Type Here to Get Search Results !

फ्लाप शो रही पशुधन निगम के एमडी के खिलाफ हड़ताल

रविन्द्र सिंह, भोपाल.
मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के कर्मचारियों ने पशुपालन विभाग के संचालक और पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष को अल्टीमेटम दिया है कि, अगर निगम के प्रबंधन के खिलाफ सतही और अनर्गल आरोप लगाना और हड़ताल की साजिश करना बंद नहीं किया तो नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें। क्योंकि, पशुपालन विभाग के अधीनस्थ सारे फार्म और परियोजनाएं करोड़ों के बजट के बाद भी सालों से घाटे में होकर रसातल की ओर है, वहीं निगम के फार्म जबर्दस्त मुनाफे के साथ ही उन्नत किस्म के पशुओं की पैदावार बढ़ाने में सराहनीय भूमिका निभा रहा है। दूसरी ओर, शासन की सख्ती के चलते शनिवार को एक दिनी सामूहिक अवकाश लेकर की गई प्रदेशव्यापी हड़ताल टायं-टायं फिस्स हो गई।

पशुपालन संचालक के इशारे पर हड़ताल की साजिश नाकाम..?

पशुपालन निगम के कर्मचारियों ने किया पलटवार

संचालनालय के बडे अफसरों को दिखाया आइना

दरअसल, पशुपालन विभाग के अधिकारी अचानक ही मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। इसी से निगम के कर्मचारी बिफरे हुए हैं कि, पशुपालन विभाग के अधिकारियों को पहले विभागीय फार्मों और प्रोजेक्ट में करोड़ों का घाटा और भ्रष्टाचार देखना चाहिए। दूसरी ओर, निगम के प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और करोड़ों का मुनाफा हो रहा है। इस बारे में मप्र निगम मंडल लघु वेतन एवं वाहन चालक कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष दिलबहादुर थापा और संरक्षक हीरालाल श्रीवास ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि, मौजूद प्रबंध संचालक डॉ. एचबीएस भदौरिया के प्रभार संभालने के बाद ही बंद होने की कगार पर पहुंच चुके निगम का कायाकल्प हो सका। अब तो घाटे से निकलकर करोड़ों का फायदा होने के साथ ही मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम ने राज्य में पशुओं की उन्नत किस्में पैदा करके बढ़ाने की ओर उल्लेखनीय कार्य किया है। कर्मचारियों को कल तक वेतन के लाले थे, लेकिन अब छठवां वेतनमान मिल रहा है। बावजूद, पशुपालन विभाग के संचालक डॉ. आरके रोकडे और भारतीय पशु चिकित्सा परिषद के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. उमेश शर्मा ने साजिश करके हड़ताल का हौव्वा खड़ा किया है, ताकि केंद्र और राज्य के नीतिगत निर्णय हो जाने के बाद भी फार्मों का ट्रांसफर निगम को होने से रोका जा सके। खास यही कि, निगम में पहले सालों तक डॉ. उमेश शर्मा आदि पहले की तरह मनमानी कर सकें।

पहले थे तब तो बर्बाद किया
पशुपालन विभाग के संचालक डॉ. रोकडे पूर्व में निगम के एमडी भी रहे हैं, इसी तरह डॉ उमेश शर्मा, डॉ मनोज गौतम और डॉ बकुल लाड आदि भी सालों तक पदस्थ रहे हैं। बावजूद निगम लगातार घाटे में रहा और कर्मचारियों को महीनों तक वेतन नहीं मिलने से रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे में इन सभी को हटाया गया, तभी निगम पनप सका। अब यही सारे मिलकर साजिश कर रहे हैं ताकि फिर से निगम पर कब्जा करके मनमानी कर सकें।

हड़ताल हो गई टांय-टांय फिस्स
प्रशासन की सख्ती के चलते शनिवार को संयुक्त मोर्चा पशुपालन की हड़ताल फ्लॉप शो साबित हो गई। शनिवार में प्रदेशभर में एक दिन का सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल के आव्हान को अधिकारियों और कर्मचारियों पे नकार दिया। आलम यह था कि, पशुपालन संचालनालय के सामने लगाए गए टेंट और डेढ़ सौ कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। बमुश्किल दो दर्जन कर्मचारी ही आ सके, जिनमें रिटायर कर्मचारी ही बहुतायत में थे। हद तो यह है कि, हड़ताल की कामयाबी का दावा करने वाले एक भी मोर्चा नेता की शकल तक इस धरना प्रदर्शन के दौरान देखने को नहीं मिली।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.