बालरंग
समारोह भारतीय संस्कृति का सही दर्शन है। विविधता में एकता हमारे देश की
संस्कृति है। बच्चे देश का भविष्य हैं, इन्हें बचपन से ही संवारना,
संस्कारवान, देश प्रेम और आपसी भाई चारे की भावना से ओतप्रोत करना समाज के
सभी वर्गों का नैतिक उत्तरदायित्व है। यह बात राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन
पटेल नेआज भोपाल के इंदिरा गांधीराष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आयोजित
राष्ट्रीय बालरंग समारोह का शुभारंभ कार्यक्रम में कही। राज्यपाल ने इस
अवसर पर बच्चों द्वारा लागाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा बालरंग
स्मारिका का विमोचन भी किया।
राज्यपाल
श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विभिन्न संस्कृतियों में पल रहे,
भिन्न-भिन्न भाषा बोलने वाले इन बच्चों को एक साथ एक मंच पर देखकर देश के
उज्जवल भविष्य का सपना सच होता दिखाई दे रहा है। राज्यपाल ने कहा कि भारत
विभिन्न संस्कृति, रिवाज, खानपान, आस्थाओं व मान्यताओं वाला देश है।
सांस्कृतिक विरासत देश की धरोहर है। इसका निरंतर संरक्षण और विकास
सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान आधुनिक,
प्रौद्योगिकी और तकनीकी के युग में नई पीढ़ी पर पश्चिम सभ्यता का प्रभाव
अधिक तेजी से देखने को मिल रहा है। नई पीढ़ी अपनी संस्कृति के जिस स्वरूप को
देखती है, उसी के अनुरूप जीवन के नये मूल्यों का निर्माण करती है। यह हम
सबका दायित्व है कि हम अपनी संस्कृति और सभ्यता से बच्चों को अवगत करायें।
राज्यपाल
ने कहा कि 80 प्रतिशत बच्चे माँ के गर्भ से ही सीख जाते हैं। उन्होंने कहा
कि हर छात्र इंजीनियर या डाक्टर नहीं बन सकता उन्हें अपनी रूचि के मुताबिक
शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। राज्यपाल ने बच्चों से
स्वच्छता परविशेष ध्यान देने का आव्हान किया।
आयुक्त
श्री जयश्री कियावत ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा गतिविधियों
की जानकारी दी। मानव संग्रहालय के निदेशक डॉ सरित चौधरी ने आभार व्यक्त
किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्री रश्मि अरूण शमी, सचिव
स्कूल शिक्षा श्री शोभित जैन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ और
गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।