भोपाल । न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते: इस संसार में ज्ञान (आध्यात्मिक या दिव्य ज्ञान) के समान पवित्र करने वाला कुछ भी नहीं है। पुस्तक मेला आयोजन ज्ञान प्रधान आयोजन है। इन दिनों अज्ञान से सारी दुनिया पीड़ित होकर झुलस रही है। युगऋषि, वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित युग सहित अलौकिक है ,इसे आर्ष ग्रन्थों के समतुल्य माना जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने कोई कॉपीराइट नहीं रखा स्वयं गुरुदेव कहते हैं की दैवी संपदा पर अधिकार जताया नहीं जा सकता है और यह साहित्य दैवी प्रेरणा से लिखा गया है अतः इसे कॉपीराइट से मुक्त रखा जाए।
यह जानकारी श्री रघुनाथ प्रसाद हजारी उपझोन समन्वयक भोपाल उपझोन ने कोलार रोड स्थित आम्रश्री गार्डन में 6 दिवसीय ज्ञान यज्ञ पुस्तक मेले के शुभारंभ अवसर पर दी। आपने बताया कि ज्ञान प्राप्ति के लिए श्रद्धावन होना आवश्यक है इसके लिए तत्परता भी बरती जानी चाहिए। आज के ए आई के युग में ए आई पास विवेक नहीं है। उसे गुरुदेव के साहित्य द्वारा विवेकवान बनाया जा सकता है। विवेक सम्मत ज्ञान के लिए परमपूज गुरुदेव ने युग साहित्य लिखा है।
शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि डॉक्टर नरेन्द्र थापक वाइस चांसलर एल एन शिक्षण संस्थान भोपाल ने इस अवसर पर कहा कि परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित साहित्य जीवन जीने की कला एवं व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है। आत्म चिंतन में स्वाध्याय अनिवार्य है अतः हमने अपने शिक्षण संस्थान में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ का गठन किया है। हमारे शिक्षण संस्थानों में शनिवार को शैक्षणिक गतिविधियों में स्वाध्याय पारक कक्षाएं होती हैं। हमारे पास परम पूज्य गुरुदेव का 70% साहित्य उपलब्ध है।
इसके पूर्व देव पूजन और दीप प्रज्जलन के साथ अतिथियों ने पुस्तक मेले का शुभारंभ किया।
वरिष्ठ गायत्री परिजन एच एन सेन ने इस अवसर पर परिजनों को आशीर्वचन देते हुए पुस्तक मेले की सफलता की मंगल कामना की। सुरेश श्रीवास्तव ने पुस्तक मेला संचालन में उपयोगी टिप्स परिजनों को प्रदान किए ।स्वागत भाषण रमेश नगर जिला समन्वयक ने दिया। संचालन देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव तथा आभार एल एन नागदा ने व्यक्त किया।
मानव जीवन को समुन्नत बनाने बाला साहित्य दर्षनीय है
यहां पुस्तक मेला के प्रथम काउंटर पर बाल निर्माण एवं महापुरुष परिचय ,द्वितीय पर परिवार निर्माण ,तृतीय पर समाज निर्माण ,चतुर्थ पर श्रीराम शर्मा जीवन दर्शन, पंचम पर यज्ञ एवं संस्कार ,षष्टम पर गायत्री और यज्ञ,अष्टम पर भारतीय संस्कृति ,नवम में स्वास्थ्य एवं बनौषधि,दशम पर शिक्षा एवं स्वावलंबन, एकादश पर क्रांति धर्मी साहित्य, द्वादश पर कथा पुराण, त्रयोदश पर परम पूज्य गुरुदेव वांग्मय को प्रदर्शित किया गया है। इस प्रकार मानव जीवन को समुन्नत बनाने वाला संपूर्ण साहित्य ओउपलब्ध है। जो ब्रह्मभोज के अंतर्गत आधी कीमत में उपलब्ध कराया जा रहा है। पुस्तक मेला आयोजन समिति ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि अपनी भाभी पीढ़ी को वसीयत के रूप में अच्छी पुस्तकें देकर जाने के लिए कुछ पुस्तकें खरीदने अवश्य पधारिए।
शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि डॉक्टर नरेन्द्र थापक वाइस चांसलर एल एन शिक्षण संस्थान भोपाल ने इस अवसर पर कहा कि परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित साहित्य जीवन जीने की कला एवं व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है। आत्म चिंतन में स्वाध्याय अनिवार्य है अतः हमने अपने शिक्षण संस्थान में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ का गठन किया है। हमारे शिक्षण संस्थानों में शनिवार को शैक्षणिक गतिविधियों में स्वाध्याय पारक कक्षाएं होती हैं। हमारे पास परम पूज्य गुरुदेव का 70% साहित्य उपलब्ध है।
इसके पूर्व देव पूजन और दीप प्रज्जलन के साथ अतिथियों ने पुस्तक मेले का शुभारंभ किया।
वरिष्ठ गायत्री परिजन एच एन सेन ने इस अवसर पर परिजनों को आशीर्वचन देते हुए पुस्तक मेले की सफलता की मंगल कामना की। सुरेश श्रीवास्तव ने पुस्तक मेला संचालन में उपयोगी टिप्स परिजनों को प्रदान किए ।स्वागत भाषण रमेश नगर जिला समन्वयक ने दिया। संचालन देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव तथा आभार एल एन नागदा ने व्यक्त किया।
मानव जीवन को समुन्नत बनाने बाला साहित्य दर्षनीय है
यहां पुस्तक मेला के प्रथम काउंटर पर बाल निर्माण एवं महापुरुष परिचय ,द्वितीय पर परिवार निर्माण ,तृतीय पर समाज निर्माण ,चतुर्थ पर श्रीराम शर्मा जीवन दर्शन, पंचम पर यज्ञ एवं संस्कार ,षष्टम पर गायत्री और यज्ञ,अष्टम पर भारतीय संस्कृति ,नवम में स्वास्थ्य एवं बनौषधि,दशम पर शिक्षा एवं स्वावलंबन, एकादश पर क्रांति धर्मी साहित्य, द्वादश पर कथा पुराण, त्रयोदश पर परम पूज्य गुरुदेव वांग्मय को प्रदर्शित किया गया है। इस प्रकार मानव जीवन को समुन्नत बनाने वाला संपूर्ण साहित्य ओउपलब्ध है। जो ब्रह्मभोज के अंतर्गत आधी कीमत में उपलब्ध कराया जा रहा है। पुस्तक मेला आयोजन समिति ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि अपनी भाभी पीढ़ी को वसीयत के रूप में अच्छी पुस्तकें देकर जाने के लिए कुछ पुस्तकें खरीदने अवश्य पधारिए।