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शिक्षक की प्रेरणा से बंजर पहाड़ी अब हो गई हरी-भरी

अरुण सिंह, पन्ना.

आठ वर्ष पूर्व पटना तमोली गांव की जो पहाड़ी पूरी तरह से वृक्ष विहीन होकर वीरान हो चुकी थी, वह अब हरे-भरे वृक्षों से सुसज्जिजत होकर हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यह करिश्मा गांव के ही रिटायर्ड शिक्षक की प्रेरणा से पटना तमोली गांव के लोगों ने कर दिखाया है। अब इस हरी-भरी पहाड़ी में न तो कुल्हाड़ी चलती है और न ही पशु चरने जाते हैं, बल्कि गांववाले ही प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण कर रहे हैं। 

संरक्षण होने पर अब वृक्षों से आच्छादित पहाड़ी का दृश्य
संरक्षण होने पर अब वृक्षों से आच्छादित पहाड़ी का दृश्य
पर्यावरण संरक्षण में पटना तमोली गांव ने कायम की मिसाल 

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के गुनौर जनपद क्षेत्र का यह गांव पूर्व में सती काण्ड के चलते चर्चित रहा है, लेकिन अब पटना तमोली गांव पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाने लगा है। मौजूदा समय जहां विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अधाधुंध दोहन कर हर तरफ प्रकृति व पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, वहीं इस छोटे से गांव के लोगों ने पर्यावरण संरक्षण करके एक मिसाल कायम की है, जिससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। पूरे जिले में तमाम कानूनी बंदिशों व निगरानी के बावजूद व्यापक पैमाने पर जहां अवैध उत्खनन हो रहा है, वहीं जंगल की कटाई भी बदस्तूर जारी है। पहले वृक्ष कटते थे लेकिन अब जंगल कट रहे हैं। नदियों के सीने को छलनी किया जा रहा है तथा बोरिंग का प्रचलन बढने से धरती में जगह-जगह छिद्र किये जा रहे हैं। कभी बाढ़ तो कभी सूखा के रूप में प्रकृति अपनी नाराजगी का इजहार भी करती है, लेकिन प्रकृति के संकेतों को अनदेखा किया जा रहा है। ऐसे में पटना तमोली गांव के लोग ज्यादा सजग, संदेवनशील और प्रतिभाशाली कहे जायेंगे, जिन्होंने प्रकृति के संकेतों को समझा और प्रकृति से बैर-भाव छोड़ उसके संरक्षण में जुट गए। 



आठ साल पहले पटना तमोली की पहाड़ी थी वृक्ष विहीन
आठ साल पहले पटना तमोली की पहाड़ी थी वृक्ष विहीन
पटना तमोली गांव की वीरान और वृक्ष विहीन हो चुकी पहाड़ी के फिर से हरा-भरा होने की बड़ी रोचक दास्तान है। बताया जाता है कि वर्ष 2005 के लगभग यह पहाड़ी पूरी तरह उजड चुकी थी, यहां हरियाली का नामोनिशान नहीं था। गांव के बुजुर्ग शिक्षक सेतुबन्धु चौरसिया पहाड़ी की इस दुर्दशा से व्यथित थे। उन्होंने गांव के कुछ उत्साही युवकों को उजड़ी पहाड़ी को हरा-भरा बनाने के लिए प्रेरित किया। परिणाम स्वरूप अजय चौरसिया, ओम सोनी, वृन्दावन चौरसिया, कृष्ण कुमार पण्डा व हरिनारायण की टीम ने इस दिशा में पहल शुरू की। कुछ ही समय में इस पहाड़ी पर मौजूद वृक्ष के ठंठो व जड़ों से नई कोपलें फूटने लगीं, तीन-चार साल में ही इस पहाड़ी पर हरियाली की चादर बिछ गई और अब तो यहां एक भरा-पूरा समृद्ध जंगल तैयार हो गया है। ग्रामवासियों ने भी इस कार्य में रचनात्मक सहयोग दिया जिससे पेडों की कटाई व चराई पर प्रभावी रोक लग गई। पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीणों की इस अनूठी पहल व कामयाबी को देख वन महकमें ने भी रूचि ली और ग्राम वन समिति का गठन कर जंगल की सुरक्षा व संरक्षण के कार्य को गति प्रदान की। इसी का परिणाम है कि आठ वर्षों में ही पटना तमोली पहाड़ी का तकरीबन 142 हेक्टेयर क्षेत्र जो वीरान था, अब हरे भरे वृक्षों व वनस्पतियों से लहलहा रहा है। ग्राम वन समिति पटना तमोली को इब्राड संस्था कलकत्ता ने उल्लेखनीय कार्यों के लिए पुरस्कृत भी किया है।

पटना तमोली में 5 जून को होता है आयोजन
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर 5 जून को संस्कृत भवन पटना तमोली में आयोजन होता है, जिसमें आसपास की 10 ग्राम वन समितियों सहित पर्यावरण प्रेमियों को भी आमंत्रित किया जाता है। इस साल वन मण्डलाधिकारी दक्षिण आरसी विश्वकर्मा के निर्देशन में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में ग्राम वन समितियों के सदस्यों व आमजनों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया गया। उप वन मण्डलाधिकारी कल्दा यूपीएस गहरवार ने बताया कि ग्राम वन समिति पटना तमोली ने जो सराहनीय कार्य किया है, इसके लिए सार्वजनिक रूप से प्रशंसा होनी चाहिए। अन्य दूसरी ग्राम वन समितियों को भी यहां से प्ररेणा लेकर पूरे उत्साह के साथ जंगल व पर्यावरण की सुरक्षा में भागीदारी निभानी चाहिए।