- भोपाल में चार इमली के नीचे 5 नंबर तालाब को नगर निगम और पीडब्ल्यूडी मिट्टी से भरने के साथ ही पेविंग ब्लॉक लगाकर चंद महीनों में इतिहास बनाने पर तुले
- तालाब किनारे मंदिरों को आवंटित जमीन के बाद पीछे की ओर तालाब में कचरा और मिट्टी भरने के बाद हो रहे अवैध निर्माण से कम हो रहा है जलभराव क्षेत्र
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी के मोस्ट वीआईपी इलाके चार इमली के 5 नंबर पर बले तालाब का नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के साथ ही मंदिरों के द्वारा खात्मा किया जा रहा है। जहां नगर निगम ने तालाब में ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने के लिए किनारे पर करीब 50 मीटर तक मिट्टी का भराव करके पानी सुखा कर मैदान बना दिया है, तो वहीं लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने किनारों पर पेविंग ब्लॉक लगाकर मिट्टी भरने के बाद घास लगाकर पार्क डेवलप किया है। हद तो यह है कि मंदिरों आदि के लिए आवंटित जमीन के पीछे की ओर कचरा और मिट्टी भरने के बाद अवैध कब्जा और निर्माण होते जा रहे हैं।
राजधानी भोपाल को तालाबों की नगरी कहा जारा है, लेकिन इनको बचाने और संवारने वाले महकमे ही इनको बर्बाद करने पर तुले हैं। चार इमली इलाके के नीचे वाला तालाब अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है। यहां पर नगर निगम के झील संरक्षण प्रकोष्ठ के जिम्मेदार अफसरों और इंजीनियरों ने बिना जरुरत चारों तरफ पेविंग ब्लॉक लगाने के साथ ही पैदल चलने के लिए रास्ता बना दिया है। इससे जहां पानी भरा होता था, वहां घास लगी और पाथ वे बना है। इस पर नशेड़ी डेरा जमाए रहते हैं और प्लास्टिक बोतलें, पाउच, गंदे पेपर यहां फैले पडेÞ रहते हैं। यह सब गंदगी तालाब में मिल रही है। यहां नगर निगम के बन रहे एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की आड़ में 50 मीटर से ज्यादा तालाब में मिट्टी और मलबा भरकर सुखा दिया गया है। इस पर दिन-रात भीड़ रहती है, जोकि यहां पर ताश खेलते हैं और गाली-गलौच करते रहते हैं। इससे तालाब सिमटता हुआ एक चौथाई कम हो चुका है।
मंदिरों के पीछे कचरा भरकर अवैध निर्माण और अतिक्रमण
तालाब किनारे मंदिरों और शैक्षणिक-सामाजिक संस्थाओं के लिए भूमि आंवटित की गई, लेकिन राजस्व विभाग या नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों को फुर्सत नही हिै कि यह मौके पर देखे कि आवंटित भूमि से भी कई गुना ज्यादा जमीन पर कब्जा हो चुका है। यहां मंदिरों के पीछे कचरा और गंदगी भरने के साथ ही अवैध निर्माण किए गए हैं। यहां सीवेज निकासी नहीं होने से सीधे तालाब में मिल रही है। नतीजा यह कि यहां किनारे पर बदबू और कीड़ों के कारण खड़ा होना मुश्किल हो गया है। बावजूद नगर निगम के अधिकारी इस ओर झांकते तक नही है। इसी के साथ साथ सामने बने जवाहर बाल उद्यान का डेवलपमेंट करने के लिए तालाब किनारे तक ब्लॉक और सीढ़ियां बनाई गई हैं, इससे तालाब का ईको सिस्टम चौपट हो रहा है।
.jpeg)

मंदिरों के पीछे कचरा भरकर अवैध निर्माण और अतिक्रमण
तालाब किनारे मंदिरों और शैक्षणिक-सामाजिक संस्थाओं के लिए भूमि आंवटित की गई, लेकिन राजस्व विभाग या नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों को फुर्सत नही हिै कि यह मौके पर देखे कि आवंटित भूमि से भी कई गुना ज्यादा जमीन पर कब्जा हो चुका है। यहां मंदिरों के पीछे कचरा और गंदगी भरने के साथ ही अवैध निर्माण किए गए हैं। यहां सीवेज निकासी नहीं होने से सीधे तालाब में मिल रही है। नतीजा यह कि यहां किनारे पर बदबू और कीड़ों के कारण खड़ा होना मुश्किल हो गया है। बावजूद नगर निगम के अधिकारी इस ओर झांकते तक नही है। इसी के साथ साथ सामने बने जवाहर बाल उद्यान का डेवलपमेंट करने के लिए तालाब किनारे तक ब्लॉक और सीढ़ियां बनाई गई हैं, इससे तालाब का ईको सिस्टम चौपट हो रहा है।
.jpeg)
पार्षद योगेंद्र सिंह चौहान का खुलासा-छठ पूजा के लिए कुंड बनवाया
क्षेत्रीय पार्षद योगेंद्र सिंह चौहान गुड्डू का इस बारे में कहना है कि भोजपुर के साथ ही बिहार निवासियों की छठ पूजा के लिए तालाब के किनारे मंदिर के पीछे कुंड बनवाया था, तालाब के कुछ हिस्से में पेविंग ब्लॉक भी लगवाए हैं। उसके पहले कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा जी ने पेविंग ब्लॉक लगवाए थे। पार्षद चौहान के अनुसार अभी इसके साडड में ही नगर निगम का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाने के लिए खुदाई चल रही है, जिसकी मिट्टी तालाब में ही भरी गई है। बाकी तालाब में मिट्टी पूरने और पेविंग ब्लॉक लगाकर सुखाने का काम पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर संजय मस्के करवा रहे हैं, जिससे करीब आधा तालाब भरा जा चुका है।
क्षेत्रीय पार्षद योगेंद्र सिंह चौहान गुड्डू का इस बारे में कहना है कि भोजपुर के साथ ही बिहार निवासियों की छठ पूजा के लिए तालाब के किनारे मंदिर के पीछे कुंड बनवाया था, तालाब के कुछ हिस्से में पेविंग ब्लॉक भी लगवाए हैं। उसके पहले कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा जी ने पेविंग ब्लॉक लगवाए थे। पार्षद चौहान के अनुसार अभी इसके साडड में ही नगर निगम का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाने के लिए खुदाई चल रही है, जिसकी मिट्टी तालाब में ही भरी गई है। बाकी तालाब में मिट्टी पूरने और पेविंग ब्लॉक लगाकर सुखाने का काम पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर संजय मस्के करवा रहे हैं, जिससे करीब आधा तालाब भरा जा चुका है।

बीएमसी के बजाए सीपीए वाले तालाब में मिट्टी भरने और सुखाने के जिम्मेदार
चार इमली वाला तालाब नहीं है, बल्कि सीवेज पॉंड है। इसमें एसटीपी लगा रहे हैं, ताकि अर्जुननगर और चार इमली से आने वाले सीवेज का ट्रीटमेंट होकर साफ पानी का तालाब बन सके। एसटीपी के सामने हमने नहीं, बल्कि सीपीए वालों ने तालाब में मिट्टी भरने के बाद पेविंग ब्लॉक लगाकर घास बिछाने के बाद मिट्टी भर रहे हैं।
-उदित गर्ग, चीफ इंजीनियर, झील संरक्षण प्रकोष्ठ, नगर निगम
मंदिरों को आवंटित जमीन का भौतिक सत्यापन के बाद अतिक्रमण हटेगा
मंदिरों को कितनी जमीन आवंटित है और पीछे तालाब में कितना फैल गए हैं, सीवेज या कचरा डंप करके अवैध निर्माण से तालाब में अवैध कब्जा की जांच करवा रहे हैं। नगर निगम से भी बात करेंगे कि कैसे तालाब में पेविंग ब्लाक लगाए। जल्द ही तालाब किनारे आवंटित राजस्व भूमि से अधिक पर अवैध निर्माण या कब्जे पर सख्ती से कार्रवाई करके हटाया जाएगा।
-प्रकाश नायक, एडीएम, भोपाल जिला
चार इमली वाला तालाब नहीं है, बल्कि सीवेज पॉंड है। इसमें एसटीपी लगा रहे हैं, ताकि अर्जुननगर और चार इमली से आने वाले सीवेज का ट्रीटमेंट होकर साफ पानी का तालाब बन सके। एसटीपी के सामने हमने नहीं, बल्कि सीपीए वालों ने तालाब में मिट्टी भरने के बाद पेविंग ब्लॉक लगाकर घास बिछाने के बाद मिट्टी भर रहे हैं।
-उदित गर्ग, चीफ इंजीनियर, झील संरक्षण प्रकोष्ठ, नगर निगम
जानकारी नहीं किसने किया तालाब में भराव, अब हटवाएंगे पेविंग ब्लाक
तालाब में मिट्टी भरके संकरा करने, किनारों पर पेविंग ब्लॉक लगाकर पाथवे बनाने और सौंदर्यीकरण की जानकारी नही है, अभी तत्काल अमले को भेज रहे हैं और मौके की जांच करवाएंगे। जो भी ऐसा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होकर अवैध निर्माण, मिट्टी, पेविंग ब्लॉक हटवाए जाकर तालाब को बचाएंगे।
-रामरूप जारोलिया, अधीक्षण यंत्री, सिविल, नगर निगम
तालाब में मिट्टी भरके संकरा करने, किनारों पर पेविंग ब्लॉक लगाकर पाथवे बनाने और सौंदर्यीकरण की जानकारी नही है, अभी तत्काल अमले को भेज रहे हैं और मौके की जांच करवाएंगे। जो भी ऐसा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होकर अवैध निर्माण, मिट्टी, पेविंग ब्लॉक हटवाए जाकर तालाब को बचाएंगे।
-रामरूप जारोलिया, अधीक्षण यंत्री, सिविल, नगर निगम
मंदिरों को आवंटित जमीन का भौतिक सत्यापन के बाद अतिक्रमण हटेगा
मंदिरों को कितनी जमीन आवंटित है और पीछे तालाब में कितना फैल गए हैं, सीवेज या कचरा डंप करके अवैध निर्माण से तालाब में अवैध कब्जा की जांच करवा रहे हैं। नगर निगम से भी बात करेंगे कि कैसे तालाब में पेविंग ब्लाक लगाए। जल्द ही तालाब किनारे आवंटित राजस्व भूमि से अधिक पर अवैध निर्माण या कब्जे पर सख्ती से कार्रवाई करके हटाया जाएगा।
-प्रकाश नायक, एडीएम, भोपाल जिला
.jpeg)
.jpeg)