- लोक निर्माण विभाग के विद्युत यांत्रिकी संभाग-1 भोपाल 12 शेड दफ्तर के सामने ही दिन-दहाडेÞ रिश्वत के नोट गिने और कम होने पर धमका रही थी, तभी लोकायुक्त पुलिस टीम ने धर पकड़ा
- रिश्वतखोर चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी पर वरिष्ठ अफसरों की मेहरबानी का आलम यह कि तृतीय श्रेणी के स्तर का स्थापना शाखा का प्रभार सौंप रखा था, जिससे खुलेआम रिश्वत वसूलती थी
भोपाल। सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को मिलने वाले क्लेम और पेंशन साहित दूसरे देयकों के भुगतान संबंधित फाइल बनाकर ऊपर भेजने के बदले पीडब्ल्यूडी के राजधानी भोपाल के 12 शेड दफ्तर में ढ़ाई हजार रुपए की रिश्वत ले रही महिला कर्मचारी (हेल्पर) को लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। रिश्वतखोर महिला कर्मचारी मूलत: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है, जिसको सालों से उच्चस्तरीय पेंशन और स्थापना जैसे अति महत्वपूर्ण सेक्शन का कार्यभार जिम्मेदार अफसरों ने सौंप रखा है।

दरअसल लोक निर्माण विभाग विद्युत यांत्रिकी शाखा, संभाग क्रमांक-1 भोपाल के सेवानिवृत्त हो रहे वायरमैन कार्तिकचंद्र सरकार ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गेश राठौर को लिखित शिकायत की थी। इसमें फरियादी कर्मचारी कार्तिकचंद्र सरकार ने बताया कि लोक निर्माण विभाग संभाग- 1 मे वायरमैन के पद पर कार्यरत हैÑ जिसको अगस्त 2026 मे सेवानिवृत्त होना है। ऐसे में उनके सेवानिवृत्ती के प्रकरण को बनाने तथा शासन से मिलने वाले भुगतानों के बदले मे स्थापना शाखा का काम संभालने वाली चतुर्थ श्रेणी हेल्पर श्रीमती अर्शी खान ने आवेदक कर्मचारी सरकार से 6000 रुपयों की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत नही देने पर महिला हेल्पर कर्मी अर्शी खान उसकी फाइल नहीं बना रही थी।
शिकायत सही होने पर बनाई गई ट्रैप टीम
इस शिकायत की पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल ने परीक्षण करवाया। इसमें शिकायत के सत्यापन के बाद रिश्वतखोर महिला कर्मचारी को पकड़ने के लिए ट्रैप टीम का गठन किया गया। इसमें निरीक्षक रजनी तिवारी, निरीक्षक घनश्याम मर्सकोले, प्रधान आरक्षक रामदास कुर्मी, प्रधान आरक्षक मुकेश पटेल, प्रधान आरक्षक नेहा परदेसी, आरक्षक मुकेश परमार और आरक्षक चैतन्य प्रताप सिंह शामिल थे।
कार्यालय के गलियारे में खडे होकर आराम से ले रही थी रिश्वत
रिश्वतखोर को पकड़ने के लिए लोकायुक्त ट्रैप टीम ने सोमवार को दोपहर करीब 12 बजे से लोक निर्माण विभाग विद्युत यांत्रिकी शाखा, संभाग क्रमांक-1 के आसपास घेराबंदी कर ली। इसके बाद फरियादी कर्मचारी को रिश्वत देने भेजा गया। हालांकि इसके बाद रिश्वत लेते महिला कर्मचारी अर्शी खान पति जाहिद खान, निवासी आलोक कालोनी, बैरसिया रोड ने 6 हजार रुपए रिश्वत देने का तय होने के बाद भी सिर्फ ढ़ाई हजार रुपए लाने पर फटकारा और धमकाने लगी। हेल्पर अर्शी खान ने कहा कि कम रिश्वत देने पर उसका काम अटका रहेगा। इसी बीच ट्रैप टीम ने घेर कर पकड़ लिया। इस दौरान आरोपी अर्शी खान ने हंगामा किया, लेकिन उसको नहीं छोड़ा गया और हाथ धुलवाने पर पानी गुलाबी हो गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) 2018 के अंतर्गत कार्यवाही की गई।
कर्मचारियों के खाते में पैसे ट्रांसफर करके वसूली में शामिल
इस मौके पर कर्मचारियों की भीड़ जमा हो गई, जिन्होंने बताया कि अर्शी खान पूर्व से ही अवैध वसूली करती आ रही है। पूर्व में साजिश करके लाखों रुपए विद्युत यांत्रिकी कर्मचारियों के सेलरी एकाउंट में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद कर्मचारियों को फोन करके बुलाया गया और उनके खाते से सेलरी से ज्यादा पैसे निकलवा कर हड़प लिए गए। इसका खुलासा सबसे पहले भोपाल की प्रोफेसर कालोनी स्थित ईएंडएम के एक कर्मचारी ने की थी। इसके बाद जांच हुई और वसूली के साथ ही एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि वसूली तो की गई, लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं करवाई गई है।