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आदिवासी गाँवों के विकास के लिए वन क्षेत्र से परिवहन की दें अनुमति : बिसाहूलाल सिंह

भोपाल। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री बिसाहूलाल सिंह ने कहा कि वन क्षेत्रों के आसपास बसे आदिवासी गाँवों के निवासियों को बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा आदि की मूलभूत सुविधाएँ देना सरकार की प्राथमिकता है और उनका अधिकार भी। वन क्षेत्र में रहने वाले वनवासियों की सुविधा बढ़ाने के लिए विकास कार्यों में आने वाली परेशानियों को प्राथमिकता से दूर किया जाए। मंत्री श्री सिंह आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के तहत गरीबों को आत्म-निर्भर बनाने के उद्देश्य से गठित मंत्रि-समूह के सदस्य मंत्रिगणों के साथ वन एवं ट्रायबल विभाग की समीक्षा कर रहे थे। आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री रामखेलावन पटेल, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्री ओ.पी.एस. भदौरिया भी उपस्थित थे।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री श्री सिंह ने कहा कि उजड़े हुए वनों को पुर्नस्थापित करें। इनमें बाँस एवं सागौन के पौधे रोपें। बाँस के 5 से 7 साल में संपूर्ण वृक्ष का रूप ले लेते हैं। उन्होंने कहा कि वन एवं ट्रायवल दोनों ही गरीबों से जुड़े विभाग हैं। आदिवासियों का जीवन जंगलों में पैदा होने वाले कंद मूल के विक्रय एवं उनके घरेलू उपयोग में होता है। उनके पालतु पशुओं के चारे एवं भोजन की व्यवस्था भी इन्हीं जंगलों के माध्यम से पूरी होती है। उन्होंने कहा कि जंगलों में पौधा रोपण के साथ छोटे छोटे स्टॉप डेम बनवाएँ, जिससे पौधों के लिए पानी की व्यवस्था की जा सके।

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा एवं पर्यावरण मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग ने कहा कि वनों में पौधों की देखभाल के लिए सहकारी समितियाँ बनाई जाएं और स्थानीय लोगों को उसमें शामिल कर उन्हें पौधों की देख-रेख का काम सौंपें। इसके लिए उन्हें वेतन भी दिया जाए। इससे पौधों की सुरक्षा के लिए अस्थाई रूप में रखे जाने वाले गार्ड अन्य व्यय को कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बाँसों की पैदावार और उसके उपयोग के लिए ट्री गार्ड के रूप में बाँसों का प्रयोग करें। इससे बाँसों के विक्रय से अतिरिक्त लाभ मिल सकेगा।