैतिक गतिविधियों में लिप्त तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई है। जिस बुलडोजर मामा की उन्हें पदवी दी जा रही है वह कार्य तो वर्ष 2005 से चल रहा है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति काबू में रखने पर निरंतर ध्यान दिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे आज ही नई दिल्ली में केंद्रीय उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल के साथ निर्यातकों की बैठक में मध्यप्रदेश के सोने जैसे दाने वाले गेहूँ के निर्यात बढ़ाने के संबंध में बैठक कर चुके हैं। यह निर्णय लिया गया है कि ऐसे किसानों को गेहूँ के निर्यात के लिए सभी सुविधाएँ दी जाएंगी। मंडी टैक्स भी नहीं लगेगा। राज्य शासन द्वारा इसकी प्रतिपूर्ति की जाएगी। विभिन्न एक्सपोर्टर्स ने भी मध्यप्रदेश के गुणवत्तापूर्ण गेहूँ के अधिक से अधिक निर्यात के लिए आश्वस्त किया है। इसके लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अब प्रदेश के किसानों की आर्थिक समृद्धि में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने सहकारी बैंकों को बदहाल कर दिया था। ऋण व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई थी। मध्यप्रदेश में गत 2 वर्ष में 1 लाख 72 करोड़ रुपए की राशि किसानों के खातों में जमा की जा चुकी है। इसके अलावा 2200 करोड़ रुपए का फसल बीमा योजना का प्रीमियम भी पूर्व सरकार ने जमा नहीं किया था। गत 2 वर्ष में किसानों को फसल बीमा राशि के 17 हजार करोड़ रूपये प्रदान किए गए हैं। किसान सम्मान निधि में केंद्र सरकार से मिलने वाली 6 हजार रुपए वार्षिक की राशि में मध्यप्रदेश सरकार ने 4 हजार रुपये शामिल कर किसान को मिलने वाली राशि को बढ़ाकर 10 हजार रुपए तक कर दिया है। इससे छोटे और सीमांत किसान बड़ी संख्या में लाभान्वित हुए हैं।
