अब मध्यप्रदेश के दूर-दराज गांवों तक में उन्नत देशी नस्ल की गाय और भैंसे नजर आने लगी हैं। इसकी वजह है, देशी नस्लों के सुधार और बढ़ावे के लिए मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम ने सीमन स्टेशन की क्षमता को बढ़ाकर दो गुना कर दिया है। अब हर साल करीब बारह लाख सीमन डोजेज को बढ़ाकर 25 लाख सीमन डोजेज तैयार किए जा रहे हैं। अभी चंद साल पहले तक खस्ताहाल और घाटे में चल रहे इस संस्थान की दशा और दिशा बदल चुकी है। अब यह मुनाफा देने वाला संस्थान बन चुका है।
अब हर साल साढे बारह लाख सीमन डोजेज को बढ़ाकर 25 लाख डोजेज किया
कभी बर्बादी की कगार पर पहुंच चुके सीमन स्टेशन बन गया है मुनाफे का संस्थान
तेजी से खत्म हो रहे हिन्दुस्तानी दुधारु पशुओं की नस्ल को बचाने की दिशा में मध्यप्रदेश को शानदार कामयाबी मिली है। इसके लिए मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के भदभदा स्थित बुल मदर फार्म के साथ ही सेंट्रल सीमन स्टेशन में बीते सालों में किया गया अपग्रेडेशन किया गया है। गौरतलब होगा कि, सीमन स्टेशन की स्थापना 1960 के दशक में की गई थी, ताकि किसानों और पशुपालकों को उन्नत नस्ल के दुधारु गाय और भैंस पैदा करने के लिए फ्रोजेन सीमन डोजेज (हिमीकृत वीर्य) मिल सके। हालांकि, स्टेशन की क्षमता प्रति साल 12 लाख 33 हजार डोजेज ही रही। इसको पशु पालन विभाग से 2002 में मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम को हस्तांतरित किया गया। बावजूद स्टेशन की क्षमता और कार्य में बदलाव तब आया, जब मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम की कमान 2012-13 में डॉ. एचबीएस भदौरिया ने संभाली। डॉ. भदौरिया ने सिर्फ दो से तीन साल में ही इस संस्थान को प्रदेश में कामयाबी का प्रतीक बनाकर राज्य के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के सपने को साकार करने की ओर सकारात्मक पहल करते हुए स्टेशन को अपग्रेड करने के साथ ही क्षमता भी बढ़ाई गई।
इन नस्लों का मिलता है सीमन
इस स्टेशन में अब 13 किस्मों के वीर्य प्रदाय की व्यवस्था हैं। इनमें जर्सी नस्ल की दो प्रकार के साथ ही गाय में साहीवाल, गिर, हरियाणवी, थारपारकर, मालवी, निमाड़ी, केनकथा के अलावा भैंस की मुर्रा और मुरादाबादी किस्में शामिल हैं। इन नस्लों को सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन के लिए जाना जाता है।
43 साल बाद फिर एप्रन पहना विस अध्यक्ष ने
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने 1972 के बाद शुक्रवार को फिर से डॉक्टर्स एप्रन पहना। हुआ यह कि, डॉ. शर्मा ने मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के भदभदा स्थित सीमन बैंक और बुल मदर फार्म देखने पहुंचे। यहां पर फ्रोजेन सीमन प्रोसेस देखने के लिए एप्रन और मॉस्क पहनते समय डॉ. शर्मा ने ही निगम के एमडी डॉ. एचबीएस भदौरिया को बताया कि, गांधी मेडिकल कॉलेज से 1972 में पास आउट होने के बाद अब एप्रन पहना। यहां पर डॉ. शर्मा ने सीमन स्टेशन में आए सुधार और सीमन उत्पादन में बढ़ोतरी की सराहना करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को फायदा होगा और सूबे में पशु पालन की दशा और दिशा बदल जाएगी।
कभी बर्बादी की कगार पर पहुंच चुके सीमन स्टेशन बन गया है मुनाफे का संस्थान
तेजी से खत्म हो रहे हिन्दुस्तानी दुधारु पशुओं की नस्ल को बचाने की दिशा में मध्यप्रदेश को शानदार कामयाबी मिली है। इसके लिए मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के भदभदा स्थित बुल मदर फार्म के साथ ही सेंट्रल सीमन स्टेशन में बीते सालों में किया गया अपग्रेडेशन किया गया है। गौरतलब होगा कि, सीमन स्टेशन की स्थापना 1960 के दशक में की गई थी, ताकि किसानों और पशुपालकों को उन्नत नस्ल के दुधारु गाय और भैंस पैदा करने के लिए फ्रोजेन सीमन डोजेज (हिमीकृत वीर्य) मिल सके। हालांकि, स्टेशन की क्षमता प्रति साल 12 लाख 33 हजार डोजेज ही रही। इसको पशु पालन विभाग से 2002 में मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम को हस्तांतरित किया गया। बावजूद स्टेशन की क्षमता और कार्य में बदलाव तब आया, जब मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम की कमान 2012-13 में डॉ. एचबीएस भदौरिया ने संभाली। डॉ. भदौरिया ने सिर्फ दो से तीन साल में ही इस संस्थान को प्रदेश में कामयाबी का प्रतीक बनाकर राज्य के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के सपने को साकार करने की ओर सकारात्मक पहल करते हुए स्टेशन को अपग्रेड करने के साथ ही क्षमता भी बढ़ाई गई।
इन नस्लों का मिलता है सीमन
इस स्टेशन में अब 13 किस्मों के वीर्य प्रदाय की व्यवस्था हैं। इनमें जर्सी नस्ल की दो प्रकार के साथ ही गाय में साहीवाल, गिर, हरियाणवी, थारपारकर, मालवी, निमाड़ी, केनकथा के अलावा भैंस की मुर्रा और मुरादाबादी किस्में शामिल हैं। इन नस्लों को सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन के लिए जाना जाता है।
43 साल बाद फिर एप्रन पहना विस अध्यक्ष ने
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने 1972 के बाद शुक्रवार को फिर से डॉक्टर्स एप्रन पहना। हुआ यह कि, डॉ. शर्मा ने मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के भदभदा स्थित सीमन बैंक और बुल मदर फार्म देखने पहुंचे। यहां पर फ्रोजेन सीमन प्रोसेस देखने के लिए एप्रन और मॉस्क पहनते समय डॉ. शर्मा ने ही निगम के एमडी डॉ. एचबीएस भदौरिया को बताया कि, गांधी मेडिकल कॉलेज से 1972 में पास आउट होने के बाद अब एप्रन पहना। यहां पर डॉ. शर्मा ने सीमन स्टेशन में आए सुधार और सीमन उत्पादन में बढ़ोतरी की सराहना करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को फायदा होगा और सूबे में पशु पालन की दशा और दिशा बदल जाएगी।
