मुख्यमंत्री
श्री कमल नाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि किसानों की कर्ज माफी
योजना का मसौदा इस तरह से तैयार किया जाये कि प्रदेश का कोई भी पात्र और
जरूरतमंद किसान इससे वंचित न रहे। किसानों की कर्ज माफी पर आज मंत्रालय में
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रमुख सचिव
कृषि विकास एवं किसान कल्याण डॉ. राजेश राजौरा द्वारा प्रेजेन्टेशन दिया
गया। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ द्वारा अधिकारियों को दिये गये निर्देश के
बाद 5 जनवरी को होने वाली मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों की कर्ज माफी
योजना को मंजूरी दी जायेगी।
61 लाख 20 हजार से ज्यादा किसानों को मिलेगा लाभ
बैठक
में बताया गया कि 31 मार्च, 2018 की स्थिति में किसानों को कृषि कर्ज माफी
का लाभ दिया जायेगा। इसमें 2 लाख रुपये तक के कालातीत कृषि ऋण को माफ किया
जायेगा। इससे प्रदेश के 61 लाख 20 हजार किसान लाभान्वित होंगे और उनके
करीब 62 हजार 294 करोड़ रुपये राशि के कर्ज में से दो लाख रूपये तक कृषि ऋण
माफ किये जायेंगे। इनमें राष्ट्रीयकृत, सहकारी और आरआरबी से लिये गये कृषि
ऋण शामिल हैं। किसानों को सुविधा दिये जाने के लिये ग्राम पंचायत स्तर पर
आवेदन करने की सुविधा होगी।
अन्य राज्यों से बेहतर होगी योजना
मध्यप्रदेश
में किसानों की कर्ज माफी के लिये जो योजना तैयार की गई है, वह उत्तर
प्रदेश और महाराष्ट्र राज्य में लागू की गई योजना से बेहतर होगी। प्रदेश
में किसानों को कर्ज माफी अल्पकालीन फसल ऋण पर ही प्रदान की जायेगी।
कृषि ऋण माफी की कट ऑफ डेट 31 मार्च की जगह 30 नवम्बर करने पर विचार
मंत्रि-परिषद
की बैठक में कृषि ऋण बकाया के लिये 31 मार्च, 2018 के स्थान पर कट ऑफ डेट
30 नवम्बर, 2018 किये जाने पर भी विचार किया गया। जानकारी दी गई कि कालातीत
बकायादारों की कर्ज माफी पर लाभान्वित किसान को ऋण मुक्ति प्रमाण-पत्र भी
दिया जायेगा। ऐसे किसान जिन्होंने 31 मार्च, 2018 के चालू बकाया को 30
नवम्बर तक चुका दिया है, उनको प्रति हेक्टेयर सम्मान-निधि प्रदान करने पर
भी विचार किया गया।
मंत्रिपरिषद
की बैठक में बताया गया कि कर्ज माफी अल्पकालीन फसल ऋण पर ही प्रदान की
जाना है। कर्ज माफी के लिये राज्य शासन द्वारा देय राशि डायरेक्ट बेनेफिट
ट्रांसफर (डीबीटी) से किसान के ऋण खाते में जमा की जायेगी। योजना का लाभ
प्राप्त करने के लिये आधार कार्ड की ऋण खाते में सीडिंग अनिवार्य होगा।
पहले चरण में लघु सीमांत किसान तथा सहकारी बैंकों के करंट आउट स्टेंडिंग
लोन के भुगतान पर विचार किया जायेगा। योजना में कालातीत ऋण, जो योजना
मापदण्डों में पात्र पाए गए हैं, उस राशि को बैंकों से वन टाइम सेटलमेंट
करने के बाद कार्यवाही की जायेगी। बैठक में जानकारी दी गई कि एक अप्रैल,
2007 या उसके बाद लिये गये ऋण जो 31 मार्च, 2018 को कालातीत घोषित किये गये
हों, उनको योजना में शामिल किया जायेगा। प्रदेश में 26 जनवरी, 2019 की
ग्रामसभा में योजना की पात्रता सूचियाँ प्रस्तुत की जायेंगी।
प्रेजेन्टेशन
में बताया गया कि कृषि ऋण माफी योजना के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता
में सक्षम साधिकार समिति का गठन किया जायेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में
क्रियान्वयन समिति गठित की जा चुकी है। जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री की
अध्यक्षता में जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति का गठन किया जायेगा। किसानों
को ऋण मुक्ति प्रमाण-पत्र और सम्मान-पत्र सार्वजनिक कार्यक्रमों में वितरित
किये जायेंगे।