- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घायलों का हाल जाना और हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए जवाब मांगा
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा हादसे के बाद शनिवार का सूरज सियासी तपिश लेकर आया। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी आज खुद जमीनी हकीकत टटोलने उन गांवों की धूल फांकते नजर आए, जहाँ प्रशासन की कथित 'लापरवाही' ने मातम बिछा दिया है। सौंसर, करेर, मुआर और झामटा गांवों के गलियारों में जब कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी पीड़ितों के गले लगकर रोए, तो उनकी सिसकियों ने सत्ता को हिलाकर रख दिया।

पटवारी का आज का रण: भीड़ का इवेंट और प्रशासन का कत्ल
आज सुबह से ही जीतू पटवारी का रुख बेहद आक्रामक रहा। पीड़ित परिवारों के बीच जमीन पर बैठकर पटवारी ने सीधा मुख्यमंत्री मोहन यादव को ललकारा— साहब, शर्म आनी चाहिए! यह केवल सड़क का मोड़ नहीं था, यह आपकी सत्ता की भूख का मोड़ था। अपनी सभा में कुर्सियां भरने के लिए आपने आंगनवाड़ी कार्यकतार्ओं, रसोइयों और मनरेगा मजदूरों को सरकारी टारगेट बना दिया। उन्हें डराकर मौत की बस में भेड़-बकरियों की तरह झोंका गया। पटवारी ने मौके पर ही मांग बुलंद की कि सरकार मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, 5 हजार रुपये अंतिम संस्कार के लिए देकर आप अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। उस 17 साल की बच्ची का क्या कसूर, जिसका पूरा घर उजाड़ दिया गया?

आधी रात की दास्तां और कांग्रेस विधायकों का मोर्चा
हादसे वाली रात जब सरकारी तंत्र गहरी नींद में था, तब छिंदवाड़ा के कांग्रेस विधायक और नेता अस्पताल के वार्डों में पसीना बहा रहे थे। जुन्नारदेव विधायक सुनील उइके ने बताया कि रात 11 से 2 बजे के बीच अस्पताल में एक एम्बुलेंस तक मौजूद नहीं थी। उइके ने खुद मोर्चा संभालकर कलेक्टर से बात की और मरीजों को रेफर कराया। पटवारी ने आज इस मुद्दे पर भी सरकार को घेरा कि प्रशासन को फोटो-आॅप की जल्दी थी, पर घायलों के खाने और दवा का इंतजाम किसी ने नहीं किया।

भीषण सच: मजदूरी के नाम पर मौत का बुलावा
पटवारी के दौरे में जो सबसे खौफनाक सच सामने आया, वो यह कि कई महिलाओं को यह कहकर बस में बिठाया गया था कि उन्हें मनरेगा का काम दिलाने ले जा रहे हैं। एक बिलखते पति ने आज पटवारी के सामने अपना दर्द बयां किया— मुझे लगा वो मिट्टी खोदने गई है, पर उसे तो मुख्यमंत्री की तालियां बजाने की भीड़ का हिस्सा बना दिया गया।
खास नजरिया: आज जीतू पटवारी के तेवरों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। पटवारी ने 1 करोड़ रुपए मुआवजा की मांग उठाकर सत्ता के गले में फांस डाल दी है।