भोपाल। आयुष एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में जो शोध किये जा रहे हैं, उन्हें विश्व-स्तरीय बनाये जाने की आवश्यकता है। ऐसा करके हम शोध को कहीं ज्यादा उपयोगी बना सकते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान के सलाहकार श्री सुनील कुमार आज भोपाल के आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में पीएच.डी. संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस विमर्श के माध्यम से विषय-विशेषज्ञों के विचारों को शोधकर्ताओं तक पहुँचाया जा रहा है।
सत्र के दौरान विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के रिसर्च स्कॉलर्स ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किये। प्रमुख रूप से स्वास्थ्य नीति, स्वास्थ्य प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, आयुर्वेद धनवंतरी, जीव विज्ञान, महामारी विज्ञान, मनोविज्ञान जैसे विषयों पर शोध प्रस्तुत किये गये। आयुष विभाग के अधिकारी डॉ. राजीव मिश्रा ने बताया कि मध्यप्रदेश के वनों में विविध किस्मों की औषधीय-वनस्पति पायी जाती है। इन पर लगातार शोध किये जाने की आवश्यकता है। आयुर्वेद की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि आयुर्वेद दवाईयों का मनुष्यों पर साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। इस वजह से इनके उपयोग को बढ़ावा दिये जाने की जरूरत है। सत्र की अध्यक्षता आरजीव्हीपी भोपाल की डॉ. अर्चना तिवारी ने की। सत्र में डॉ. दीपक द्विवेदी वैज्ञानिक लघु वनोपज संघ, असिसटेंट प्रोफेसर देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय, डॉ. हेमंत परमार ने शोधकर्ताओं को ऐसी सामग्री को शामिल किये जाने की बात कहीं, जो नवीन विषयों पर आधारित हो।
