संदीप विश्वकर्मा, पन्ना। पन्ना जिला जहां आज 40 वर्ष पहले था वहीं आज भी है। इससे बडी उपेक्षा क्या हो सकती है कि जिले की एकमात्र औद्योगिक संस्था एनएमडीसी मंझगंवा पन्ना लगभग दो वर्ष से पर्यावरणीय अनुमति न मिलने से बंद पड़ी हुई है। यदि कहीं केंद्र में कांग्रेस सरकार होती तो भाजपा सरकार के नुमाइंदे विपक्षी सरकार का राग अलापकर घडियाली आंसू बहाते, लेकिन विगत कई वर्षो से केंद्र एवं राज्य दोनों में भाजपा की सरकार बैठी है और इस सरकार में आज तक कोई उद्योग जिले में नहीं ला सकी तो कम से कम वर्षो पुरानी एकमात्र औद्योगिक संस्था एनएमडीसी को यथावत चालू रहने देते। कुल मिलाकर जिले के जनप्रतिनिधि सिर्फ अपना और अपने चहेतों के विकास में दिन रात जुटे हुए है। उन्हें जिले के विकास से कोई लेना देना नहीं रह गया है। केवल अपने लच्छेदार भाषणों में विकास के नाम पर खोखली घोषणाबाजी अवश्य करने में नहीं चूकते।
ज्ञात हो कि दुनिया में हीरों की चमक बिखेरने वाली पन्ना जिले की मझगवां हीरा खदान 22 महीने से बंद है। नतीजतन 60 हजार कैरेट हीरों का उत्पादन व 80 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ है। तीन हजार कामगारों के सामने रोजगार का संकट आ गया है। अब वे काम की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
दरअसल खदान संचालन के लिए जरूरी पर्यावरण और वाइल्ड लाइफ संबंधी अनुमतियां 31 दिसंबर 2020 को खत्म हो गई थीं। ऐसे में टाइगर रिजर्व के क्षेत्र तत्कालीन संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने परियोजना के महाप्रबंधक को पत्र जारी कर 1 जनवरी 2021 से खनन बंद करने के निर्देश दे दिए थे तब से खदान बंद है। हीरा खनन परियोजना में 3000 से अधिक लोग रोजगार पाते हैं। खदान में उत्पादन बंद होने से काम करने वाले 200 संविदा कर्मचारियों के पास काम नहीं है। प्रबंधन इन कर्मचारियों से महीनों तक वाहनों, मशीनों, प्लांट के रिपेयरिंग और मेंटेनेंस का काम करा रहा था, लेकिन प्लांट बंद होने से मशीनें भी खड़ी रहते हुए कबाड होने की कगार पर हैं।


