- किसान की असमय मृत्यु से परिवार पर टूट पड़ा दुखों का पहाड़
- किसान संगठन और ग्रामीणों ने की परिवार की मदद की अपील

इस बारे में परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि मृत किसान कुबेर सिंह दांगी खेती-किसानी करते थे। परिवार में मृतक किसान के दो बेटे और एक बेटी है, तीनों बच्चों की अभी शादी भी नहीं हुई है। मृत किसान अपनी खेती किसानी से अपने परिवार का भरण पोषण कर किसी तरह अपना परिवार चला रहें थे, लेकिन उनकी असमय मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक किसान के कंधों पर ही परिवार की सारी जिम्मेदारियां टिकी हुई थी।
अचानक दूध निकालते हुए गिर पडे किसान की हो गई मौतपरिजनों के मुताबिक मृतक कुबेर सिंह अपने खेत से गाय-भैंस के लिए चारा काटकर लाए। इसके बाद घर पहुंचने पर उन्होंने बच्चों से कहा मेरे सीने में हल्का दर्द हो रहा है। बच्चों ने कहा कि आप आराम कर लो, लेकिन किसान कहां छोटे-मोटे दर्द देखता है। उन्होंने कहा मैं भैंस लगा देता हूं। इतना कहकर किसान कुबेर सिंह जैसे ही भैंस का दूध निकालने बैठे और थोड़ा सा ही दूध निकाल पाए थे कि सीने में तेज दर्द हुआ और दूध का बर्तन भी वही गिर गया। तुरंत ही बच्चों ने गांव के लोगों की मदद से उन्हें बैरसिया के एक निजी अस्पताल लेकर आए, लेकिन स्थिति ज्यादा खराब देख डॉक्टर ने तुरंत भोपाल ले जाने की सलाह दी। परिजन और ग्रामीण किसान को बैरसिया स्थित शासकीय अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत्यु घोषित कर दिया। किसान कुबेर सिंह की मृत्यु से गांव भर में मातम छा गया।
गरीब किसानों की मदद के लिए किसानों ने की मांग
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष गिरवर सिह राजपूत, जिला मंत्री देवेन्द्र सिंह दांगी, अजब सिंह, दुर्जन सिंह, धनराज सिंह, प्रेम सिंह, राजेश सिंह, माधो सिंह दांगी ने कहा है कि सरकार को ऐसे गरीब किसानों की मदद करना चाहिए, जिनके तीन-तीन बच्चे हैं और एक भी बच्चे की शादी नहीं हुई है। उनके घर का कमाने वाला मुखिया चला गया। ऐसे में घर की क्या स्थिति होगी? किसानों ने शासन प्रशासन से आग्रह किया है कि किसान परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि कुछ सहारा मिल सके।