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गर्भाशय संरक्षण के लिए आधुनिक उपचार पद्धतियों पर पैनल चर्चा आयोजित

  • जी एस वी एम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग द्वारा “Save the Uterus – Principles & Protocols” ( बच्चेदानी बचाओ,सिद्धांत एवं उपाय पर चर्चा ) विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन 
कानपुर (वेद गुप्ता)। जी एस वी एम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग द्वारा “Save the Uterus – Principles & Protocols” ( बच्चेदानी बचाओ,सिद्धांत एवं उपाय पर चर्चा ) विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न स्त्री रोग संबंधी परिस्थितियों में अनावश्यक गर्भाशय निष्कासन से बचाव, गर्भाशय संरक्षण की आधुनिक उपचार पद्धतियों तथा मरीज-केंद्रित उपचार के सिद्धांतों पर चिकित्सकों के बीच विचार-विमर्श करना था। गर्भाशय की ऐसी अनेक बीमारियां हैं जिनमें दवाइयां द्वारा उपचार संभव है एवं इन उपचारों द्वारा गर्भाशय को बचाया जा सकता है हर बीमारी में गर्भाशय निकालने की जरूरत नहीं है, इसकी जानकारी सिर्फ डॉक्टरों को ही नहीं अपितु मरीजों को भी होनी चाहिए।


कार्यक्रम की आयोजक डॉ. सीमा द्विवेदी रहीं, जबकि मॉडरेटर डॉ. रेनू सिंह गहलौत, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, कानपुर थीं।

पैनल में विशेषज्ञ के रूप में डॉ. सीमा द्विवेदी, डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. शायली अग्रवाल एवं डॉ. बंडाना शर्मा ने विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव एवं विशेषज्ञ विचार साझा किए।

चर्चा में पैनलिस्ट डॉ. प्रज्ञा त्रिवेदी, डॉ. भारती शर्मा, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. प्रीति, डॉ. फरहीन, डॉ. नूर एवं डॉ. दीप्ति ने भी सक्रिय सहभागिता की। विशेषज्ञों ने गर्भाशय से संबंधित रोगों के उपचार में उचित रोग-निदान, मरीज की आयु एवं भविष्य की प्रजनन इच्छा को ध्यान में रखते हुए उपचार का चयन तथा उपलब्ध गर्भाशय-संरक्षण (uterus-sparing) विकल्पों के महत्व पर चर्चा की।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ. पविका लाल एवं डॉ. करिश्मा शर्मा ने किया। विभाग के चिकित्सकों एवं रेजिडेंट्स ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।


चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि उचित चयनित मामलों में आधुनिक चिकित्सा एवं शल्य तकनीकों के माध्यम से गर्भाशय को संरक्षित रखते हुए प्रभावी उपचार संभव है। कार्यक्रम ने चिकित्सकों को विभिन्न नैदानिक परिस्थितियों में उपचार संबंधी निर्णयों के व्यावहारिक पहलुओं पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया।

“Save the Uterus” का संदेश महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, जागरूकता और आवश्यकता-आधारित उपचार को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।कार्यक्रम में विभाग के सभी संकाय सदस्य सम्मिलित हुए।