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बाढ़ और अतिवृष्टि से हुए फसलों के नुकसान पर किसानों को अंतरित किए 202.64 करोड़ रूपये

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इस मानसून में अधिक वर्षा के कारण जहाँ शहरी क्षेत्र में व्यवस्थाएँ प्रभावित हुईं, वहीं ग्रामीण अंचलों में किसान वर्ग को अतिवृष्टि के कारण बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार ने सहायता पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित रहे प्रदेश के 19 जिलों विदिशा, सागर, गुना, रायसेन, दमोह, हरदा, मुरैना, आगर-मालवा, बालाघाट, भोपाल, अशोकनगर, सीहोर, नर्मदापुरम, श्योपुर, छिंदवाड़ा, भिंड, राजगढ़, बैतूल और सिवनी जिले के प्रभावित किसानों के खातों में 202 करोड़ 64 लाख रुपये की सहायता राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। अतिवृष्टि एवं बाढ़ प्रभावित जिलों का प्रभावित रकबा लगभग 2 लाख 2 हजार 488 हेक्टेयर है। मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। प्रभावित 19 जिलों के कलेक्टर्स और किसान वर्चुअली शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संकट के समय प्रभावित व्यक्तियों को सहायता पहुँचाने, आम जनता को तकलीफ की स्थिति में जरूरी सहयोग देने के लिए राज्य सरकार तत्पर है। बाढ़ और अतिवृष्टि के समय आवश्यक आपदा प्रबंधन किया गया। संकट के समय प्रशासन के साथ जन-प्रतिनिधि भी सक्रिय रहे।

किसी की जान न जाए, अन्य परेशानियाँ भी न हों, यह सुनिश्चित किया मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कुछ जिले अतिवृष्टि से प्रभावित रहे। राज्य सरकार ने ऐसी स्थिति में सभी जरूरी व्यवस्थाएँ कर यह सुनिश्चित किया कि जहाँ अतिवृष्टि से किसी की जान न जाए, वहीं किसी को अन्य परेशानियों का भी सामना नहीं करना पड़े। जहाँ बाढ़ की स्थिति थी, वहाँ से लोगों को रेस्क्यू कर राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद ग्रामों में जमा मलबा साफ करवाने, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने और अब किसानों को हुई क्षति पर सहायता राशि पहुँचाने का कार्य किया गया। फसलों की क्षति का सर्वे करवा कर ग्राम पंचायत में सूची भी प्रदर्शित की गई थी। मकानों के क्षतिग्रस्त होने और घरेलू सामग्री के नुकसान और पशु हानि के लिए पहले 43 करोड़ 87 लाख रूपए की राशि वितरित की चुकी है। आज 1 लाख 91 हजार 755 कृषकों के खाते में सहायता राशि अंतरित की गई है। पारदर्शी तरीके से हितग्राहियों के बैंक खातों में पैसा जमा किया गया है। इसके पहले राजस्व, कृषि, उद्यानिकी और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के संयुक्त दल ने सर्वे कार्य किया था।

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