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वन रक्षक हरिकेश गुर्जर के परिवार को एक छदाम की मदद नहीं, आईएफएस एसोसिएशन ने लगाई मदद की गुहार

  • पहले प्रावधान की जानकारी नहीं होने और फिर फाइल मूव होने में बीत रहे एक के बाद एक दिन                                  
  • 2023 से ही लागू है शहीद का दर्जा देकर आश्रितों को 25 लाख रुपए की मदद करने का प्रावधान

भोपाल। रेत माफिया को रोकने के दौरान माफिया के ट्रैक्ट्र से कुचल कर जान गंवाने वाले वन रक्षक हरिकेश गुर्जर के परिवार को एक छदाम की मदद नही हो सकी है। इसको लेकर पहले तो महकमे के सीनियर अफसरों का कहना था कि प्रावधानों का पता नहीं, फिर प्रावधान बताने के बाद फाइल मूव ही नही हो पा रही है।
दूसरी ओर वन कर्मचारियों ने प्रदेशभर में प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपे, तो वहीं समस्त जिलों से लेकर राजधानी स्थित वन मुख्यालय में श्रद्धांजिल सभाएं आयोजित की गई।


ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाने वाले वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की अंत्येष्टि के लिए तत्काल 1 लाख 25 हजार रुपए की मदद विभाग की ओर से नहीं दी गई। इसके बाद कर्त्तव्य पालन में शहीद होने वाले वनकर्मचारियों को शहीद का दर्जा देकर परिवार को मिलने वाली 25 लाख रुपए भी नहीं दिए जा रहे। इसके विरोध में प्रदेशभर में वन कर्मचारियों ने प्रदर्शन के बाद जिला मुख्यालयों में ज्ञापन सौंपे हैं। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेने के बाद जारी नोटिस पर सोमवार को प्रमुख सचिव वन और पीसीसीएफ की ओर से जवाब पेश किया गया है।

इस बारे में मप्र वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामयश मौर्य की अगुवाई में भोपाल कलेक्टोरेट पहुंचकर 25 सूत्री ज्ञापन सौंपा गया। मौर्य ने बताया कि वन और वन्यप्राणियों की रक्षा में जान गंवाने वालों के परिवारों की तत्काल मदद होना चाहिए, न कि फाइलबाजी में अंत्येष्टी तक के लिए मदद नहीं हो सकी। संघ ने मांग की है कि रेत माफिया के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई करके हत्यारों को कठोर सजा दिलाई जाए।


 वनभवन सहित प्रदेशभर में दी गई श्रद्धांजलि

राजधानी स्थित वनभवन में प्रधान मुख्य वन सरंक्षक शुभरंजन सेन, वनबल प्रमुख समिता राजौरा और प्रधान मुख्य वन सरंक्षक (संरक्षण) अमित दुबे सहित समस्त अधिकारी और कर्मचारियों ने मौन रखकर वनरक्षक हरिकेश गुर्जर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी तरह प्रदेशभर में डीएफओ और सीसीएफ ने अपने-अपने स्टाफ के साथ शाम 5 बजे दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजिल अर्पित की।

शहीद का दर्जा मिलने के बाद मिलेगी मदद

निर्धारित नियम-प्रक्रिया के अनुसार वनविभाग (सरंक्षण) से आन डॅ्यूटी जान गंवाने वाले वरक्षक के बारे में सूचना दी जाएगी, जिसके बाद शासन शहीद का दर्जा घोषित करता है। इसके बाद ही संबंधित वन मंडलाधिकारी 25 लाख रुपए की आर्थिक मदद के लिए प्रक्रिया पूरी करके परिवार को चेक प्रदान करेगा।

 
2023 से शहीद का दर्जा और 25 लाख की मदद शुरु

तत्कालीन भोपाल वन मंडलाधिकारी और वर्तमान उज्जैन मुख्य वन सरंक्षक आलोक पाठक के अनुसार 2023 में राजधानी स्थित वनभवन में बने शहीद स्मारक का उद्घाटन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था। तभी अनुरोध किया गया था, जिसके बाद वनरक्षा में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा देकर 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। इसके बाद ही राजपत्र में संशोधन प्रकाशन होकर लागू भी हो गया। आईएफएस पाठक बताते हैं कि अनुसार सिवनी में बाघ के हमले से मौत और बालाघाट में जलने से वनरक्षकों की मौत के बाद शहीद का दर्जा देकर 25-25 लाख रुपए की मदद परिवारों को की गई। तब से ही यह प्रक्रिया शुरु हो गई, जोकि अभी भी जारी है।                                                                                                                                                                                                                                              
तत्काल सवा लाख रुपए की मदद दी जाए                                                                                                                                                                                                                                                                               
वित्त विभाग और वनविभाग के आदेश हैं, जिसमें मृत्यु होने पर अंत्येष्टि के लिए तत्काल सवा लाख रुपए की मदद सहित बाद में अन्य मदद के प्रावधान हैं। इसके बाद भी स्व. हरिकेश गुर्जर के परिवार की एक पैसे की मदद नहीं की गई।
-रामयश मौर्य, अध्यक्ष, वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ                                                                                                                                                                                                                                                               
प्रावधान होंगे तो जरुर मदद की जाएगी                                                                                                                                                                                                                                                                                           
तत्काल 50 हजार रुपए की मदद या बाद में सवा लाख या एक करोड़ की मदद के बारे में नहीं पता, क्योंकि ऐसे प्रावधानों का पता नहीं। फिर भी इसको चेक करवाते हैं, अगर ऐसे कोई प्रावधान होंगे तो जरुर मदद की जाएगी।
-शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन सरंक्षक, मध्यप्रदेश

आईएफएस कर रहे हैं मदद

प्रोटेक्शन सेक्शन आर्थिक सहायता की प्रक्रिया पूरी करता है। इस बारे में उनसे बात करेंगे, ताकि जल्दी हो सके। मृत वन रक्षक की मदद आईएफएस निजी स्तर पर भी कर रहे हैं।
-हरीशंकर मोहंता, अध्यक्ष, भारतीय वन सेवा संघ

हरसंभव मदद की जाएगी

मृत वन कर्मचारी की आर्थिक सहायता के लिए निर्धारित प्रावधान अनुसार मदद की जाएगी। कोशिश होगी कि परिवार को अधिकतम मदद हो सके, इस बारे में त्वरित कार्रवाई होगी।
-संदीप यादव, प्रमुख सचिव, वन विभाग
 


सुप्रीम कोर्ट में पेश हुआ पीएस और पीसीसीएफ का जवाब

मुरैना में रेत माफिया द्वारा ट्रैक्ट्र से कुचलकर वनरक्षक की हत्या के मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लिया गया है। इसमें प्रमुख सचिव वन संदीप यादव और प्रधान मुख्य वन सरंक्षक शुभरंजन सेन को नोटिस जारी करके सोमवार को जवाब तलब किया था। इस पर दोनों अधिकारियों की ओर से इस मामले के ओआईसी आईएफएस लवित भारती ने मप्र के सुप्रीम कोर्ट में स्टैंडिंग काउंसिल के माध्यम से कोर्ट के सामने पक्ष रखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मप्र सरकार को निर्देश देते हुए आगामी शुक्रवार को जवाब सहित पेश होने का आदेश दिया है।
 

 सुप्रीम कोर्ट में अब अगली सुनवाई 17 अप्रैल को 

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पक्ष रखने पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें मध्यप्रदेश का पक्ष रखा गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को कुछ डायरेक्शन दिए हैं। इस मामले में अब अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होनी है, उस दिन मध्यप्रदेश की ओर से सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन पर पालन सहित विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया जाएगा।

-लवित भारती,
ओआईसी, सीसीएफ ग्वालियर