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राहुल गांधी की चेतावनी का असर, अब आम जनता और कार्यकर्ताओं से प्रभारी मंत्रियों को मिलना अनिवार्य

भोपाल
 कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की चेतावानी का असर लोकसभा प्रभारियों की मीटिंग में दिखाई दिया। कांग्रेस पार्टी की ओर से सभी 52 जिलों के प्रभारी मंत्रियों से कह दिया गया है कि जब वे प्रभार वाले जिलों में जाएं वहां लोकसभा प्रभारी से समन्वय करें और जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित कर उनसे मेल मुलाकात करें। पार्टी ने लोकसभा प्रभारियों से 15 फरवरी तक संभावित लोकसभा प्रत्याशियों के नाम मांगे हैं। करीब एक दर्जन लोकसभा सीटों के संभावित प्रत्याशियों के नाम सौंपे गए हैं।

राहुल गांधी ने एक दिन पहले ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद  जनसभा को संबोधित किया और कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को दो टूक चेतावनी भी दे डाली कि हम जनता की वजह से यहां है और हमारी मालिक वह है। हम सिर्फ आर्डर सुनने के लिए हैं। पिछली लोकसभा प्रभारियों की हुई मीटिंग में यह बात सामने आई थी कि मंत्री बात नहीं करते उनका स्टाफ फोन नहीं उठाता, जो मंत्री बने हैं वे भाजपा नेताओं को लेकर साथ घूम कर रहे हैं। इस स्थिति में कैसे काम करें। यह बात प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने राहुल गांधी को भी बताई थी। इसके बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से मंत्रियों को यह सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। 

मंत्रियों की परीक्षा लोकसभा सीट को जिताने का टार्गेट, लोकसभा जिताओ कुर्सी बचाओ: पीसीसी में हुई बैठक में प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों के चलते  29 लोकसभा प्रभारियों के साथ 9 कोआर्डिनेटर भी नियुक्त किए हैं, ये सभी टीम राहुल के सदस्य होंगे। इनका एजेंडा ‘विन 29’ का होगा। इसके साथ ही पार्टी ने प्रत्येक विधानसभा में एक मंत्री के साथ चार विधायकों की टीम तैनात करने का भी फैसला लिया है। इसमें मंत्रियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा जिताओ कुर्सी बचाओ की होगी। मंत्रियों को गृह जिले की सीट के अलावा प्रभार वाले जिले की सीट को भी जिताने की तय की गई है। इस परीक्षा में खरे न उतरने पर मंत्री पद भी खतरे में पड़ सकता है। 

लोकसभा प्रभारियों ने हाथ ऊंचे किए, कहा राहुल लें फैसला : लोकसभा चुनाव लड़ाने के लिए संभावित प्रत्याशियों नाम सुझाए जाने के मामले में अधिकांश ने हाथ ऊंचे कर दिए हैं। उनका कहना है कि पहली बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव प्रदेश प्रभारी को सौंपा गया था कि प्रत्याशी का चयन पार्टी आलाकमान के हाथ में छोड़ा जाए, उसी फार्मूले के हिसाब से काम किया जाए। लोकसभा प्रभारियों ने बावरिया से चर्चा में यह भी कह दिया है कि जो नाम चुनाव लड़ने के लिए सामने आ रहे हैं, उनमें पार्षद और वार्ड मेंबर जैसे कार्यकर्ता हैं। लोकसभा लड़ने वालों के जो नाम सामने आ रहे हैं, उन नामों से प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया भी खुश नहीं है। उनका कहना है हमने 29 नाम ऐसे चाहिए जो सिर्फ जिताऊ चेहरे हों। 

बंद लिफाफे में इन सीटों के सौंपे नाम  
  • भोपाल- कैलाश मिश्रा, सुनील सूद, जोधाराम गुर्जर, अरुण श्रीवास्तव, नासिर इस्लाम, जितेंद्र सिंह, मनोज शुक्ला। 
  • इंदौर- जीतू पटवारी, पंकज संघवी,  सत्यनारायण पटेल, स्वप्निल कोठारी,  विनय बाकलीवाल, प्रीति  अग्निहोत्री, अर्चना जायसवाल। 
  • उज्जैन- रामलाल मालवीय, महेश परमार, मनोज चावला (तीनों विधायक)
  • विदिशा - प्रतापभानु शर्मा, शशांक भार्गव,  शैलेंद्र पटेल, राजकुमार पटेल, सुभाष शर्मा और लक्ष्मीकांत मरखेड़कर। 
  • सागर - प्रभुसिंह ठाकुर, अरुणोदय चौबे,  प्रकाश जैन,  भूपेंद्र सिंह मोहा सा। दमोह - चंद्रभान लोधी, मुकेश नायक, जीवन पटेल,  राजा पटेरिया,  रामकृष्ण कुसमरिया, अजय टंडन। 
  • टीकमगढ़ - योगेंद्र योगी, कमलेश वर्मा।