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मर्यादा का मजाक...9 करोड़ के बिना सीट, गड्ढे के टायलेट

रेलिक रिपोर्टर, भोपाल.                                                                                                                     
वैसे तो शौचालय में एक कमरा के साथ ही देसी या यूरोपियन सीट और एक गढ्डा यानि टैंक होना लाजिमी होता है। बावजूद, खंडवा की खालवा जनपद पंचायत में बनाए गए शौचालय ऐसे हैं, जिनमें हवा के झोंके से कांपती फ्रेब्रीकेटेड दीवारेंभर हैं। फेब्रिकेटेड शौचालय के नाम पर लोहे के एंगल और सीमेंट सीट से बने बॉक्स तो रख दिए, लेकिन न तो सीट लगवाई, न फर्श बनवाया और न ही इस्तेमाल के लिए गड्ढे खुदवाए गए। खुलासा होने पर तीन ग्राम पंचायत सचिवों को तो सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन अधिकारियों एवं फे ब्रिकेटेड शौचालय सप्लाई करने वाले रायसेन जिले के एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई को जांच की आड़ में लटका दिया गया है। हद तो यह है कि, फेब्रिकेटेड शौचालय सप्लाई का खेल अभी रूका नही है बल्कि, बुरहानपुर सहित दूसरे जिलों में फैलता जा रहा है।                                                                                                                                             
मर्यादा का मजाक...9 करोड़ के बिना सीट, गड्ढे के टायलेट
-समग्र स्वच्छता अभियान में खंडवा की खालवा जनपद पंचायत में घोटला

-9 हजार में र्इंट के बजाय आधी कीमत में बनवाए गए फेब्रिकेटेड शौचालय

-खंडवा के बाद बुरहानुपर में भी एनजीओ के साथ मिलकर हो रहा है निर्माण                                                                              गौरतलब होगा कि, खंडवा जिले में मर्यादा अभियान के तहत गांवों में फेब्रिकेटेड शौचालय बनवाए जाना थे, लेकिन ईंटों का अभाव बताकर फ्रेब्रिक शौचालय एक एनजीओ के माध्यम से बगैर टेंडर के खरीदा जाकर बनवाने के साथ ही आनन-फानन में भुगतान भी कर दिया गया। इसकी शिकायत हुई तो जांच में खुलासा हुआ कि निर्धारित संख्या से कम शौचालय का निर्माण होने के बाद भी कागजों में खरीदी कई गुना ज्यादा की गई। नतीजे में ताबड़तोड़ तीन पंचायत सचिवों को निलंबित तो कर दिया गया, जो अदालत से स्टे लाकर अपने पदों पर बरकरार हैं। इस बारे में मलगांव के पंचायत सचिव कमल सिंह पवार का साफ कहना है कि, फेब्रिकेटेड शौचालय खरीदने का हुक्म जिला पंचायत से मिला था और इसके लिए दो दिन की ट्रेनिंग देकर प्रमाणपत्र भी दिए गए थे। 

बिना तकनीकी स्वीकृति लगाए फेब्रिकेटेड 
तकनीकी स्वीकृति पक्के शौचालय की दी गई, लेकिन फेब्रिकेटेड शौचालय लगाये गए। इसकी जांच ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के एसई एमएल डाबर ने की। खंडवा जिले में 10 हजार फेब्रिकेटेड शौचालय लगाये जाना प्रस्तावित है । एक शौचालय पर समग्र स्वच्छता अभियान से करीब नौ हजार नौ सौ रुपए की स्वीकृति हुई। जिसमे चार हजार पांच सौ रूपये मर्यादा अभियान से और चार हजार पांच सौ रूपये मनरेगा से दिया जाना स्वीकृत हुआ। बाकी 900 रूपए अंशदान के रूप में थे। फेब्रिकेटेड शौचालय लगाने के लिए पंचायत सचिवों को दो दिनी ट्रेनिंग के बाद रेडिमेड स्ट्रक्चर बनाने वाली संस्था सूरज मानव विकास संस्था गैरतगंज जिला रायसेन से 4600 रूपये की दर से फेब्रिकेटेड शौचालय ख़रीदे गए, जिनकी अनुमानित लागत बमुश्किल 1500 रुपए ही होगी। 
                                                                                                                      
मर्यादा का मजाक...9 करोड़ के बिना सीट, गड्ढे के टायलेट
ऐसे किया गया करोड़ों का घोटाला
ग्र्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग ने खालवा में ईंटों की कमी बताकर रेडिमेड स्ट्रक्चर के तीन मानक प्राक्कलन तैयार कर जिला पंचायत सीईओ को अवगत कराया था। खालवा सीईओ सौरभ सिंग राठौड़ ने तत्काल खरीदने के आदेश देने के साथ ही 27 मार्च 2014 को क्रमांक 1017 के माध्यम से ग्राम पंचायत मलगांव को 150 शौचालय के लिए 8 लाख 25 हजार रुपए की अग्रिम स्वीकृति का पत्र शाखा प्रबंधक बैंक आॅफ इंडिया को लिखकर सचिव को दिया था। रेडिमेड स्ट्रक्चर बनाने वाली संस्था सूरज मानव विकास संस्था गैरतगंज जिला रायसेन को अधिकृत कर सभी सचिवों को प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए। मलगांव, रोशनी और पटाजन सचिवों ने तो संस्था को 18.60 लाख रुपए के चेक भी जारी कर दिए। शिकायत होने पर जिपं सीईओ अमित तोमर ने रेडिमेड शौचालय का कार्य रोकने के तीन अलग अलग आदेश 19 मई2014 एवं 17 मई,2014 के बाद 22 जून,2014 को जनपद के समस्त अफसरों को दिए। आदेश नहीं मानने पर 31 दिसंबर,2014 को तीन सचिवों को सस्पेंड कर दिया गया।

दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
पटाजन, मलगांव व रोशनी पंचायत सचिवों को सस्पेंड किया जा चुका है। सीईओ सौरभसिंह राठौड़, ब्लाक समन्वयक संतोष भाबर, उपयंत्री नवीनसिंह एवं गुलाबसिंह धाकड़ भी दोषी पाए गए हैं। शौचालय बनने के बाद मानिटरिंग की जिम्मेदारी नहीं निभाने पर खालवा जनपद सीईओ के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। समन्वयक संतोष भाबर के कार्यकाल की जांच के साथ ही सूरज मानव संस्था के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। 
अमित तोमर, सीईओ, जिला पंचायत, खंडवा

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