बेगमगंज। नगर पालिका परिषद चुनाव में संभावित प्रत्याशियों द्वारा अपनी-अपनी दावेदारी भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी के समक्ष की गई थी । इस बार सक्रिय कार्यकर्ता बड़ी तादाद में टिकट के दावेदार थे लेकिन उन्हें दरकिनार करते हुए चाटूकारों को प्रत्याशी घोषित किए जाने के उपरांत आज कई दावेदारों ने बगावत का बिगुल बजाते हुए निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर दी और अपने-अपने वार्डों में सतत जनसंपर्क करने में जुट गए हैं ।
नगर पालिका परिषद के 18 वार्डों में से जिन वार्डों में सबसे ज्यादा दावेदारी की गई थी। उनमें वार्ड क्रमांक 3 , 4 , 5 , 6 , 7 , 8 , 11 , 12 , 13 , 15 , 16 , 17 , 18 शामिल हैं लेकिन उक्त वार्ड में जोड़ तोड़कर टिकट पाने वाले नाम स्पष्ट होते ही संभावित प्रत्याशियों में बगावत के स्वर तेज हो गए हैं और ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं द्वारा अपने नामनिर्देशन वापस नहीं लेने की घोषणा करते हुए निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का निश्चय कर लिया है ।
ऐसे अनेक प्रत्याशी अपने - अपने स्तर से चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।
इस बार भारतीय जनता पार्टी द्वारा जातीय संतुलन भी नहीं रखा है जैसे कि अल्पसंख्यक समुदाय से 4 जैन समाज से दो ठाकुर 3 लोधी दो साहू समाज से दो प्रत्याशी उतारे गए हैं जबकि भाजपा द्वारा नगर के 18 वार्डों में अन्य जाति एवं वर्गों में श्रीवास्तव , विश्वकर्मा , नामदेव , सोनी , माली , सेन , अहिरवार , कोली , धानक ,कलार इत्यादि समाज की पूरी तरह उपेक्षा करके इन समाजों की नाराजगी ले ली है जिसके कारण अन्य इन जातियों का भाजपा से मोहभंग हो सकता है और वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विद्रोह करके चुनाव मैदान में उतर आए हैं जो अपनी जाति के उम्मीदवार को जिताने में सक्षम हो सकते हैं बताया जाता है कि कुछ वार्डों में नए नवेले भाजपाइयों को टिकट दिए जाने के बाद विद्रोह के स्वर तेज हुए हैं ।
पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होने से उनमें निराशा के साथ आक्रोश भी बढ़ गया है । जिसको लेकर भाजपा में खलबली मच गई है और संभवत यह आक्रोश परिषद के गठन के समय अध्यक्ष पद को लेकर चलने वाली खींचतान में भाजपा के लिए नुकसानदेह सिद्ध हो सकता है । फिलहाल अभी तो भाजपा की स्थिति संतोषजनक नजर नहीं आ रही है । नगरीय निकाय के चुनाव परिणाम अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में निश्चित तौर पर प्रभाव डालेंगे ।
नाम नहीं छापने की शर्त पर भाजपा के कद्दावर नेता ने बताया कि इस बार टिकट वितरण में मनमानी चली है । चरण वंदना करने वालों को सबसे ज्यादा नवाजा गया है । कहीं ऐसा ना हो कि नगर पालिका परिषद पर काबिज होने का सपना पार्टी का सपना ही ना रह जाए और फिर से कोई दूसरा बाजी मार ले जाए ।
दूसरी ओर भाजपा के जिम्मेदार नेता उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए नगर के प्रायः सभी वार्ड जीतने का दावा कर रहे हैं ।
कांग्रेस कमेटी की ओर से अभी तक अपनी पार्टी के प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं किए जाने से ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। यहां भी कई दावेदार अपने -अपने टिकट का इंतजार कर रहे हैं । जिनमें अनेक प्रत्याशियों द्वारा तो अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क अभियान शुरू भी कर दिया गया है। फिलहाल दोनों पार्टियों में खींचतान शुरू हो गई है। अब देखना यह है कि आने वाले समय में ऊंट किस करवट बैठता है ।
