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आईसीआरटी टीम को भाया प्रदेश का ग्रामीण पर्यटन, होम स्टे देख बोले आप हमसे भी एडवांस हो

भोपाल। इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म (ICRT) की टीम मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति, स्थानीय लोगों के स्वभाव, प्रेम, स्वादिष्ठ व्यंजन, प्राकृतिक सौंदर्य सहित पुरातात्विक धरोहरों से काफी प्रभावित और अभिभूत हुई। पर्यटन बोर्ड की रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (30 अगस्त से 10 सितंबर तक) में आईसीआरटी की टीम प्रदेश के भ्रमण पर है। ग्वालियर, ओरछा, खजुराहो, मडला और छतरपुर में रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म की विभिन्न परियोजनाओं का अवलोकन कर टीम सोमवार को भोपाल लौटी। 

आईसीआरटी के संस्थापक निदेशक और रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म पार्टनरशिप के प्रबंध निदेशक डॉ. हेरोल्ड गुडविन के नेतृत्व में यूके, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, श्रीलंका आदि देशों से आए प्रतिनिधियों ने ओरछा का विश्व प्रसिद्ध लाडपुरा खास गाँव भी देखा। साथ ही खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिरों एवं पन्ना जिला में स्थित मडला के जंगलों का भ्रमण किया। ग्रामीणों ने पारंपरिक रूप से माला पहनाई, तिलक लगाया, फाग गीत एवं भजन सुनाए। स्थानीय पेय एवं भोजन खिला कर गर्मजोशी से स्वागत किया। विदेशी मेहमान इस दौरान पूरी तरह से ग्रामीणों से घुल-मिल गए। होम स्टे, फार्म स्टे, महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन परियोजना, कौशल विकास सहित रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म में विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं में ग्रामीणों, स्थानीय समुदाय एवं हितधारकों की सहभागिता से प्रभावित होकर आईसीआरटी प्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में आप लोग हमारे देशों से काफी आगे हो।

टीम ने भ्रमण के दौरान प्रदेश में महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थलों, होम स्टे, ग्राम स्टे, ग्रामीण पर्यटन, कृषि पर्यटन और युवाओं के कौशल इत्यादि पहलुओं पर चर्चा की। स्थानीय गाइड, होटल व्यवसायियों और महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन गंतव्य के लाभार्थियों सहित सभी हितधारकों से चर्चा कर सुझाव दिए। टीम ने कहा कि प्रदेश में लोगो ने अपनी संस्कृति को संजोए रखा है। व्यजंन, कला और शिल्प, होम स्टे सहित विभिन्न इकाइयों में भारत की महान संस्कृति की झलक दिखती है। इस विविधता को संरक्षित और संवर्धित रखते हुए पर्यटन का विकास होते देखना काफी सुखद अनुभव है।