इंदौर। जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज की प्रमुख प्रचारिका सुश्री धामेश्वरी देवी की विशेष आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला के दूसरे दिन जीव के वास्तविक लक्ष्य और आनंद की खोज पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। 27 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 से 9 बजे दिव्य शक्ति पीठ, MR-10 रोड, BRTS मंदिर परिसर, इंदौर में आयोजित हो रही इस प्रवचन श्रृंखला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
सुश्री धामेश्वरी देवी ने कहा कि संसार का प्रत्येक जीव निरंतर आनंद की खोज में लगा है। वेदों के अनुसार “रसो वै सः”, अर्थात ईश्वर ही वास्तविक आनंद और रस का स्वरूप हैं। जीव ईश्वर का सनातन अंश होने के कारण अनादिकाल से उसी आनंद की तलाश करता आ रहा है।
उन्होंने समझाया कि मनुष्य शिक्षा, नौकरी, धन, प्रतिष्ठा और अन्य सांसारिक उपलब्धियों के पीछे भी अंततः सुख और शांति की प्राप्ति के लिए ही दौड़ता है। इसलिए प्रत्येक जीव की मूल चाहत आनंद है, जिसका वास्तविक स्रोत ईश्वर हैं।
प्रवचन में उन्होंने यह भी कहा कि केवल मंदिर जाकर पूजा-पाठ करना ही वास्तविक भक्ति नहीं है। यदि मनुष्य अपने प्रत्येक कर्म में ईश्वर की उपस्थिति को अनुभव करे और यह स्मरण रखे कि उसके सभी कर्म ईश्वर के ज्ञान में हैं, तो उसके आचरण में स्वाभाविक रूप से परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि ईश्वर को मानना और उन्हें जीवन में अनुभव करना—दोनों में अंतर है।
सुश्री धामेश्वरी देवी ने बताया कि ईश्वर की वास्तविक भक्ति के लिए भगवत्कृपा के सिद्धांत को समझना आवश्यक है, जिसका विस्तार प्रवचन श्रृंखला के आगामी सत्रों में किया जाएगा।
प्रवचन का समापन श्री राधा-कृष्ण भगवान की भव्य आरती के साथ हुआ। श्रृंखला 3 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 7 से 9 बजे जारी रहेगी।
हर जीव की खोज आनंद की है, और आनंद का वास्तविक स्रोत ईश्वर : सुश्री धामेश्वरी देवी
सितंबर 28, 2026
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