- चिल्ड्रन थिएटर अकादमी द्वारा आयोजित सातवें बाल नाट्य समारोह में मुखौटा कला मंच की संवेदनशील प्रस्तुति
भोपाल। चिल्ड्रन थिएटर अकादमी भोपाल द्वारा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित सातवें बाल नाट्य समारोह में मुखौटा कला मंच द्वारा समरेश बसु की कहानी पर आधारित नाटक आदाब का सफल मंचन किया गया। यह प्रस्तुति मानवीय मूल्यों और उनके कायम रहने को लेकर गहरी संवेदना जगाती है, जिसका निर्देशन विष्णु झा ने किया।

प्रसिद्ध कहानीकार समरेश बसु की कहानी आदाब 1947 में सांप्रदायिक दंगों के दौरान की हिंसक त्रासदी को प्रदर्शित करती हे । सारे शहर में सांप्रदायिक दंगों के कारण कर्फ्यू लगा दिया गया हे देखते ही गोली मार देने के आदेश है, ऐसे में दो अजनबी अंधेरी रात में कर्फ्यू में फंस जाते है और जैसे-तैसे घर पहुंचना चाहते हैं। वह दो अजनबी जब अचानक एक दूसरे को देखते हैं, तो एक दूसरे के प्रति उनका अविश्वास और डर साफ दिखाई देता है। किसी तरह डर और संशय से भरे हुए वह एक दूसरे के बारे में किसी तरह जानते हैं। एक दूसरे को समझते हैं, जिससे शंकाएं दूर होकर उनका डर खत्म हो जाता है।

प्रस्तुत नाटक मानवीय संवेदनाओं की वकालत करता है। परिस्थितियां कैसी भी हों, मानवीय मूल्य हमेशा जिंदा रहते हैं। उन्हें ही बचाए रखने का एक प्रयास है यह नाटक।
नाटक के प्रमुख पात्रों में प्रियांशु ओझा, विष्णु झा, सौरभ सोनी, अनीश वंशकार, नमन आदिवासी शामिल थे। पार्श्व ध्वनि में पिंकी ओझा, वरुण गौड़, सनद झा, संघर्ष झा आदि शामिल थे। प्रकाश व्यवस्था वनमाली बंधानी ने की। समरेश बसु की कहानी आदाब का नाट्य रुपांतर और निर्देशन विष्णु झा ने किया, जोकि गहरा प्रभाव छोड़ता है।