साप्रवि ने वापस लिया आदेश,
कोई अध्यक्ष वैध नहीं
सामान्य प्रशासन विभाग ने
दिनांक 2 जून 2017 को जारी एक परिपत्र ने प्रदेश की कर्मचारी राजनीति को एक नए
मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। साप्रवि ने अपने इस आदेश से म.प्र. तृतीय वर्ग
शासकीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पद पर पूर्व में मान्य वैधानिकता को वापस ले लिया है
क्या होगा इस आदेश से
साप्रवि के इस कदम से कटियार
गुट के पदाधिकारियों के संयुक्त परामर्शदात्री समिति में बैठने और अधिकारपूर्वक पत्राचार
करने के अवसर समाप्त हो जाएंगे। एक प्रकार से साप्रवि ने इस गुट की मान्यता और
सम्बद्धता को निरस्त कर दिया। साप्रवि के इस निर्णय से पदाभिलाषियों में
अफरा-तफरी का माहौल है।
क्या था मामला
अधिकारों से परे जाकर साप्रवि
के अफसरों ने 2 नवम्बर 2016 को प्रदेश के सभी जिलाधीशों को यह सूचना दी थी कि मध्यप्रदेश
तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के वैधानिक अध्यक्ष ओ.पी. कटियार हैं। जबकि
साप्रवि के इस आदेश के ठीक विपरीत म.प्र. सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा
32(2) के तहत रजिस्ट्रार, फर्म्स एंड सोसायटी ने इस विवादित संघ पर असली
कार्यकारिणी की जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया था। इस मामले में एक
गुट के प्रान्ताध्यक्ष सुरेश गर्ग ने 21 मार्च और 2 मई को मुख्यमंत्री, साप्रवि
मंत्री, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव, साप्रवि को पत्र लिखकर इस मामले को पक्षपात
बताया था। साथ ही मामले को लोकायुक्त में ले जाने की बात भी कही थी। साप्रवि के 2
नवम्बर 2016 को जारी पत्र को निरस्त करने का प्रशासकीय निर्णय राज्य शासन
द्वारा लिया गया है। भोपाल के विधायक सुरेन्द्रनाथ सिंह ने भी विधानसभा सत्र
जुलाई 2016 में इस मामले को विधानसभा में उठाया था। जिस पर हुई बहस में जांच का
आश्वासन दिया गया था।
