डॉ. वर्मा ने कहा कि विद्यालयीन पत्रिकाएँ विद्यार्थियों की प्रतिभा, शिक्षकों के प्रयासों और स्थानीय क्षेत्र की पहचान को सामने लाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने बच्चों से नियमित स्कूल आने, लक्ष्य तय करने और उसे पाने के लिए लगातार मेहनत करने का आह्वान किया। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का जिक्र करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और नागरिकों से अपनी भूमिका निभाने की अपील की। साथ ही सेवा संकल्प अभियान की प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने को कहा।
पड़रिया राजधार के प्राचार्य जाहर सिंह लोधी ने बताया कि पत्रिका विद्यार्थियों की प्रतिभा, शैक्षणिक गतिविधियों और पर्यावरण जागरूकता को सामने लाती है। उन्होंने पीएम श्री स्कूल बनने के बाद आई प्रगति भी गिनाई। महुआ खेड़ा कला के प्राचार्य नंदलाल बरकरे ने कहा कि ‘महुआ गौरव’ में स्कूल की रचनात्मक गतिविधियों, बच्चों की उपलब्धियों और क्षेत्र की संस्कृति व विरासत को जगह दी गई है। संचालन व्याख्याता दीपक सोनी ने किया।
छात्राओं ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साक्षी समूह की प्रस्तुति, मानवी-राशि और जियामोहिनी के समूह नृत्य ने दर्शकों का दिल जीत लिया। महुआ खेड़ा की छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में स्वागत नृत्य के साथ चार युगों की अवधारणा पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया, जो समारोह का खास आकर्षण रहा। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
डॉ. वर्मा ने परिसर में पौधारोपण किया और बच्चों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।
समारोह में एसएमडीसी अध्यक्ष सुनील कुमार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त शिक्षक देवी सिंह जाट, दोनों प्राचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया।
समारोह के बाद अपर संचालक ने शिक्षकों के साथ शैक्षणिक बैठक की। उन्होंने डी और ई ग्रेड के विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम सुधारने, उपचारात्मक कक्षाएँ (रेमेडियल क्लास) प्रभावी ढंग से चलाने और सीखने की कठिनाइयाँ दूर करने के उपाय बताए। ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक माहौल, उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए उन्होंने नई शिक्षा नीति के अनुरूप सर्वांगीण विकास पर जोर दिया।
डॉ. वर्मा ने विद्यार्थियों से सीधे बात कर उनकी जरूरतों और पढ़ाई के अनुभव भी जाने। बैठक में शिक्षकों ने कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहयोग देने और बेहतर नतीजों के लिए मिलकर प्रयास करने का संकल्प लिया।
