मुख्यमंत्री
श्री कमल नाथ ने वचन-पत्र के संकल्पानुसार नवीन अध्यात्म विभाग के गठन का
निर्णय लिया है। नये विभाग में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा आनंद विभाग
संविलियित रहेंगे। साथ ही अभी तक कार्यरत धार्मिक न्यास तथा धर्मस्व
संचालनालय, तीर्थ एवं मेला प्राधिकरण, मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना
संचालनालय और राज्य आनंद संस्थान समाहित रहेंगे।
सर्वधर्म समभाव के लिये बनेगा नया विभाग
अध्यात्म
विभाग के गठन का उद्देश्य सभी धर्मों, पंथों और आस्थाओं को समाहित करते
हुए प्रदेश में अंतर साम्प्रदायिक सद्भाव और सर्वधर्म समभाव को मजबूत करना
है। अमेरिका, इंग्लैण्ड, अर्जेंटीना, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, बांग्लादेश,
ब्रूनेई, म्यांमार, ट्यूनीशिया, इण्डोनेशिया, डेनमार्क आदि अनेक देश में
विभिन्न नाम से अध्यात्मिक मामलों का विभाग कार्यरत है।
धार्मिक न्यास और धर्मस्व एवं आनंद विभाग के कार्य लगभग समान
धार्मिक
न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा शासन संधारित मंदिरों का जीर्णोद्धार,
पुजारियों को मानदेय, धर्मशाला निर्माण, धार्मिक स्थलों की यात्रा, तीर्थ
एवं मेला विकास के कार्य किये जाते हैं। आनंद विभाग का उद्देश्य भी
नागरिकों की खुशहाली एवं परिपूर्ण जीवन उपलब्ध कराना है। यह उद्देश्य भी
प्रस्तावित अध्यात्म विभाग में अपने आप ही समाहित होगा। अध्यात्म धर्म का
विरोधी नहीं है, बल्कि यह एक दिव्य और सार्वभौम चेतना के अनुभव पर बल देता
है। विकसित देशों के विभिन्न अस्पतालों में भी डिपार्टमेंट ऑफ स्पिरिचुअल
केयर होता है।
अध्यात्म विभाग के उद्देश्य
प्रस्तावित
अध्यात्म विभाग के उद्देश्यों में सभी समुदायों में एक कॉमन विजन और
अपनत्व बोध का विकास, विभिन्न पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के लोगों की
विविधता का सम्मान करते हुए उनमें आपसी समझ और सौहार्द का विकास, जिम्मेदार
नागरिक का विकास, भ्रूण हत्या, स्वच्छता मिशन और साम्प्रदायिक तनावों के
समय शांति स्थापना, गौ-वंश संरक्षण जैसे विषयों में विभिन्न धर्मगुरुओं के
माध्यम से प्रेरणा संचार, संत शक्ति का रचनात्मक उपयोग, लोक न्यास, औकाफ,
धार्मिक मेलों, तीर्थों, तीर्थ-यात्राओं आदि का उचित प्रबंधन, आनंद की
अवधारणा का नियोजन, नीति निर्धारण और क्रियान्वयन शामिल हैं।
अध्यात्म विभाग के प्रमुख कार्य
प्रस्तावित
अध्यात्म विभाग के प्रमुख कार्यों में भारत एवं मध्यप्रदेश के कम्पोजिट
कल्चर के विकास के लिये सतत प्रयास, प्रदेश के सभी समुदायों के बीच शांति
और मैत्रीपूर्ण सह अस्तित्व की भावना का विकास, देश-प्रदेश के महत्वपूर्ण
सामाजिक एवं नागरिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में विभिन्न धर्मों की संत
शक्ति का उपयोग, शासकीय देव स्थानों की चल-अचल सम्पत्तियों का सुव्यवस्थित
संधारण और धर्म-स्थानों का विकास तथा संरक्षण, उपासना स्थलों की सम्पदा का
वैज्ञानिक मूल्यांकन, उपासना स्थलों की सामाजिक-सांस्कृतिक उपस्थिति को
विकसित करना, धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिये पर्यटन विभाग से
समन्वय, पुजारी, सेवादार, मुजाबिर आदि के लिये मानदेय की व्यवस्था और
कल्याणकारी योजनाओं का निर्माण, धार्मिक एवं पूर्व न्यासों का प्रशासन,
उद्यानिकी विभाग के सहयोग से मंदिर उद्यान और ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग
से मंदिर सरोवरों का पुनरुद्धार, माँ नर्मदा न्यास अधिनियम आदि विभिन्न
विधिक व्यवस्थाओं का विकास एवं प्रवर्तन शामिल हैं।
ताप्ती, मंदाकिनी और क्षिप्रा नदी न्यास का भी होगा गठन
साथ
ही सूर्यपुत्री माँ ताप्ती नदी, माँ मंदाकिनी नदी और माँ क्षिप्रा नदी
न्यास के गठन की कार्यवाही भी होगी। प्रदेश की पवित्र नदियों को जीवित इकाई
बनाने के लिये कानून बनेगा। शासकीय एवं ऐतिहासिक धर्मस्थानों के संधारण के
लिये विशेष पैकेज, रामपथ गमन के प्रदेश में पड़ने वाले अंचलों का विकास,
धार्मिक स्थलों पर लगने वाले मेला आयोजन स्थल पर भीड़ एवं सुरक्षा प्रबंधन,
धर्मस्थलों की सम्पत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिये राजस्व एवं
नगरीय प्रशासन विभाग का समन्वय, प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर चिन्हित
तीर्थ-स्थलों की यात्रा एवं प्रबंधन, आनंद मापन के मानदण्ड एवं कार्यक्रमों
की पहचान, आनंद का प्रसार बढ़ाने के लिये विभिन्न विभाग के बीच समन्वय और
आनंद विषय पर एक ज्ञान संसाधन केन्द्र की तरह कार्य करना शामिल है।