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केंद्रीय कृषि मंत्री और कृषि वैज्ञानिकों की राय- कृषि आधुनिकीकरण के लिए जलवायु के साथ ही उन्नत मशीनीकरण बेहद आवश्यक

  • केन्द्रीय कृषि अभियांत्रकी संस्थान भोपाल का 51वां स्थापना दिवस समारोह

भोपाल। केन्द्रीय कृषि अभियांत्रकी संस्थान, भोपाल ने हर्षोल्लास एवं गरिमापूर्ण वातावरण में 51वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया। यह अवसर कृषि अभियांत्रिकी अनुसंधान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी प्रसार के क्षेत्र में पाँच दशकों से अधिक की उत्कृष्ट उपलब्धियों का प्रतीक रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री थे। समारोह की अध्यक्षता डॉ. एमएल जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) तथा महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने की तथा सह-अध्यक्षता डॉ. एसएन झा, उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी), आईसीएआर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने की।




अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. सीआर मेहता, निदेशक, सीआईएई ने संस्थान की 50 वर्षों की उपलब्धियों एवं विकास यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकियों के विकास, सतत कृषि मशीनीकरण को प्रोत्साहन, कृषकों के श्रम-भार में कमी तथा ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।


कृषि आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध

अपने मुख्य उद्बोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि मशीनीकरण उत्पादकता वृद्धि, संसाधनों के दक्ष उपयोग तथा किसानों की आय संवर्धन का आधार है। उन्होंने नवाचार, डिजिटल कृषि, सटीक कृषि पद्धतियों तथा जलवायु-अनुकूल तकनीकों के माध्यम से कृषि के आधुनिकीकरण हेतु भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने लघु एवं सीमांत किसानों, महिला कृषकों तथा ग्रामीण उद्यमियों के लिए किफायती एवं व्यवहार्य मशीनीकरण समाधानों के विकास में सीआईएई के योगदान की सराहना की।



कपास चुनाई (कॉटन पिकर) मशीन का लोकार्पण एवं प्रदर्शन

उन्होंने अनुसंधानझ्रउद्योग सहयोग को सुदृढ़ करने, कस्टम हायरिंग केंद्रों को बढ़ावा देने तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु प्रौद्योगिकियों की अंतिम छोर तक पहुँच सुनिश्चित करने पर बल दिया। इस अवसर पर उन्होंने अनाज प्रसंस्करण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया तथा कपास खेत में कपास चुनाई (कॉटन पिकर) मशीन का लोकार्पण एवं प्रदर्शन किया। उन्होंने समावेशी कृषि विकास के लिए अनुसंधान संस्थानों, राज्य स्तरीय एजेंसियों, निमार्ताओं एवं किसान समूहों के मध्य प्रभावी समन्वय, साथ ही किसानों एवं ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।


जलवायु-संवेदनशील मशीनीकरण कृषि उन्नति का आधार

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. एम. एल. जाट ने नवाचार-आधारित एवं जलवायु-संवेदनशील मशीनीकरण को भविष्य की कृषि उन्नति का प्रमुख आधार बताया। इस अवसर पर संस्थान की विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया तथा प्रतिष्ठित प्रो. ए. सी. पंड्या स्मृति व्याख्यान डॉ. एम. एल. जाट द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें कृषि मशीनीकरण के समकालीन विकास, चुनौतियों एवं भावी संभावनाओं जिसमे आगामी शोध उत्थान के लिए रोडमैप बनाने पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। डॉ. एसएन झा, उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) ने सह-अध्यक्ष के रूप में अपना संबोधन देते हुए कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में रणनीतिक प्रगति एवं उभरते अवसरों पर विशेष प्रकाश डाला।



500 से ज्यादा किसानों और कृषि यंत्र निर्माता शामिल हुए

समारोह के दौरान अनुसूचित जाति के कृषकों को कृषि आदान किट वितरित की गईं। प्रगतिशील किसानों एवं निमार्ताओं द्वारा अनुभव साझा सत्र आयोजित किए गए। संस्थान की प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया तथा उन्नत कृषि यंत्रों के सजीव प्रदर्शन किए गए। किसान संगोष्ठी में किसानों, वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने कृषि मशीनीकरण की आवश्यकताओं तथा सतत कृषि विकास की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। इस आयोजन में 500 से अधिक किसान एवं कृषि यन्त्र निमार्ता ने सक्रिय सहभागिता की। प्रगतिशील किसानोएवं यन्त्र निमार्ताओ को उनके प्रशंसनीय कार्यके लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ. केपी सिंह, सहायक महानिदेशक (फार्म अभियांत्रिकी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


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