भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आज मीडिया से चर्चा के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के बालाघाट दौरे की जानकारी भी दी।
बालाघाट आ रहे हैं जननायक राहुल गांधी
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि सरकारी दमन से परेशान और अपने बच्चों की मौत के सदमे से उबर रहे आदिवासी समाज का दर्द बांटने जननायक राहुल गांधी जी 1 अक्टूबर को बालाघाट आ रहे हैं। वहां वो पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर स्तिथि की जानकारी लेंगे और उनका दर्द साझा करेंगे।
भाजपा की कठपुतली हैं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार!
सिंघार ने कहा कि भाजपा सरकार ने राज्यों में ज्ञानेश कुमार के जरिए वोट चोरी करवाई और अब जब ज्ञानेश कुमार की पोल खुल चुकी है, तो भाजपा खुद को बचाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस SIR को लेकर और लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से आंदोलन जारी रखेगी।
गरीबों के हक का राशन भी सड़ा रही है भाजपा सरकार
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश में पिछले 5 साल में सरकारी और निजी गोदामों में करीब ₹300 करोड़ का अनाज खराब हो गया। 1 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा राशन नमी, बारिश और चूहों की वजह से बर्बाद हुआ, जबकि इसके रखरखाव और ढुलाई पर सरकार ₹100 करोड़ से ज्यादा खर्च करती है।
कई जिलों के गोदामों में गेहूं, धान, दाल इत्यादि सड़ रहे हैं। क्या इस अनाज से गरीबी और कुपोषण के कारण मर रहे बच्चों को बचाया नहीं जा सकता था?
क्या शिक्षकों को बेघर करना चाहती है भाजपा सरकार?
TET परीक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे शिक्षकों को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार अपने फैसले शिक्षकों पर थोपना चाहती है। लेकिन जननायक राहुल गांधी जी और पूरी कांग्रेस पार्टी शिक्षकों के साथ खड़ी है। हम शिक्षकों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे।
प्रभावित आदिवासी परिवारों को लाठी नहीं, न्याय चाहिए
उन्होंने कहा कि छतरपुर-पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक एवं मझगांय-रूंझ सहित अन्य परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी परिवार अपने हक और पूर्ण मुआवजे के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।
लेकिन भाजपा सरकार उनकी पीड़ा सुनने के बजाय दमनतंत्र का इस्तेमाल कर उनकी आवाज कुचलने में जुटी है। आंदोलनकारियों को पुलिस द्वारा जबरन हिरासत में लिए जाने की तस्वीरें इसी असंवेदनशीलता की गवाही दे रही हैं। आंदोलनकारियों का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है, परिवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और जिनके घर-खेत परियोजनाओं की भेंट चढ़ रहे हैं, उन्हें न्याय देने के बजाय सरकार पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसाकर उनकी आवाज दबा रही है।