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श्रम कानूनों में बदलाव: जॉब गारंटी खत्म, महिला और बाल श्रमिकों का होगा शोषण


  • श्रम कानूनों में संशोधन का श्रमिक संगठनों ने किया विरोध, बीएमएस का अनिश्चितकालीन आंदोलन 20 मई से

भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले एक हजार दिनों में नए उद्योगों और निवेशकों को आमंत्रित करने के मद्देनजर औद्योगिक विवाद अधिनियम की सुरक्षा संबंधी धारा 25 को छोड़कर शेष प्रावधानों को शिथिल किया गया है। इससे उद्योगपति काम नहीं तो वेतन नहीं का नियम लागू कर सकेंगे।
कोरोना महामारी के बाद चीन छोड़कर एक हजार कंपनियां नया ठिकाना ढूंढ़ रही है, जिसके लिए केंद्र के साथ ही राज्य सरकारें भी श्रम और भूमि संबंधी कानूनों में ढ़ील देने वाले संशोधन कर रही हैं। ताकि मल्टीनेशनल कंपनियों को आकर्षित किया जा सके। इसी के तहत मप्र सरकार ने भी उद्योगों के लिए श्रमिकों के चयन और वेतन का अधिकार दे दिया है। इसको लेकर दुनिया के सबसे बडेÞ श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ सहित टेÑड यूनियन विरोध में उतर आए हैं।
काम नहीं तो वेतन नहीं 
मप्र श्रमायुक्त ने  5 मई 2020 को आदेश जारी किया है, जिसमें श्रम संगठनों एवं श्रमिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने कार्य पर लौटे अन्यथा प्रबंधन उनके वेतन में कटौती के लिए स्वतंत्र रहेगा। हालांकि, इससे पहले श्रमायुक्त ने 23 मार्च 2020 को जारी वेतन और अन्य वैधानिक आय में कटौती नहीं करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद केन्द्रीय गृह गृहमंत्रालय ने भी 29 मार्च 2020 को किसी भी कर्मचारी व श्रमिकों के वेतन में कोई भी कटौती नहीं किए जाने के आदेश दिए थे।
यह असर भी होंगे

  • बढेगा चाइल्ड लेबर और शोषण भी: चाइल्ड लेबर प्रतिबंधित है, लेकिन कुटीर और सूक्ष्म उद्योगों से लेकर असंगठित क्षेत्रों में बाल श्रम होता है। फायदे के लिए ठेके वाले कामों में चाइल्ड लेबर बढेगा। 
  • 8 के बजाय 12 घंटे की पाली: अभी तक 8 घंटे वर्किंग कल्चर है, जोकि बढ़कर 12 घंटे होगा। सप्ताह में 72 घंटे का ओवरटाइम। इससे मजदूर का शारीरिक शोषण बढेÞगा। स्वास्थ्य समस्याएं बढेंगी।
  • महिला श्रमिकों का होगा शोषण: महिलाओं को रात्रिकालीन ड्यूटी की छूट के साथ ही 12 घंटे की पाली होने से घर और परिवार की जिम्मेदारी एक साथ निभाना मुश्किल होगा। इससे जॉब लॉस होगा। 
  • तत्काल निरीक्षण नहीं होगा: 50 से कम श्रमिकों वाली संस्थाओं को श्रम कानूनों में निरीक्षण से बाहर किया गया है। केवल श्रमायुक्त की अनुमति से निरीक्षण हो सकेगा, जिससे गड़बड़ियां अनदेखी रहेंगी। 
  • फिक्स टर्म एम्पलायमेंट: औद्योगिक विवाद अधिनियम 100 की जगह 300 मजदूरों पर लागू होगा। कांट्रेक्ट वर्कर्स को फिक्स टर्म एम्पलायमेंटमिलेगा। ऐसे में 300 से कम श्रमिक होंगे तो लायबिलिटी से बचा जा सकेगा। 

देशभर में चलेगा आंदोलन
संवैधानिक श्रम कानूनों को दो साल के लिए निष्प्रभावी बनाने का आदेश मंजूर नहीं, क्योंकि जॉब से लेकर सिक्योरिटी तक की गारंटी नहीं बची। मुख्यमंत्री और भाजपाध्यक्ष से तत्काल श्रम विरोधी संशोधन वापस लेने की मांग की है, अगर सुनवाई नहीं होती तो 20 मई से अनिश्चितकालीन आंदोलन का अल्टीमेटम भी दे दिया है।
                                                                        कृष्णप्रताप सिंह, महामंत्री, भारतीय मजदूर संघ
ज्यादा फर्क नहीं पडेगा
श्रम कानूनों में संशोधन स्वागतयोग्य हैं, लेकिन इनसे ज्यादा फर्क नही पडेÞगा, क्योंकि लेबर से ही काम कराना है तो ख्याल भी रखना होगा। दुर्घटना होने पर तत्काल मदद होती है, श्रमिक बस्तियों तक में जनहित के काम करवाए जाते हैं। ऐसे में उद्योगपति का अटैचमेंट लेबर से रहता है और वह बिना कानून के भी उनका ख्याल रखता है।
                                                                        राजीव अग्रवाल, चेयरमैन, आल इंडस्ट्रीज आफ मंडीदीप
फोन स्वीचआफ हो गया
आशुतोष अवस्थी, श्रमायुक्त, इंदौर से जब भारतीय मजदूर संघ सहित दूसरे श्रमिक संगठनों की आपत्ति और संशोधन वापस लेने की मांग के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश को सुपरशीड करने को लेकर सवाल सुनने के बाद बिना कोई जवाब दिए मोबाइल फोन (9425054358) स्वीच आॅफ हो गया।
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