प्रथम प्रस्तुति एल बी टी की कलाकार और रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना मोनिका पाण्डे बोहरे ने "वंदेमातरम्"को कथक की भाषा में रूपांतरित करते हुए दी! इसके बाद "चतुरंग "की पेशकश में विविध देवियों के भावों का समागम इस तरह किया कि उससे भारत माता की पावन और सर्वसमावेशी छवि को आकार दिया ।
दूसरी प्रस्तुति उदयशंकर शैली की एकल नृत्य नाटिका की रही।युवा नृत्यकार , रंग निर्देशक योगेन्द्र सिंह राजपूत "योगी"की थी । उन्होंने "अभिनेता"कविता की एकल नृत्य नाटिका की तरह प्रभावी प्रस्तुति दी। इसमें रोचक ढंग से कलाकार की साधना और संघर्ष की झांकी दिखाई ।
इसके बाद शिवकुमार कटारिया सहित अन्य कलाकारों ने राष्ट्रभक्ति पूर्ण गीतों की प्रस्तुति से समां बांधा।
अंतिम प्रस्तुति गली गली में पन्नी बीन कर पेट पालने वाले छोटे छोटे बच्चों की रही! अनगढ़ नृत्य गतियों के बावजूद उनका उत्साह गजब का रहा। चांदनी नाम की बच्ची का "देश मेरा रंगीला"पर प्रस्तुत नृत्य प्रभावशाली रहा ।
कार्यक्रम का संचालन किरण मारण ने किया।आभार संस्था महासचिव निरूपा जोशी ने व्यक्त किया!भीषण बारिश के बावजूद कलाकारों, साहित्यकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही!